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Bilaspur News: जिला परिषद नतीजों से भाजपा मजबूत, कांग्रेस बेअसर

Mon, 01 Jun 2026 11:48 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 11:48 PM IST
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Zila Parishad results strengthen BJP, Congress neutral
बरमाणा में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, जांगला ने बढ़ाई संगठन की चिंता
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दलों को जमीनी संगठन, स्थानीय नेतृत्व और बागियों की भूमिका पर रखनी होगी नजर
विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों को आत्ममंथन की जरूरत

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला परिषद चुनाव के परिणामों के बाद राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा दो वार्डों सदर विधानसभा क्षेत्र के बरमाणा और झंडूता विधानसभा क्षेत्र के जांगला की हो रही है। दोनों वार्ड चुनाव प्रचार के दौरान भी सुर्खियों में रहे। परिणाम आने के बाद भी राजनीतिक विश्लेषण का केंद्र बने हुए हैं।
इस बार जिला परिषद चुनाव में भाजपा के बागियों ने कई सीटों पर मुकाबले को दिलचस्प बनाया। कहीं बागी उम्मीदवारों ने पार्टी समर्थित प्रत्याशियों को चुनौती दी तो कहीं उनकी मौजूदगी ने चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल दिए। इसके बावजूद भाजपा समर्थित और भाजपा विचारधारा से जुड़े उम्मीदवारों का प्रदर्शन जिले में प्रभावी रहा। दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों का पूरी तरह सफाया हो गया। पार्टी एक भी जिला परिषद सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी। सदर विधानसभा क्षेत्र के जिला परिषद वार्ड नंबर-10 बरमाणा में इस बार मुकाबला सबसे अधिक चर्चित रहा। भाजपा ने अशोक कुमार को समर्थन देकर मैदान में उतारा था, जबकि पार्टी के ही पूर्व प्रदेश पदाधिकारी रोहित ठाकुर ने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
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कांग्रेस समर्थित राजेश कुमार और इंटक के प्रदेश उपाध्यक्ष अधिवक्ता भगत सिंह वर्मा के मैदान में उतरने से मुकाबला और भी रोचक बन गया। सात उम्मीदवारों वाले इस चुनाव में चार प्रमुख उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही थी। पूरे चुनाव के दौरान यह सीट जिले की सबसे चर्चित सीट बनी रही। परिणाम आने पर अशोक कुमार ने सभी दावेदारों को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की। यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि वार्ड के गठन के बाद पहली बार यहां भाजपा समर्थित उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल हुआ है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बरमाणा का परिणाम केवल एक सीट की जीत नहीं बल्कि सदर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की बढ़ती राजनीतिक पैठ का संकेत भी है।
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वहीं झंडूता विधानसभा का जांगला वार्ड पार्टी के लिए आत्ममंथन का कारण भी बना है। यहां भाजपा के बागी देवांश चंदेल ने शानदार प्रदर्शन करते निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 11,392 मतों के भारी अंतर से पराजित कर दिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि भाजपा समर्थित उम्मीदवार अनूप महाजन तीसरे स्थान पर रहे। इस सीट को बचाने के लिए विधायक जीतराम कटवाल और पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग स्वयं चुनाव प्रचार में सक्रिय थे। इसके बावजूद पार्टी समर्थित उम्मीदवार को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। जांगला का परिणाम भाजपा नेतृत्व को यह संदेश है कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और नेताओं के असंतोष को नजरअंदाज करना भविष्य में महंगा पड़ सकता है।
जिला परिषद चुनाव में कई ऐसे उम्मीदवार भी विजयी रहे जिन्हें भले ही पार्टी का आधिकारिक समर्थन प्राप्त नहीं था, लेकिन उनकी पहचान भाजपा विचारधारा से जुड़े नेताओं के रूप में रही। बड़गांव वार्ड से नरेंद्र कुमार और नम्होल वार्ड से सुरभि की जीत को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन परिणामों से यह स्पष्ट हुआ है कि जिले में भाजपा का वैचारिक आधार अभी भी मजबूत बना हुआ है और कई क्षेत्रों में मतदाताओं ने पार्टी से जुड़े चेहरों पर भरोसा जताया है।
कांग्रेस के लिए मैदान साफ
जिला परिषद चुनाव के परिणाम कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुए हैं। जिले की 14 जिला परिषद सीटों में से कांग्रेस समर्थित एक भी उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर पाया। कई सीटों पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी मुकाबले में पिछड़ गए, जबकि कुछ स्थानों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगाई। यह पहला अवसर नहीं है जब जिला स्तर के चुनावों में कांग्रेस को निराशा हाथ लगी हो। इस बार पूरी तरह खाता न खुलना संगठन के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि कांग्रेस को 2027 के विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना है तो उसे अभी से संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना होगा।
कांग्रेस के लिए चेतावनी की घंटी
जिला परिषद चुनाव के नतीजे सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव का परिणाम तय नहीं करते, लेकिन वे राजनीतिक माहौल और जमीनी संगठन की स्थिति का संकेत जरूर देते हैं। जिला परिषद चुनावों में आए नतीजों से भाजपा को बढ़त मिली है। कांग्रेस के लिए यह परिणाम चेतावनी की घंटी हैं। यदि जिला परिषद स्तर पर पार्टी अपना आधार नहीं बचा पा रही है तो विधानसभा चुनाव में उसके सामने और बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। पार्टी को स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनता के बीच अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी होगी।

पंचायत चुनाव से निकली विधानसभा की आहट
बिलासपुर जिला परिषद चुनाव के नतीजों ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि आने वाला विधानसभा चुनाव केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नहीं होगा, बल्कि स्थानीय नेतृत्व, बागी नेताओं की भूमिका और संगठनात्मक मजबूती भी निर्णायक साबित होगी। जिला परिषद चुनाव 2026 के परिणामों को केवल स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जिले के राजनीतिक मूड और बदलते समीकरणों की एक महत्वपूर्ण झलक माना जा रहा है।
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