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बारिश और ओलों से सेब की पचास फीसदी फसल तबाह
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चंबा। जिले के बागवानों की बारिश और ओलावृष्टि से 50 फीसदी सेब की फसल तबाह हो गई है। वैश्विक महामारी कोरोना के साथ बागवानों पर अब मौसम ने कहर बरपाया है। इस दोहरी मार से किसानों-बागवानों की कमर टूट गई है। ऐसे में अब बागवानों को अपने परिवारों के भरण पोषण की चिंता सताने लगी है। वहीं, बागवानी विभाग ने मई और जून माह में बागवानों को पांच करोड़ 70 लाख के नुकसान की रिपोर्ट बनाई है। मौसम के बदले तेवरों ने बागवानों की चिंता को बढ़ा दिया है।
गौरतलब है कि जिले के 480 प्रगतिशील बागवानों के अलावा कई छोटे बागवान भी फलों को उगाकर मंडियों में उचित दाम पर बेच कर अपने परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। बावजूद इसके इस बार कोरोना के साथ मौसम की मार पड़ने से बागवानों को तगड़ा झटका लगा है। मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि से तीसा और सलूणी के क्षेत्रों में सेब की अधिक फसल तबाह हुई है। वहीं, अन्य क्षेत्रों में भी बागवानों के सेब फसल के बंपर फसल होने के सपने तोड़ दिए हैं।
अच्छे मुनाफे की उम्मीद पर फिरा पानी
बागवानों राकेश कुमार, अमर चंद, दिलीप कुमार, कन्हैया राम आदि ने कहा कि बीते वर्ष भी सेब की फसल अच्छी न होने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे में इस वर्ष सेब की पैदावार से उन्हें अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी लेकिन, बारिश और ओलावृष्टि उनके लिए परेशानियां लेकर आई। बगीचों में सेब की फसल पेड़ों से ही झड़ गई। इससे उन्हें अच्छा-खासा घाटा उठाना पड़ा। ओलावृष्टि से ए और बी ग्रेडिंग के सेब पर दाग पड़ने से अब सेब सी और डी ग्रेड में भी बिकना नामुमकिन लग रहा है।
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जिले के बागवान सेब की फसल को एपीएमसी की मंडियों बालू सहित चंडीगढ़, पठानकोट और दिल्ली तक बेचने के लिए ले जाते हैं। इसके अलावा मंडियों के दाम ऑनलाइन होने की सूरत में बागवान कई दूसरी जगह भी अपना सेब लेकर पहुंचते हैं।
मौके पर बनाई जा रही नुकसान की रिपोर्ट
कबायली क्षेत्र भरमौर के उलांसा में ओलावृष्टि और मूसलाधार बारिश से सेब की फसल को काफी नुकसान हुआ है। बताया जा रहा है कि भारी ओलावृष्टि के कारण सेब फट तक गया है। बागवानी विभाग के कर्मचारी उलांसा में बागवानों को हुए नुकसान को लेकर मौके पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
बागवानी विभाग के उपनिदेशक सुशील अवस्थी ने कहा कि मई-जून माह में हुई मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि से जिले के बागवानों को काफी नुकसान हुआ है। विभाग ने बागवानों को दो माह में अब तक पांच करोड़ 70 लाख के नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की है।
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गौरतलब है कि जिले के 480 प्रगतिशील बागवानों के अलावा कई छोटे बागवान भी फलों को उगाकर मंडियों में उचित दाम पर बेच कर अपने परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। बावजूद इसके इस बार कोरोना के साथ मौसम की मार पड़ने से बागवानों को तगड़ा झटका लगा है। मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि से तीसा और सलूणी के क्षेत्रों में सेब की अधिक फसल तबाह हुई है। वहीं, अन्य क्षेत्रों में भी बागवानों के सेब फसल के बंपर फसल होने के सपने तोड़ दिए हैं।
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अच्छे मुनाफे की उम्मीद पर फिरा पानी
बागवानों राकेश कुमार, अमर चंद, दिलीप कुमार, कन्हैया राम आदि ने कहा कि बीते वर्ष भी सेब की फसल अच्छी न होने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे में इस वर्ष सेब की पैदावार से उन्हें अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी लेकिन, बारिश और ओलावृष्टि उनके लिए परेशानियां लेकर आई। बगीचों में सेब की फसल पेड़ों से ही झड़ गई। इससे उन्हें अच्छा-खासा घाटा उठाना पड़ा। ओलावृष्टि से ए और बी ग्रेडिंग के सेब पर दाग पड़ने से अब सेब सी और डी ग्रेड में भी बिकना नामुमकिन लग रहा है।
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जिले के बागवान सेब की फसल को एपीएमसी की मंडियों बालू सहित चंडीगढ़, पठानकोट और दिल्ली तक बेचने के लिए ले जाते हैं। इसके अलावा मंडियों के दाम ऑनलाइन होने की सूरत में बागवान कई दूसरी जगह भी अपना सेब लेकर पहुंचते हैं।
मौके पर बनाई जा रही नुकसान की रिपोर्ट
कबायली क्षेत्र भरमौर के उलांसा में ओलावृष्टि और मूसलाधार बारिश से सेब की फसल को काफी नुकसान हुआ है। बताया जा रहा है कि भारी ओलावृष्टि के कारण सेब फट तक गया है। बागवानी विभाग के कर्मचारी उलांसा में बागवानों को हुए नुकसान को लेकर मौके पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
बागवानी विभाग के उपनिदेशक सुशील अवस्थी ने कहा कि मई-जून माह में हुई मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि से जिले के बागवानों को काफी नुकसान हुआ है। विभाग ने बागवानों को दो माह में अब तक पांच करोड़ 70 लाख के नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की है।