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Bilaspur News: नप की प्रस्तावित कूड़ा डंपिंग साइट का ग्रामीणों ने किया विरोध

Sun, 16 Jun 2024 11:50 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jun 2024 11:50 PM IST
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Villagers protest against NAP's proposed garbage dumping site
- अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
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- जल्द प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपेंगे ज्ञापन
- संघर्ष समिति के बैनर तले पडगल में की बैठक

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर परिषद बिलासपुर की प्रस्तावित कूड़ा डंपिंग साइट के विरोध में ग्राम पंचायत नौणी और कोठीपुरा के ग्रामीण खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने नौणी पंचायत की ओर से दी गई अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीण जल्द ही इस मुद्दे को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे।
ग्रामीणों की बैठक रविवार को संघर्ष समिति पडगल के बैनर तले गांव पडगल में हुई। इसकी अध्यक्षता समिति के सदस्य अशोक कुमार ने की। बैठक में गांव पडगल में प्रस्तावित कूड़ा डंपिंग साइट पर चर्चा की गई। उपस्थित ग्रामीणों सहित नौणी पंचायत के उपप्रधान प्रीतम सिंह, वार्ड सदस्य पडगल राजेश, वार्ड सदस्य नौणी विनोद कुमार, संघर्ष समिति के अध्यक्ष निक्का राम शर्मा, वन अधिकार समिति कोठीपुरा के अध्यक्ष प्रेमलाल, कोठीपुरा पंचायत के पूर्व प्रधान नंदलाल आदि ने प्रस्तावित डंपिंग साइट का विरोध किया। इसके अलावा ग्रामीणों और वन अधिकार समिति नौणी के सदस्यों ने अनापत्ति प्रमाण पत्र पर धोखे में रख कर हस्ताक्षर कराने का आरोप भी लगाया। समिति के सदस्य अशोक कुमार ने बताया कि नौणी और कोठीपुरा पंचायत की सीमा के पास पडगल गांव में नगर परिषद बिलासपुर के कूड़े के लिए करीब तीन बीघा भूमि पर डंपिंग साइट बनाना प्रस्तावित है। जिस जगह पर यह डंपिंग साइट बनाई जानी है, वहां जंगली जानवर रहते हैं। इसके अलावा प्राकृतिक जल स्रोत भी हैं। डंपिंग साइट बनाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। इससे पहले एम्स, फोरलेन आदि परियोजनाएं बनने से यह क्षेत्र भारी पर्यावरण नुकसान झेल चुका है। डंपिंग साइट के विरोध में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही प्रशासनिक अधिकारियों से मिलेगा। यदि प्रशासन फिर भी मांगों को नहीं मानता है तो संघर्ष समिति कानूनी रास्ता अपनाएगी।
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ग्राम पंचायत नौणी की प्रधान निर्मला राजपूत ने बताया कि ग्रामीण यदि डंपिंग साइट का विरोध कर रहे हैं तो ये उनका अधिकार है।अनापत्ति प्रमाण पत्र और वन अधिकार समिति के रजिस्टर पर अब विरोध करने वाले स्थानीय वार्ड सदस्यों ने भी हस्ताक्षर किए और ग्रामीणों के भी कराए थे। जबकि आम सभा में सचिव ने ग्रामीणों ने इस विषय पर चर्चा की थी। प्रधान को तो सिर्फ अंत में हस्ताक्षर करने होते हैं।
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