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Chamba News: बेमौसमी सब्जियां उगाकर स्वावलंबी बने सलूणी के किसान

Sat, 21 Oct 2023 11:10 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Sat, 21 Oct 2023 11:10 PM IST
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Farmers of Saloni became self-reliant by growing off-season vegetables
चंबा। बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन में अग्रणी सलूणी उपमंडल के किसानों के लिए विभाग की सिंचाई योजनाएं वरदान साबित हुई हैं। इन योजनाओं का लाभ उठाकर उपमंडल के किसान करोड़ों की सब्जी मंडियों में भेज रहे हैं।
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किसान बेमौसमी सब्जियों की पैदावार करने के बाद आर्थिक तौर पर स्वावलंबी बनकर उभरे हैं। जिला चंबा का भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 692 हजार हेक्टेयर है। इसमें केवल 41.80 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती की जाती है। मक्की, धान और गेहूं प्रमुख फसलें हैं। लगभग 2200 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जी का उत्पादन किया जाता है। विकास खंड सलूणी, तीसा और पांगी में अधिकतर बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन होता है। मटर, टमाटर और फ्रासबीन बेमौसमी और मुख्य नगदी फसलें हैं।
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बेमौसमी सब्जियों में जिला चंबा से लगभग 32 हजार क्विंटल मटर, 75 सौ क्विंटल फ्रांसबीन, 44 सौ क्विंटल टमाटर, 34 सौ क्विंटल फूल गोभी और बंद गोभी का विपणन प्रदेश के दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों के लिए किया जाता है। सलूणी और तीसा विकास खंड में केवल 3-5 फीसदी कृषि योग्य भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के कारण रबी के मौसम में सब्जियों की खेती में अनिश्चितता होने से पैदावार कम होने से किसान खेतीबाड़ी में दिलचस्पी नहीं ले रहे थे। किसानों की इन समस्याओं के मद्देनजर विभाग ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से शत-प्रतिशत अनुदान पर दूरदराज नालों से पानी को खेतों तक पहुंचाया।
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कृषि विभाग चंबा के उपनिदेशक डाॅ. कुलदीप धीमान ने बताया कि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया। इसका किसानों को भरपूर लाभ हुआ। फव्वारा सिंचाई प्रणाली स्थापित करने के बाद पानी की बचत होती है। इसलिए कम पानी से अधिक क्षेत्रफल में सिंचाई की जा सकती है। दूसरा सिंचाई करने में समय की बचत होती है और सही मात्रा में पौधों को पानी मिलने से पैदावार में बढ़ोतरी होती है।
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