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कंकरीट रास्तों के निर्माण के लिए सरकारी सीमेंट हुआ खराब
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ग्राम पंचायत जतरून में जाम हुआ सीमेंट।
- फोटो : Chamba
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चुवाड़ी(चंबा)। उपमंडल मुख्यालय चुवाड़ी के साथ लगती ग्राम पंचायत जतरूण में सरकारी सीमेंट खराब होने का मामला सामने आया है।
इन सीमेंट बैग का प्रयोग कंकरीट रास्तों के निर्माण पर किया जाना था, लेकिन अब ये सीमेंट बैग जम गए है। लिहाजा, अब यह सीमेंट प्रयोग करने लायक नहीं है। ऐसे में सरकारी धन का इस कदर दुरुपयोग लोगों को रास नहीं आ रहा है। मामले की शिकायत बीडीओ भटियात के पास पहुंच चुकी है।
विकास खंड कार्यालय ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हैरानी की बात तो यह है कि पंचायत प्रतिनिधि आचार संहिता का हवाला देकर सरकारी धन के इस दुरुपयोग के मामले में अपना पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं। लोगों में चर्चा है कि यदि उपमंडल मुख्यालय से सटी पंचायत में सरकारी धन का इस कदर दुरुपयोग हो रहा है तो फिर दूरदराज की पंचायतों की वास्तविक स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।
एक ओर जहां केंद्र सरकार पंचायतों के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है तो वहीं उपमंडल मुख्यालय से सटी ग्राम पंचायत जतरूण में सरकारी सीमेंट की बर्बादी की जा रही है। ग्राम पंचायत जतरूण के गांव सलोह और सारना में रखा सीमेंट अब ठोस हो गया है। बहरहाल इसका प्रयोग अब नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जो सीमेंट गांवों के विकास के लिए सरकार की ओर से दिया गया था, वो पंचायत प्रतिनिधियों की लापरवाही के चलते बर्बाद हो रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जो सीमेंट पंचायत में नए रास्तों के निर्माण के लिए आया था, उसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हुआ। इस कारण यह सीमेंट बर्बाद हो गया, जबकि न तो रास्ते बन पाए और न ही गलियों की मरम्मत हुई है, जिससे लोग काफी नाराज हैं। बीडीओ भटियात बशीर खान का कहना हैै कि यह मामला उनके ध्यान में आया है। कहा कि मामले की जांच की जा रही है। पंचायत सचिव से सीमेंट अलॉटमेंट से संबंधित रिपोर्ट मांगी गई है।
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क्या कहना है पंचायत प्रधान का
पंचायत के प्रधान सुरेंद्र कुमार का कहना है कि कंकरीट रास्तों का निर्माण किया जा रहा था, लेकिन आचार संहिता लागू होने के कारण काम बंद करवा दिया था और पंचायत में स्टोर न होने कारण सीमेंट ढक कर रख दिया था।
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इन सीमेंट बैग का प्रयोग कंकरीट रास्तों के निर्माण पर किया जाना था, लेकिन अब ये सीमेंट बैग जम गए है। लिहाजा, अब यह सीमेंट प्रयोग करने लायक नहीं है। ऐसे में सरकारी धन का इस कदर दुरुपयोग लोगों को रास नहीं आ रहा है। मामले की शिकायत बीडीओ भटियात के पास पहुंच चुकी है।
विकास खंड कार्यालय ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हैरानी की बात तो यह है कि पंचायत प्रतिनिधि आचार संहिता का हवाला देकर सरकारी धन के इस दुरुपयोग के मामले में अपना पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं। लोगों में चर्चा है कि यदि उपमंडल मुख्यालय से सटी पंचायत में सरकारी धन का इस कदर दुरुपयोग हो रहा है तो फिर दूरदराज की पंचायतों की वास्तविक स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।
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एक ओर जहां केंद्र सरकार पंचायतों के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है तो वहीं उपमंडल मुख्यालय से सटी ग्राम पंचायत जतरूण में सरकारी सीमेंट की बर्बादी की जा रही है। ग्राम पंचायत जतरूण के गांव सलोह और सारना में रखा सीमेंट अब ठोस हो गया है। बहरहाल इसका प्रयोग अब नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जो सीमेंट गांवों के विकास के लिए सरकार की ओर से दिया गया था, वो पंचायत प्रतिनिधियों की लापरवाही के चलते बर्बाद हो रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जो सीमेंट पंचायत में नए रास्तों के निर्माण के लिए आया था, उसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हुआ। इस कारण यह सीमेंट बर्बाद हो गया, जबकि न तो रास्ते बन पाए और न ही गलियों की मरम्मत हुई है, जिससे लोग काफी नाराज हैं। बीडीओ भटियात बशीर खान का कहना हैै कि यह मामला उनके ध्यान में आया है। कहा कि मामले की जांच की जा रही है। पंचायत सचिव से सीमेंट अलॉटमेंट से संबंधित रिपोर्ट मांगी गई है।
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क्या कहना है पंचायत प्रधान का
पंचायत के प्रधान सुरेंद्र कुमार का कहना है कि कंकरीट रास्तों का निर्माण किया जा रहा था, लेकिन आचार संहिता लागू होने के कारण काम बंद करवा दिया था और पंचायत में स्टोर न होने कारण सीमेंट ढक कर रख दिया था।