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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Chalda Mahasu arrives in Himachal drawing a massive crowd of devotees crosses the Tons River

Himachal: हिमाचल पहुंचे चालदा महासू, उमड़ा आस्था का सैलाब, टौंस नदी पार कर पहली बार किया प्रदेश में प्रवेश

Sun, 14 Dec 2025 09:51 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, रोनहाट/शिलाई (सिरमौर)।
संवाद न्यूज एजेंसी, रोनहाट/शिलाई (सिरमौर)। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 14 Dec 2025 09:51 AM IST
सार

उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र से 70 किमी की पदयात्रा के बाद शाम करीब 6:30 बजे पहली बार देवता छत्रधारी महासू महाराज हिमाचल की धरती पर पधारे। उत्तराखंड से शुरू हुई यात्रा सिरमौर के दुर्गम शिलाई क्षेत्र के पश्मी में संपन्न होगी। यहां महासू मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए पश्मी और घासन गांव के लोगों ने मिलकर लगभग दो करोड़ रुपये का भव्य मंदिर बनाया है। 

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Chalda Mahasu arrives in Himachal drawing a massive crowd of devotees crosses the Tons River
देवता की पालकी। - फोटो : स्रोत : जागरूक पाठक

विस्तार

हिमाचल-उत्तराखंड की सीमा पर शनिवार को आस्था का सैलाब उमड़ा। उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र से 70 किमी की पदयात्रा के बाद शाम करीब 6:30 बजे पहली बार देवता छत्रधारी महासू महाराज हिमाचल की धरती पर पधारे। उद्योग मंत्री हर्षवधन सिंह चौहान, विधायक नाहन अजय सोलंकी सहित हजारों श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। उत्तराखंड से हिमाचल सीमा में प्रवेश करते हुए देवता को करीब एक घंटे का समय लगा। यहां दोनों राज्यों से हजारों की भीड़ उमड़ी। सीमा पर पैर रखने की जगह सड़क पर नहीं बची। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने चालदा महासू महाराज के प्रदेश में प्रवेश के अवसर पर श्रद्धालुओं से शांति एवं अनुशासन बनाए रखने की अपील की।

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चौहान ने बताया कि चालदा महासू 14 दिसंबर को पश्मी गांव में विधिवत रूप से विराजमान होंगे। पदयात्रा 8 दिसंबर 2025 को हजारों श्रद्धालुओं के साथ शुरू हुई थी। चालदा महासू महाराज की यह यात्रा न केवल धार्मिक आयोजन, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का उत्सव है।

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दो करोड़ से बने मंदिर में विराजमान होंगे देवता
उत्तराखंड से शुरू हुई यात्रा सिरमौर के दुर्गम शिलाई क्षेत्र के पश्मी में संपन्न होगी। यहां महासू मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए पश्मी और घासन गांव के लोगों ने मिलकर लगभग दो करोड़ रुपये का भव्य मंदिर बनाया है। पश्मी गांव के 45 परिवारों और घासन के 15 परिवारों ने इस धार्मिक परियोजना में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
 
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2020 में मिले थे संकेत
पश्मी गांव में महासू महाराज के आगमन की नींव पांच वर्ष पूर्व पड़ गई थी। वर्ष 2020 में जौनसार के दसऊ गांव से एक विशाल बकरा (घांडुवा) अचानक पश्मी में आकर ठहर गया। दो वर्षों तक ग्रामीण उसे एक साधारण पशु मानते रहे, लेकिन 2022 में देव वक्ता की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह वास्तव में देवता दूत है, एक संकेत जो देव प्रवास से पहले भेजा जाता है। हिमाचल की धरती पर चालदा महासू का यह पहला आगमन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दोनों प्रदेशों की सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने वाला अभूतपूर्व अवसर माना जा रहा है।
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