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Chamba News: मणिमहेश में भीड़ छंटी, सुरक्षा का घेरा बढ़ा
Fri, 18 Sep 2026 10:54 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 18 Sep 2026 10:54 PM IST
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6.5 लाख से करीब एक लाख पर पहुंचा श्रद्धालुओं का आंकड़ा
आपदा के बाद यात्रा में पहली बार किए गए इतने सख्त प्रबंध
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। वर्ष 2024 में करीब 6.5 लाख श्रद्धालुओं से गुलजार रही मणिमहेश यात्रा में इस बार श्रद्धालुओं की आमद काफी कम रही। वर्ष 2026 में राधाष्टमी तक करीब एक लाख श्रद्धालु ही पवित्र डल में आस्था की डुबकी लगा पाए हैं।
अंतिम प्रशासनिक आंकड़ा अभी जारी होना बाकी है। वर्ष 2025 की प्राकृतिक आपदा के बाद इस बार यात्रा दोबारा शुरू हुई, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कम रही। नेपाल में हुई त्रासदी को भी श्रद्धालुओं की कम आमद की वजहों में शामिल किया जा रहा है।
वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना महामारी के कारण यात्रा प्रभावित रही थी। वर्ष 2022 और 2023 में तीन लाख से अधिक श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचे। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 6.5 लाख हो गया। वर्ष 2025 में प्राकृतिक आपदा के चलते यात्रा स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद 2026 में यात्रा शुरू हुई, लेकिन श्रद्धालुओं की आमद में बड़ा अंतर देखने को मिला।
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इस बार श्रद्धालुओं की संख्या कम होने के बावजूद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक सख्त किया। पहली बार प्रतिदिन अधिकतम पांच हजार श्रद्धालुओं का ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य किया गया। हड़सर में मेडिकल फिटनेस जांच की व्यवस्था की गई। पहली बार 40 से अधिक आईटीबीपी जवानों की तैनाती की गई, जबकि करीब एक हजार पुलिस और होमगार्ड जवानों को यात्रा व्यवस्था में लगाया गया।
खतरनाक कुगती परिक्रमा मार्ग पर आवाजाही प्रतिबंधित रखी गई। यात्रा मार्ग को विभिन्न सेक्टरों में बांटकर सेक्टर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल तैनात किए गए। प्रमुख स्थानों पर पुलिस नाके स्थापित किए गए। खराब मौसम की स्थिति में यात्रा तत्काल रोकने की व्यवस्था की गई। आधिकारिक पोर्टल पर मौसम पूर्वानुमान की सुविधा उपलब्ध करवाई गई। बाहरी वाहनों से ग्रीन टैक्स लिया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धन्छौ में बीएसएनएल टावर भी स्थापित किया गया है।
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26 दिन में तीन बार ही पूरा हुआ पांच हजार का स्लॉट
जन्माष्टमी और राधाष्टमी के शाही स्नान को छोड़कर प्रतिदिन पांच हजार श्रद्धालुओं का स्लॉट निर्धारित किया गया था। 26 दिन की यात्रा अवधि में यह सीमा महज तीन बार ही पूरी हो सकी। अधिकांश दिनों में निर्धारित क्षमता के मुकाबले कम श्रद्धालु पहुंचे।
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सुरक्षा के नए पहरे
हड़सर में मेडिकल फिटनेस जांच
पांच हजार श्रद्धालुओं का अनिवार्य ऑनलाइन पंजीकरण
धन्छौ में बीएसएनएल टावर
पहली बार 40 से अधिक आईटीबीपी जवानों की तैनाती
करीब एक हजार पुलिस और होमगार्ड जवान मुस्तैद
खराब मौसम में यात्रा रोकने की तत्काल व्यवस्था
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आपदा के बाद यात्रा में पहली बार किए गए इतने सख्त प्रबंध
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। वर्ष 2024 में करीब 6.5 लाख श्रद्धालुओं से गुलजार रही मणिमहेश यात्रा में इस बार श्रद्धालुओं की आमद काफी कम रही। वर्ष 2026 में राधाष्टमी तक करीब एक लाख श्रद्धालु ही पवित्र डल में आस्था की डुबकी लगा पाए हैं।
अंतिम प्रशासनिक आंकड़ा अभी जारी होना बाकी है। वर्ष 2025 की प्राकृतिक आपदा के बाद इस बार यात्रा दोबारा शुरू हुई, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कम रही। नेपाल में हुई त्रासदी को भी श्रद्धालुओं की कम आमद की वजहों में शामिल किया जा रहा है।
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वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना महामारी के कारण यात्रा प्रभावित रही थी। वर्ष 2022 और 2023 में तीन लाख से अधिक श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचे। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 6.5 लाख हो गया। वर्ष 2025 में प्राकृतिक आपदा के चलते यात्रा स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद 2026 में यात्रा शुरू हुई, लेकिन श्रद्धालुओं की आमद में बड़ा अंतर देखने को मिला।
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इस बार श्रद्धालुओं की संख्या कम होने के बावजूद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक सख्त किया। पहली बार प्रतिदिन अधिकतम पांच हजार श्रद्धालुओं का ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य किया गया। हड़सर में मेडिकल फिटनेस जांच की व्यवस्था की गई। पहली बार 40 से अधिक आईटीबीपी जवानों की तैनाती की गई, जबकि करीब एक हजार पुलिस और होमगार्ड जवानों को यात्रा व्यवस्था में लगाया गया।
खतरनाक कुगती परिक्रमा मार्ग पर आवाजाही प्रतिबंधित रखी गई। यात्रा मार्ग को विभिन्न सेक्टरों में बांटकर सेक्टर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल तैनात किए गए। प्रमुख स्थानों पर पुलिस नाके स्थापित किए गए। खराब मौसम की स्थिति में यात्रा तत्काल रोकने की व्यवस्था की गई। आधिकारिक पोर्टल पर मौसम पूर्वानुमान की सुविधा उपलब्ध करवाई गई। बाहरी वाहनों से ग्रीन टैक्स लिया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धन्छौ में बीएसएनएल टावर भी स्थापित किया गया है।
26 दिन में तीन बार ही पूरा हुआ पांच हजार का स्लॉट
जन्माष्टमी और राधाष्टमी के शाही स्नान को छोड़कर प्रतिदिन पांच हजार श्रद्धालुओं का स्लॉट निर्धारित किया गया था। 26 दिन की यात्रा अवधि में यह सीमा महज तीन बार ही पूरी हो सकी। अधिकांश दिनों में निर्धारित क्षमता के मुकाबले कम श्रद्धालु पहुंचे।
सुरक्षा के नए पहरे
हड़सर में मेडिकल फिटनेस जांच
पांच हजार श्रद्धालुओं का अनिवार्य ऑनलाइन पंजीकरण
धन्छौ में बीएसएनएल टावर
पहली बार 40 से अधिक आईटीबीपी जवानों की तैनाती
करीब एक हजार पुलिस और होमगार्ड जवान मुस्तैद
खराब मौसम में यात्रा रोकने की तत्काल व्यवस्था