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Chamba News: घर में हुए नुआले में नहीं मिली माला, अब सबको दे रहीं तोहफा
Mon, 27 Oct 2025 10:55 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 27 Oct 2025 10:55 PM IST
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दर्शना देवी।
भरमौर (चंबा)। कभी अपने घर नुआले में भगवान भोलेनाथ के लिए माला न बन पाने का अफसोस, आज दर्शना देवी की पहचान बन चुका है। भरमौर की यह महिला अब जिले में भगवान शंकर के हर नुआले में निशुल्क माला बनाकर समर्पण और सेवा की मिसाल कायम कर रही हैं।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भरमौर में सेवादार के रूप में कार्यरत दर्शना देवी पिछले कई वर्षों से शिव नुआलों के लिए माला तैयार कर रही हैं। उनका कहना है कि यह माला शिव का विग्रह रूप मानी जाती है, जिसे भक्त पूरी रात पूजते हैं और सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
दर्शना देवी बताती हैं कि सालभर में वह करीब 100 से अधिक माला तैयार करती हैं। एक समय ऐसा भी था जब उनके अपने शिव नुआले के लिए कोई माला बनाने को तैयार नहीं था। उसी दिन उन्होंने निश्चय किया कि वह जीवनभर हर शिव नुआले के लिए निशुल्क माला बनाकर दान करेंगी।
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उन्होंने कहा कि लोग अकसर उन्हें इस सेवा के बदले पैसे या शगुन के रूप में वस्त्र आदि देना चाहते हैं, लेकिन वह किसी तरह का पारिश्रमिक स्वीकार नहीं करतीं। उनका मानना है कि यह सेवा नहीं बल्कि श्रद्धा और भक्ति का मार्ग है।
चौरासी परिसर में होने वाले अधिकतर शिव नुआलों में आज दर्शना देवी के हाथों से बनी माला ही भगवान शंकर को अर्पित की जाती है। उनकी यह परंपरा अब स्थानीय आस्था और निष्ठा का प्रतीक बन चुकी है।
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भरमौर में सेवादार के रूप में कार्यरत दर्शना देवी पिछले कई वर्षों से शिव नुआलों के लिए माला तैयार कर रही हैं। उनका कहना है कि यह माला शिव का विग्रह रूप मानी जाती है, जिसे भक्त पूरी रात पूजते हैं और सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
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दर्शना देवी बताती हैं कि सालभर में वह करीब 100 से अधिक माला तैयार करती हैं। एक समय ऐसा भी था जब उनके अपने शिव नुआले के लिए कोई माला बनाने को तैयार नहीं था। उसी दिन उन्होंने निश्चय किया कि वह जीवनभर हर शिव नुआले के लिए निशुल्क माला बनाकर दान करेंगी।
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उन्होंने कहा कि लोग अकसर उन्हें इस सेवा के बदले पैसे या शगुन के रूप में वस्त्र आदि देना चाहते हैं, लेकिन वह किसी तरह का पारिश्रमिक स्वीकार नहीं करतीं। उनका मानना है कि यह सेवा नहीं बल्कि श्रद्धा और भक्ति का मार्ग है।
चौरासी परिसर में होने वाले अधिकतर शिव नुआलों में आज दर्शना देवी के हाथों से बनी माला ही भगवान शंकर को अर्पित की जाती है। उनकी यह परंपरा अब स्थानीय आस्था और निष्ठा का प्रतीक बन चुकी है।