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Chamba News: आधुनिक मशीनों से नहीं हो रहा आंखों का इलाज
Fri, 27 Jan 2023 10:45 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 27 Jan 2023 10:45 PM IST
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चंबा मेडिकल कॉलेज में नहीं सुविधा
मोतियाबिंद के इलाज के लिए शिमला और टांडा की लगानी पड़ रही दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में जहां आधुनिक मशीनों से मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जा रहे हैं तो वहीं चार साल पहले खुले मेडिकल कॉलेज चंबा में आज भी पुरानी मशीन से ही मरीजों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। नेत्र विभाग में नई मशीनें खरीदने के लिए पिछले तीन सालों से टेंडर की प्रक्रिया करवाई जा रही है लेकिन अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। यही कारण है कि चंबा से आंख के मरीजों को आधुनिक तकनीक से ऑपरेशन और इलाज करवाने के लिए टांडा या शिमला की दौड़ लगानी पड़ रही है। हमीरपुर, नाहन और मंडी मेडिकल कॉलेज चंबा मेडिकल कॉलेज के बाद खुले हैं। इनमें मौजूदा समय में फेको मशीन से मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। यह विधि मोतियाबिंद के ऑपरेशन करने की सबसे आधुनिक तकनीक है लेकिन चंबा मेडिकल कॉलेज में अभी तक यह तकनीक शुरू ही नहीं हो पाई है। चार साल पहले जिला अस्पताल में आंखों के इलाज के लिए जो मशीन उपलब्ध थी, उसी से आज भी मरीजों का इलाज किया जा रहा है। नेत्र रोग विभाग के विशेषज्ञ प्रबंधन से कई बार आधुनिक मशीनों को उपलब्ध करवाने की मांग कर चुके हैं लेकिन हर बार यही तर्क दिया जाता है कि मशीनों को उपलब्ध करवाने के लिए होने वाले टेंडर की औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। इन औपचारिकताओं के पूर्ण नहीं होने का खामियाजा जिले के सैकड़ों मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
हालात यह हैं कि आंख के रेटिना में चल रही दिक्कत की जांच करवाने के लिए चंबा से मरीजों को टांडा या शिमला भेजा जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज चंबा में हर साल 100 से 200 मरीज आंखों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन करवाने के लिए पहुंचते हैं। इनमें कई मरीजों को आधुनिक मशीनों की कमी होने के कारण टांडा या शिमला रेफर किया जाता है।
नेत्र विभाग में आधुनिक मशीनों को उपलब्ध करवाने के लिए प्रबंधन हरसंभव प्रयास कर रहा है। टेंडर की औपचारिकता पूरी नहीं होने के कारण मशीनें उपलब्ध करवाने में देरी हुई है। जल्द सभी औपचारिकताएं पूर्ण करके आधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाई जाएंगी। - डॉ. पंकज गुप्ता, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज चंबा।
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मोतियाबिंद के इलाज के लिए शिमला और टांडा की लगानी पड़ रही दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में जहां आधुनिक मशीनों से मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जा रहे हैं तो वहीं चार साल पहले खुले मेडिकल कॉलेज चंबा में आज भी पुरानी मशीन से ही मरीजों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। नेत्र विभाग में नई मशीनें खरीदने के लिए पिछले तीन सालों से टेंडर की प्रक्रिया करवाई जा रही है लेकिन अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। यही कारण है कि चंबा से आंख के मरीजों को आधुनिक तकनीक से ऑपरेशन और इलाज करवाने के लिए टांडा या शिमला की दौड़ लगानी पड़ रही है। हमीरपुर, नाहन और मंडी मेडिकल कॉलेज चंबा मेडिकल कॉलेज के बाद खुले हैं। इनमें मौजूदा समय में फेको मशीन से मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। यह विधि मोतियाबिंद के ऑपरेशन करने की सबसे आधुनिक तकनीक है लेकिन चंबा मेडिकल कॉलेज में अभी तक यह तकनीक शुरू ही नहीं हो पाई है। चार साल पहले जिला अस्पताल में आंखों के इलाज के लिए जो मशीन उपलब्ध थी, उसी से आज भी मरीजों का इलाज किया जा रहा है। नेत्र रोग विभाग के विशेषज्ञ प्रबंधन से कई बार आधुनिक मशीनों को उपलब्ध करवाने की मांग कर चुके हैं लेकिन हर बार यही तर्क दिया जाता है कि मशीनों को उपलब्ध करवाने के लिए होने वाले टेंडर की औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। इन औपचारिकताओं के पूर्ण नहीं होने का खामियाजा जिले के सैकड़ों मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
हालात यह हैं कि आंख के रेटिना में चल रही दिक्कत की जांच करवाने के लिए चंबा से मरीजों को टांडा या शिमला भेजा जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज चंबा में हर साल 100 से 200 मरीज आंखों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन करवाने के लिए पहुंचते हैं। इनमें कई मरीजों को आधुनिक मशीनों की कमी होने के कारण टांडा या शिमला रेफर किया जाता है।
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नेत्र विभाग में आधुनिक मशीनों को उपलब्ध करवाने के लिए प्रबंधन हरसंभव प्रयास कर रहा है। टेंडर की औपचारिकता पूरी नहीं होने के कारण मशीनें उपलब्ध करवाने में देरी हुई है। जल्द सभी औपचारिकताएं पूर्ण करके आधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाई जाएंगी। - डॉ. पंकज गुप्ता, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज चंबा।
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