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Chamba News: मेडिकल कालेज में दो साल से कैंसर का इलाज बंद
Sat, 22 Jul 2023 11:09 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 22 Jul 2023 11:09 PM IST
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चंबा। जिले के 5,000 कैंसर रोगियों का इलाज दो सालों से राम भरोसे चल रहा है क्योंकि मेडिकल काॅलेज की कैंसर ओपीडी पर ताला लटका हुआ है। इसे देख कैंसर के मरीज निराश होकर लौट रहे हैं। इन मरीजों को इलाज करवाने के लिए टांडा और आईजीएमसी शिमला की दौड़ लगानी पड़ रही है। चंबा मेडिकल कॉलेज में तैनात तीन कैंसर रोग विशेषज्ञ नौकरी छोड़ कर यहां से दूसरी जगह जा चुके हैं। उनके जाने के बाद सरकार ने यहां अतिरिक्त विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की है।
हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कई बार सरकार से यहां कैंसर रोग विशेषज्ञ तैनात करने की मांग कर चुका है। चंबा में कैंसर ओपीडी खुलने से मरीजों को अपने इलाज को लेकर सुविधा मिल रही थी लेकिन अब उन्हें जिले से बाहर का रुख करना पड़ रहा है। गरीब मरीज जिले के बाहर जाने में असमर्थ होने के कारण मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ आने का इंतजार कर रहे हैं जबकि कई मरीज इलाज के लिए दूसरे राज्यों में भटक रहे हैं। हालांकि पहले मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग में तीन विशेषज्ञ तैनात थे। इनमें से एक विशेषज्ञ ने एक वर्ष पहले नौकरी छोड़ने के लिए प्रबंधन को रिजाइन दे दिया था, जबकि एक महिला विशेषज्ञ मेटरनिटी लीव पर चली गईं जो अभी तक नहीं लौटीं। तीसरे विशेषज्ञ का कैंसर में सुपर स्पेशिलिटी कोर्स के लिए चयन हुआ है इसलिए वे भी चंबा से जा चुके हैं। अब आलम यह है कि मेडिकल कॉलेज की कैंसर ओपीडी में सेवाएं देने के लिए कोई विशेषज्ञ नहीं है। वहीं कीमोथैरेपी सुविधा भी बंद हो चुकी है। जिले में 5,000 कैंसर रोगियों में महिलाओं के मुकाबले पुरुष मरीजों की संख्या आठ प्रतिशत अधिक है। ये रोगी मुंह, गले सहित अन्य कैंसर रोगों से पीड़ित हैं।
मेडिकल काॅलेज के मीडिया समन्वयक डॉक्टर पंकज गुप्ता ने बताया कि सरकार को इसके बारे में अवगत करवाया जा चुका है। चंबा में जल्द कैंसर विशेषज्ञ की तैनाती हो सकती है।
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हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कई बार सरकार से यहां कैंसर रोग विशेषज्ञ तैनात करने की मांग कर चुका है। चंबा में कैंसर ओपीडी खुलने से मरीजों को अपने इलाज को लेकर सुविधा मिल रही थी लेकिन अब उन्हें जिले से बाहर का रुख करना पड़ रहा है। गरीब मरीज जिले के बाहर जाने में असमर्थ होने के कारण मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ आने का इंतजार कर रहे हैं जबकि कई मरीज इलाज के लिए दूसरे राज्यों में भटक रहे हैं। हालांकि पहले मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग में तीन विशेषज्ञ तैनात थे। इनमें से एक विशेषज्ञ ने एक वर्ष पहले नौकरी छोड़ने के लिए प्रबंधन को रिजाइन दे दिया था, जबकि एक महिला विशेषज्ञ मेटरनिटी लीव पर चली गईं जो अभी तक नहीं लौटीं। तीसरे विशेषज्ञ का कैंसर में सुपर स्पेशिलिटी कोर्स के लिए चयन हुआ है इसलिए वे भी चंबा से जा चुके हैं। अब आलम यह है कि मेडिकल कॉलेज की कैंसर ओपीडी में सेवाएं देने के लिए कोई विशेषज्ञ नहीं है। वहीं कीमोथैरेपी सुविधा भी बंद हो चुकी है। जिले में 5,000 कैंसर रोगियों में महिलाओं के मुकाबले पुरुष मरीजों की संख्या आठ प्रतिशत अधिक है। ये रोगी मुंह, गले सहित अन्य कैंसर रोगों से पीड़ित हैं।
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मेडिकल काॅलेज के मीडिया समन्वयक डॉक्टर पंकज गुप्ता ने बताया कि सरकार को इसके बारे में अवगत करवाया जा चुका है। चंबा में जल्द कैंसर विशेषज्ञ की तैनाती हो सकती है।
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