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चंबा में गरीबों के हक पर डाका डाल रहे फर्जी गरीब
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंबा
Updated Tue, 01 Dec 2015 06:36 PM IST
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जनजातीय क्षेत्र भरमौर में एसडीएम की चतुराई से 257 फर्जी गरीब भले ही सामने आ गए हों, लेकिन हर जगह हालात ऐसे नहीं हैं। जिला के अन्य उपमंडलों में 62 हजार से ज्यादा परिवारों के पास गरीब होने का प्रमाणपत्र है। इनमें से कुछ परिवार साधन संपन्न होने के बावजूद गरीबी रेखा से बाहर नहीं हुए। इनमें से कई तो पंचायत नुमाइंदों के रिश्तेदार हैं और कुछ सरकारी नौकरी समेत गाड़ियों के मालिक भी।
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पंचायत चुनाव से ठीक पहले गरीबी का निर्धारण चंबा में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। भरमौर में एसडीएम जितेंद्र कंवर की पहल से 257 ऐसे फर्जी परिवारों का खुलासा हुआ है जो गलत तरीके से सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे। जिला में इस समय 62 हजार 369 आईआरडीपी व अंत्योदय परिवार हैं जिन्हें केंद्र व राज्य सरकार के माध्यम से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
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हालांकि इन लोगों का पंजीकरण एक साल के लिए हुआ था और एक साल के बाद दोबारा इनकी जांच करके पंचायतों को रिपोर्ट देनी थी। इसमें परिवार की आय का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य था, लेकिन इसके बावजूद कई पंचायतों में फर्जी तरीके से योजनाओं का लाभ उठा रहे लोगों को बाहर नहीं किया गया। खाद्य आपूर्ति विभाग ने पंचायतों को भी फर्जी गरीबों को शरण देने पर दोषी ठहराने की बात कही है और भविष्य में कार्रवाई की चेतावनी दी है लेकिन भरमौर के अलावा जिला के दूसरे किसी भी उपमंडल में असली गरीबों की पड़ताल के लिए कोई मुहिम चलाने का प्लान फिलहाल नहीं बना है।
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पंचायत से आती है सूची : खाद्य आपूर्ति विभाग
खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी मोहन सिंह का कहना है कि जिला में गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों के पंजीकरण का सीधा जिम्मा पंचायतों का है। उनका विभाग राशन की सप्लाई करता है और उन्हें रिपोर्ट पंचायतें उपलब्ध करवाती हैं। वे रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हैं उन्हें नहीं पता होता कि राशन लेने वाला गरीब है या अमीर।
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कैसे तय होती है गरीबी रेखा
1. गरीबी रेखा से नीचे पंजीकरण के लिए सालाना आय 30 हजार से अधिक नहीं होनी चाहिए।
2. गरीब परिवार के पास दो मंजिला पक्का मकान न हो
3. असिंचित भूमि साढ़े 2 हेक्टेयर और सिंचित भूमि साढ़े 12 बीघा से अधिक न हो
4. किसी तरह का टैक्स या सेल टैक्स न देता हो
5. दोपहिया या चारपहिया गाड़ी नहीं होनी चाहिए
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सूची से कभी भी बाहर किए जा सकते हैं गरीब
गरीबी रेखा के लिए निर्धारित सूची से किसी को कभी भी बाहर किया जा सकता है। जबकि इस सूची में शामिल करने के लिए ग्रामसभा में प्रस्ताव पास होना जरूरी है। ग्रामसभा में लोग तय करते हैं कि किस व्यक्ति को गरीबी की रेखा में रखा जा सकता है।