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Bilaspur News: महापुरुषों की शिक्षाओं से दूर कर सकते हैं पाखंड, अज्ञानता
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बल्लू खरियाला में धूमधाम से मनाया गया कबीर दास प्रकटोत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बल्लू खरियाला में कबीर दास का प्रकटोत्सव धूमधाम से मनाया गया। यह आयोजन कबीर पंथ सुधार सभा, हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग संयुक्त संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संत शिरोमणि कबीर दास मंदिर परिसर में ध्वजारोहण से किया गया।
इस दौरान मंदिर में संत कबीर दास की शिक्षाओं पर वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि आधुनिक युग में पाखंड, धर्मांधता, अज्ञानता को ऐसे महापुरुषों की शिक्षाओं से ही दूर किया जा सकता है। संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष सीताराम कौंडल ने कहा कि सद्गुरु ऐसा कीजिए लोभ, मोह ब्रह्म, नाही, दरिया से नारे रहे, दिखे दरिया माही। संत कबीर दास एक युग प्रवर्तक और क्रांतिकारी संत हुए जिन्होंने समरसता का पाठ पढ़ाया तथा पाखंडवाद से मुक्ति दिलाने के लिए समाज को जागरूक किया। जब लोग कबीर दास के बताए मार्ग पर अमल करेंगे तो निश्चित तौर पर जीवन सफल होगा। कबीर पंथ सुधार सभा के प्रधान बलदेव सिंह ने बताया कि मूर्ति पूजने से भगवत की प्राप्ति नहीं हो सकती, जब तक ज्ञान का दीप हृदय के अंदर नहीं जलेगा। इसलिए व्यक्ति को आत्म दीपों भाव ऐसा भाव रखते हुए, संतों महापुरुषों द्वारा बताई गई शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए अपने जीवन को शुभ व्यवस्थित संस्कृत और सुसंस्कृत बनाने की आवश्यकता है न कि पत्थरों की मूर्तियों की पूजा करने की। संत रविदास दास ने कहा था कि पत्थर पूजे जय हरि मिले तो मैं पूजूं पहाड़। सत्संग के आयोजन के बाद प्रसाद वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बल्लू खरियाला में कबीर दास का प्रकटोत्सव धूमधाम से मनाया गया। यह आयोजन कबीर पंथ सुधार सभा, हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग संयुक्त संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संत शिरोमणि कबीर दास मंदिर परिसर में ध्वजारोहण से किया गया।
इस दौरान मंदिर में संत कबीर दास की शिक्षाओं पर वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि आधुनिक युग में पाखंड, धर्मांधता, अज्ञानता को ऐसे महापुरुषों की शिक्षाओं से ही दूर किया जा सकता है। संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष सीताराम कौंडल ने कहा कि सद्गुरु ऐसा कीजिए लोभ, मोह ब्रह्म, नाही, दरिया से नारे रहे, दिखे दरिया माही। संत कबीर दास एक युग प्रवर्तक और क्रांतिकारी संत हुए जिन्होंने समरसता का पाठ पढ़ाया तथा पाखंडवाद से मुक्ति दिलाने के लिए समाज को जागरूक किया। जब लोग कबीर दास के बताए मार्ग पर अमल करेंगे तो निश्चित तौर पर जीवन सफल होगा। कबीर पंथ सुधार सभा के प्रधान बलदेव सिंह ने बताया कि मूर्ति पूजने से भगवत की प्राप्ति नहीं हो सकती, जब तक ज्ञान का दीप हृदय के अंदर नहीं जलेगा। इसलिए व्यक्ति को आत्म दीपों भाव ऐसा भाव रखते हुए, संतों महापुरुषों द्वारा बताई गई शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए अपने जीवन को शुभ व्यवस्थित संस्कृत और सुसंस्कृत बनाने की आवश्यकता है न कि पत्थरों की मूर्तियों की पूजा करने की। संत रविदास दास ने कहा था कि पत्थर पूजे जय हरि मिले तो मैं पूजूं पहाड़। सत्संग के आयोजन के बाद प्रसाद वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
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