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केंद्र सरकार द्वारा रद्द किए श्रम कानूनों के विरोध में गरजे बीएमएस के पदाधिकारी
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चंबा। केंद्र सरकार के रद्द किए गए श्रम कानूनों को दोबारा लागू करवाने को लेकर बुधवार को भारतीय मजदूर संघ ने जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया। इसमें भारतीय मजदूर संघ के अलावा आशा वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता यूनियन के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने उपायुक्त कार्यालय के बाहर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के बाद भारतीय मजदूर संघ ने एक मांगपत्र उपायुक्त के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा। ज्ञापन के जरिये प्रधानमंत्री को अवगत करवाया गया कि रद्द किए गए श्रम कानूनों से ठेकेदारों को लाभ मिला है।
जबकि आउटसोर्स प्रणाली के तहत कार्य करने वाले कर्मचारियों का शोषण हुआ है। इसलिए रद्द किए गए श्रम कानूनों को दोबारा से लागू किया जाए। अन्यथा भारतीय मजदूर संघ देश भर में आंदोलन शुरू करेगा। इसका खामियाजा केंद्र और प्रदेश की सरकारों को भुगतना पड़ सकता है।
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भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष रमेश सिंह राणा ने कहा कि श्रम कानूनों के रद्द होने से उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों को नुकसान होगा। जबकि उद्योगपतियों को इससे लाभ मिलेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मिडडे मील वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। इसके साथ ही कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन प्रदान किया जाए।
इस मौके पर बीएमएस की प्रदेश उपाध्यक्ष जयंती दुग्गल, जिला संगठन सचिव पवन राणा, उपाध्यक्ष जगदीश चंद्र, सदस्य दलीप सिंह, बबीता देवी, अनूपा देवी, सपना, उषा, पूजा, प्रीतो, पुष्पा, भोली देवी और कमलेश कुमारी सहित अन्य मौजूद रहे।
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प्रदर्शन के बाद भारतीय मजदूर संघ ने एक मांगपत्र उपायुक्त के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा। ज्ञापन के जरिये प्रधानमंत्री को अवगत करवाया गया कि रद्द किए गए श्रम कानूनों से ठेकेदारों को लाभ मिला है।
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जबकि आउटसोर्स प्रणाली के तहत कार्य करने वाले कर्मचारियों का शोषण हुआ है। इसलिए रद्द किए गए श्रम कानूनों को दोबारा से लागू किया जाए। अन्यथा भारतीय मजदूर संघ देश भर में आंदोलन शुरू करेगा। इसका खामियाजा केंद्र और प्रदेश की सरकारों को भुगतना पड़ सकता है।
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भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष रमेश सिंह राणा ने कहा कि श्रम कानूनों के रद्द होने से उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों को नुकसान होगा। जबकि उद्योगपतियों को इससे लाभ मिलेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मिडडे मील वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। इसके साथ ही कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन प्रदान किया जाए।
इस मौके पर बीएमएस की प्रदेश उपाध्यक्ष जयंती दुग्गल, जिला संगठन सचिव पवन राणा, उपाध्यक्ष जगदीश चंद्र, सदस्य दलीप सिंह, बबीता देवी, अनूपा देवी, सपना, उषा, पूजा, प्रीतो, पुष्पा, भोली देवी और कमलेश कुमारी सहित अन्य मौजूद रहे।