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घरों में विराजे गणपति बप्पा, चतुर्थी उत्सव शुरू
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घुमारवीं में गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य पर पूजा अर्चना करते लोग।
- फोटो : BILASPUR
घुमारवीं/बिलासपुर। जिले में गणेश चतुर्थी का 11वां उत्सव शनिवार से शुरू हो गया है। हालांकि, कोरोना काल के चलते इस बार गणपति बप्पा पंडालों की बजाए घरों में ही स्थापित किए गए हैं। आस्थावानाें ने घरों में वेदाचार्यों की अगुवाई में वैदिक मंत्रोच्चार और पूजन के बीच भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित की। वहीं, कुछ लोगों ने मंदिरों के बंद होने से घरों पर ही आराधना कर मन्नतें मांगी।
घुमारवीं बस स्टैंड के साथ सैनिक विश्राम गृह के साथ यह उत्सव मनाया जा रहा है तथा इस उत्सव को लेकर हर बार भक्तों का खासा उत्साह देखने को मिलता था। लेकिन, कोरोना वायरस के चलते इस बार बिल्कुल संक्षिप्त रूप से मनाया जा रहा है। गणेश उत्सव 22 से 31 अगस्त तक मनाया जाएगा। यह पहले लोगों के सहयोग से मनाया जाता था। इस बार कोरोना के चलते यह एक कारोबारी द्वारा आयोजित किया गया है। जानकारी देते हुए विशाल सोनी ने बताया कि गणेश उत्सव में सुबह और शाम प्रतिदिन की आरती की जाएगी। मूर्ति विसर्जन 31 अगस्त को गोविंद सागर झील, लुहणू बिलासपुर में किया जाएगा। इस मौके पर विशाल सोनी, कविता, शिवम , सोनू, सुरेंद्र, भूरा व संजीव मौजूद रहे हैं। मान्यता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर ही भगवान गणेश का अवतार हुआ था। इसलिए भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश उत्सव के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान गणेश की उत्पत्ति हुई थी। गणेश जी को सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय माना गया है।
इस दिन गणपति बप्पा को अपने घर में लाकर विराजमान करने से वे अपने भक्तों के सारे विघ्न, बाधाएं दूर करते हैं। इसलिए, गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। गणेश चतुर्थी को लोग गणेश जी को अपने घर लाते हैं, गणेश चतुर्थी के ग्यारहवें दिन धूमधाम के साथ उन्हें विसर्जित कर दिया जाता है और अगले वर्ष जल्दी आने की प्रार्थना करते हैं। गणपति जी को अपने घर में किसी तरह की कोई कमी नहीं रहती है।
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घुमारवीं बस स्टैंड के साथ सैनिक विश्राम गृह के साथ यह उत्सव मनाया जा रहा है तथा इस उत्सव को लेकर हर बार भक्तों का खासा उत्साह देखने को मिलता था। लेकिन, कोरोना वायरस के चलते इस बार बिल्कुल संक्षिप्त रूप से मनाया जा रहा है। गणेश उत्सव 22 से 31 अगस्त तक मनाया जाएगा। यह पहले लोगों के सहयोग से मनाया जाता था। इस बार कोरोना के चलते यह एक कारोबारी द्वारा आयोजित किया गया है। जानकारी देते हुए विशाल सोनी ने बताया कि गणेश उत्सव में सुबह और शाम प्रतिदिन की आरती की जाएगी। मूर्ति विसर्जन 31 अगस्त को गोविंद सागर झील, लुहणू बिलासपुर में किया जाएगा। इस मौके पर विशाल सोनी, कविता, शिवम , सोनू, सुरेंद्र, भूरा व संजीव मौजूद रहे हैं। मान्यता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर ही भगवान गणेश का अवतार हुआ था। इसलिए भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश उत्सव के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान गणेश की उत्पत्ति हुई थी। गणेश जी को सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय माना गया है।
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इस दिन गणपति बप्पा को अपने घर में लाकर विराजमान करने से वे अपने भक्तों के सारे विघ्न, बाधाएं दूर करते हैं। इसलिए, गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। गणेश चतुर्थी को लोग गणेश जी को अपने घर लाते हैं, गणेश चतुर्थी के ग्यारहवें दिन धूमधाम के साथ उन्हें विसर्जित कर दिया जाता है और अगले वर्ष जल्दी आने की प्रार्थना करते हैं। गणपति जी को अपने घर में किसी तरह की कोई कमी नहीं रहती है।
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