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ट्रेनी पॉलिसी से युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ न करे सरकार : सैनी
Tue, 22 Jul 2025 07:31 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 22 Jul 2025 07:31 PM IST
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प्रवक्ता संघ ने उठाई आवाज, कहा- ट्रेनी पॉलिसी शिक्षक विरोधी
बोले, बुढ़ापे की सुरक्षा भी छीन रही सरकार, मुख्यमंत्री करें व्यक्तिगत हस्तक्षेप
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने राज्य सरकार की नई ट्रेनी पॉलिसी को पूरी तरह शिक्षक विरोधी और युवा विरोधी करार दिया है। जिला अध्यक्ष शशिपाल सैनी और महासचिव संजीव कुमार ने सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में सरकार से मांग की है कि इस नीतिगत अन्याय को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी नवनियुक्त प्रवक्ताओं ही नहीं बल्कि भविष्य के हजारों शिक्षकों के सपनों पर कुठाराघात है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि इस नीति के चलते पेंशन का अधिकार भी छीन लिया गया है। एक आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अनुबंध सेवा की अवधि को पेंशन के लिए नहीं जोड़ा जाएगा। ऐसे में शिक्षकों को न केवल अस्थायी सेवा दी जा रही है, बल्कि उनके बुढ़ापे की सुरक्षा भी छीन ली जा रही है।
प्रवक्ता संघ ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2023 में विज्ञापित पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पुरानी अनुबंध नीति के अंतर्गत शुरू की गई थी। चयन की प्रक्रिया अत्यंत कठिन रही। क्वालिफाइंग परीक्षा, मुख्य परीक्षा और फिर साक्षात्कार, इन सभी चरणों को पार करने के बाद ही अप्रैल 2025 में नियुक्तियां हुईं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी कठिन प्रक्रिया के बाद सरकार अब इन प्रवक्ताओं को ट्रेनी की संज्ञा देकर उनके अधिकारों का हनन कर रही है। प्रवक्ता संघ ने सर्वोच्च न्यायालय के उस ऐतिहासिक निर्णय का भी हवाला दिया जिसमें मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने स्पष्ट कहा था कि नियुक्ति की तिथि के बाद कोई भी सेवा शर्त यदि कर्मचारी के अधिकारों को प्रभावित करती है तो वह कानूनन मान्य नहीं है। संघ ने यह भी प्रश्न उठाया कि जिन पदों को पहले ही वित्त विभाग से स्वीकृति मिल चुकी, क्या सरकार अब उन्हें ट्रेनी बताकर दोबारा वित्त विभाग की अनुमति लेगी।
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जिला अध्यक्ष शशिपाल सैनी ने कहा कि एक शिक्षक बनने के लिए उम्मीदवार पहले दो वर्ष का बीएड करता है, लाखों रुपये खर्च करता है, फिर टेट की परीक्षा और फिर आयोग की परीक्षा देता है। उसके बाद जब उसे नियुक्ति मिलती है, तो सरकार उसे ट्रेनी कहकर दो और वर्षों तक एक अनिश्चित भविष्य की ओर धकेलने की कोशिश करें तो यह अच्छी बात नहीं। प्रवक्ता संघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है।
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बोले, बुढ़ापे की सुरक्षा भी छीन रही सरकार, मुख्यमंत्री करें व्यक्तिगत हस्तक्षेप
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने राज्य सरकार की नई ट्रेनी पॉलिसी को पूरी तरह शिक्षक विरोधी और युवा विरोधी करार दिया है। जिला अध्यक्ष शशिपाल सैनी और महासचिव संजीव कुमार ने सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में सरकार से मांग की है कि इस नीतिगत अन्याय को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी नवनियुक्त प्रवक्ताओं ही नहीं बल्कि भविष्य के हजारों शिक्षकों के सपनों पर कुठाराघात है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि इस नीति के चलते पेंशन का अधिकार भी छीन लिया गया है। एक आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अनुबंध सेवा की अवधि को पेंशन के लिए नहीं जोड़ा जाएगा। ऐसे में शिक्षकों को न केवल अस्थायी सेवा दी जा रही है, बल्कि उनके बुढ़ापे की सुरक्षा भी छीन ली जा रही है।
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प्रवक्ता संघ ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2023 में विज्ञापित पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पुरानी अनुबंध नीति के अंतर्गत शुरू की गई थी। चयन की प्रक्रिया अत्यंत कठिन रही। क्वालिफाइंग परीक्षा, मुख्य परीक्षा और फिर साक्षात्कार, इन सभी चरणों को पार करने के बाद ही अप्रैल 2025 में नियुक्तियां हुईं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी कठिन प्रक्रिया के बाद सरकार अब इन प्रवक्ताओं को ट्रेनी की संज्ञा देकर उनके अधिकारों का हनन कर रही है। प्रवक्ता संघ ने सर्वोच्च न्यायालय के उस ऐतिहासिक निर्णय का भी हवाला दिया जिसमें मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने स्पष्ट कहा था कि नियुक्ति की तिथि के बाद कोई भी सेवा शर्त यदि कर्मचारी के अधिकारों को प्रभावित करती है तो वह कानूनन मान्य नहीं है। संघ ने यह भी प्रश्न उठाया कि जिन पदों को पहले ही वित्त विभाग से स्वीकृति मिल चुकी, क्या सरकार अब उन्हें ट्रेनी बताकर दोबारा वित्त विभाग की अनुमति लेगी।
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जिला अध्यक्ष शशिपाल सैनी ने कहा कि एक शिक्षक बनने के लिए उम्मीदवार पहले दो वर्ष का बीएड करता है, लाखों रुपये खर्च करता है, फिर टेट की परीक्षा और फिर आयोग की परीक्षा देता है। उसके बाद जब उसे नियुक्ति मिलती है, तो सरकार उसे ट्रेनी कहकर दो और वर्षों तक एक अनिश्चित भविष्य की ओर धकेलने की कोशिश करें तो यह अच्छी बात नहीं। प्रवक्ता संघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है।