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कक्कड़ के नवजात को कुत्तों से बचाया
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चंबा। बरौर वन बीट में दस दिन के कक्कड़ के बच्चों को लावारिस कुत्तों से बचाकर वन विभाग से सेवानिवृत्त अशोक शर्मा ने मानवता की मिसाल पेश की। 15 दिन पहले जब वह शाम को अपने घर की तरफ जा रहे थे तो उन्हें जंगल के भीतर कुत्तों के भौंकने की आवाजें सुनाई दीं। उन्होंने देखा कि कुछ कुत्ते एक कक्कड़ के नवजात को नोचने की कोशिश कर रहे थे। जबकि, बच्चे की मां कुत्तों से अपने बच्चे को बचाने की कोशिश कर रही थी।
उन्होंने तुरंत कुत्तों को वहां से भगाया। साथ ही जख्मी बच्चे को अपने साथ घर ले गए। इसके बारे में उन्होंने वन विभाग के वन पालक जगदीश सिंह को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन पालक ने अपने दो वन रक्षक वहां भेजे। उन्होंने बच्चे का उपचार किया। 15 दिन तक सेवानिवृत्त वन कर्मचारी अशोक और अन्य विभागीय कर्मचारी कक्कड़ के बच्चे की देखभाल करते रहे। 15 दिन बाद बुधवार को बच्चे को उसी जगह छोड़ने के लिए वन विभाग की पहुंची।
टीम में वन पालक जगदीश, वन पालक सुनील कुमार, वन रक्षक राजीव कुमार और संजीव कुमार मौजूद रहे। जैसे ही वन विभाग की टीम वहां पहुंची तो उनकी नजर बच्चे की मां पर पड़ी, जो पहले से ही वहां मौजूद थी। जैसे ही बच्चे को जंगल में छोड़ा तो दोनों वहां से जंगल के भीतर चले गए। वन पालक जगदीश ने बताया कि कक्कड़ का बच्चा 15 दिन पहले मिला था। उसे उसकी मां से मिलाकर जंगल में छोड़ दिया गया है।
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उन्होंने तुरंत कुत्तों को वहां से भगाया। साथ ही जख्मी बच्चे को अपने साथ घर ले गए। इसके बारे में उन्होंने वन विभाग के वन पालक जगदीश सिंह को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन पालक ने अपने दो वन रक्षक वहां भेजे। उन्होंने बच्चे का उपचार किया। 15 दिन तक सेवानिवृत्त वन कर्मचारी अशोक और अन्य विभागीय कर्मचारी कक्कड़ के बच्चे की देखभाल करते रहे। 15 दिन बाद बुधवार को बच्चे को उसी जगह छोड़ने के लिए वन विभाग की पहुंची।
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टीम में वन पालक जगदीश, वन पालक सुनील कुमार, वन रक्षक राजीव कुमार और संजीव कुमार मौजूद रहे। जैसे ही वन विभाग की टीम वहां पहुंची तो उनकी नजर बच्चे की मां पर पड़ी, जो पहले से ही वहां मौजूद थी। जैसे ही बच्चे को जंगल में छोड़ा तो दोनों वहां से जंगल के भीतर चले गए। वन पालक जगदीश ने बताया कि कक्कड़ का बच्चा 15 दिन पहले मिला था। उसे उसकी मां से मिलाकर जंगल में छोड़ दिया गया है।
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