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स्कूल के छह कमरों के निर्माण में लग गए 15 साल, कार्य अभी भी अधूरा
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अमर उजाला ब्यूरो
सलूणी (चंबा)। राजकीय उच्च पाठशाला सरार के छह कमरों को बनाने में 15 साल का लंबा समय बीत चुका है। मगर आज तक इस स्कूल भवन का कार्य अधूरा ही है। हैरानी इस बात की है कि इतने सालों में न ही प्रशासन और न ही सरकार ने इस मामले को लेकर कोई दिलचस्पी दिखाई। इस वजह से क्षेत्र के नौनिहालों को आज भी पढ़ाई करने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिल सका है। स्कूल की छत का निर्माण अभी तक अधूरा है। इसके चलते स्कूल स्टाफ समेत विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों की मानें तो वर्ष 2003 में डलहौजी विस क्षेत्र की विधायक आशा कुमारी ने स्कूल भवन के छह कमरों की आधारशिला रखी थी। मगर यह कार्य 15 सालों के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। अभिभावकों की मानें तो स्कूल की छत न होने से इस साल करीब 70 विद्यार्थियों ने तेलका और टिकरू स्कूल के लिए पलायन कर लिया है। इस बात को लेकर ग्रामीणों में काफी रोष है। अभिभावक कुलदीप कुमार, मनोहर लाल, अश्वनी कुमार, राजमल, अशोक कुमार, निधिया राम, तिलक राज और प्रहलाद ने बताया कि इस मांग को लेकर वह जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग सहित पीएमओ कार्यालय तक पत्राचार कर चुके है। मगर अभी तक कहीं से भी सकारात्मक पहल नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि अगर जल्द ही स्कूल के कमरों का कार्य पूरा नहीं हुआ तो अगले साल शेष स्कूल बच्चें भी पलायन कर लेंगे। भवन का निर्माण कार्य विकास खंड सलूणी स्थानीय पंचायत सियुला के माध्यम से करवा रहा है। मगर इस मामले में इतनी लेटलतीफी प्रशासन की कार्यप्रणाली को भी कटघेरे में खड़ी कर रही है। सरार स्कूल के मुख्याध्यापक राम करण ने बताया कि स्कूल भवन का कार्य लटका होने बारे उपायुक्त से आग्रह किया गया है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि जल्द ही स्कूल का निर्माण कार्य पूरा होगा।
इनसेट
बीडीओ सलूणी इंदुबाला का कहना है कि मामला उनके ध्यान में लाया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित जेई को मौके पर भेजा जाएगा। ताकि शेष कार्य को लेकर आगामी औपचारिकताएं पूरी की जा सके।
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इनसेट
पंचायत सचिव भुवनेश कुमार ने बताया कि लगभग साढ़े तीन लाख रुपये खर्च हो चुके है। शेष राशि ब्लॉक कार्यालय से नहीं मिली है। यह कार्य पंचायत करवा रही है।
इनसेट
सलूणी (चंबा)। राजकीय उच्च पाठशाला सरार के छह कमरों को बनाने में 15 साल का लंबा समय बीत चुका है। मगर आज तक इस स्कूल भवन का कार्य अधूरा ही है। हैरानी इस बात की है कि इतने सालों में न ही प्रशासन और न ही सरकार ने इस मामले को लेकर कोई दिलचस्पी दिखाई। इस वजह से क्षेत्र के नौनिहालों को आज भी पढ़ाई करने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिल सका है। स्कूल की छत का निर्माण अभी तक अधूरा है। इसके चलते स्कूल स्टाफ समेत विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों की मानें तो वर्ष 2003 में डलहौजी विस क्षेत्र की विधायक आशा कुमारी ने स्कूल भवन के छह कमरों की आधारशिला रखी थी। मगर यह कार्य 15 सालों के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। अभिभावकों की मानें तो स्कूल की छत न होने से इस साल करीब 70 विद्यार्थियों ने तेलका और टिकरू स्कूल के लिए पलायन कर लिया है। इस बात को लेकर ग्रामीणों में काफी रोष है। अभिभावक कुलदीप कुमार, मनोहर लाल, अश्वनी कुमार, राजमल, अशोक कुमार, निधिया राम, तिलक राज और प्रहलाद ने बताया कि इस मांग को लेकर वह जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग सहित पीएमओ कार्यालय तक पत्राचार कर चुके है। मगर अभी तक कहीं से भी सकारात्मक पहल नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि अगर जल्द ही स्कूल के कमरों का कार्य पूरा नहीं हुआ तो अगले साल शेष स्कूल बच्चें भी पलायन कर लेंगे। भवन का निर्माण कार्य विकास खंड सलूणी स्थानीय पंचायत सियुला के माध्यम से करवा रहा है। मगर इस मामले में इतनी लेटलतीफी प्रशासन की कार्यप्रणाली को भी कटघेरे में खड़ी कर रही है। सरार स्कूल के मुख्याध्यापक राम करण ने बताया कि स्कूल भवन का कार्य लटका होने बारे उपायुक्त से आग्रह किया गया है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि जल्द ही स्कूल का निर्माण कार्य पूरा होगा।
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बीडीओ सलूणी इंदुबाला का कहना है कि मामला उनके ध्यान में लाया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित जेई को मौके पर भेजा जाएगा। ताकि शेष कार्य को लेकर आगामी औपचारिकताएं पूरी की जा सके।
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पंचायत सचिव भुवनेश कुमार ने बताया कि लगभग साढ़े तीन लाख रुपये खर्च हो चुके है। शेष राशि ब्लॉक कार्यालय से नहीं मिली है। यह कार्य पंचायत करवा रही है।
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