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Chamba News: आशा 35 साल से संजो रहीं चंबा रुमाल की कला

Fri, 21 Nov 2025 10:37 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Fri, 21 Nov 2025 10:37 PM IST
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Asha has been preserving the art of Chamba handkerchief for 35 years.
चंबा। जिले की सांस्कृतिक धरोहर चंबा रुमाल को नई पहचान देने में कसाकड़ा निवासी अनुभवी शिल्पकार आशा राठौर का योगदान अतुलनीय है। 35 वर्षों से वह इस विरासत को न केवल संजोए हुए हैं बल्कि इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
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आशा राठौर ने चंबा सहित दिल्ली, हरियाणा, मंडी और शिमला में जाकर महिलाओं और युवतियों को इस पारंपरिक दोहरी कढ़ाई की बारीकियां सिखाईं। उनकी दी हुई तालीम से अब तक 200 से अधिक महिलाएं और युवतियां न केवल इस कला में दक्ष हुई हैं बल्कि कई इसके माध्यम से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
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अपनी कला से गहरे लगाव को व्यक्त करते हुए वे कहती हैं कि चंबा रुमाल हमारी परंपरा है, इसे विलुप्त नहीं होने देंगे। मेरी इच्छा है कि हर घर की नई पीढ़ी इस कला को सीखे और आगे बढ़ाए।
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आज आशा राठौर का समर्पण कई महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। वह आगे भी नियमित प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर इस अनूठी, समृद्ध और अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने को प्रतिबद्ध हैं।
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