{"_id":"678f8ca2f4834ad7720e1e60","slug":"united-sangharsh-morcha-is-providing-justice-to-the-victimized-society-ranaut-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-130628-2025-01-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीड़ित समाज को न्याय दिला रहा संयुक्त संघर्ष मोर्चा : रणौट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीड़ित समाज को न्याय दिला रहा संयुक्त संघर्ष मोर्चा : रणौट
विज्ञापन
बोले, दो साल में राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंचाईं 1361 शिकायतें
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्गों के उत्थान का काम कर रही संयुक्त संघर्ष मोर्चा पीड़ित, वंचित और शोषित वर्गों के न्याय की लड़ाई में सक्रिय है। अखिल भारतीय युवा कोली समाज के प्रदेशाध्यक्ष और मोर्चा के प्रदेश महासचिव तारा चंद रणौट ने ये बात कही।
उन्होंने कहा कि 2022 से 31 दिसंबर 2024 तक 1361 शिकायतों को सरकारी महकमों, आयोगों, राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंचाया है। इनमें से 48 मामले अत्याचार से संबंधित थे, जिनमें से एक हत्या और एक भूमि अधिग्रहण का मामला भी शामिल है। संगठन की मदद से पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा दिलाने में सफलता मिली है। कई अन्य मामले अभी प्रक्रियाधीन हैं। उन्होंने कहा कि यह एक गैर-राजनीतिक मंच है और समाज से किसी प्रकार की वित्तीय मदद नहीं लेता। मोर्चा ने अब तक 36 नीतिगत मामले सरकार के समक्ष उठाए हैं, जिनमें से 8 को मंजूरी मिल चुकी है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्गों के उत्थान का काम कर रही संयुक्त संघर्ष मोर्चा पीड़ित, वंचित और शोषित वर्गों के न्याय की लड़ाई में सक्रिय है। अखिल भारतीय युवा कोली समाज के प्रदेशाध्यक्ष और मोर्चा के प्रदेश महासचिव तारा चंद रणौट ने ये बात कही।
उन्होंने कहा कि 2022 से 31 दिसंबर 2024 तक 1361 शिकायतों को सरकारी महकमों, आयोगों, राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंचाया है। इनमें से 48 मामले अत्याचार से संबंधित थे, जिनमें से एक हत्या और एक भूमि अधिग्रहण का मामला भी शामिल है। संगठन की मदद से पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा दिलाने में सफलता मिली है। कई अन्य मामले अभी प्रक्रियाधीन हैं। उन्होंने कहा कि यह एक गैर-राजनीतिक मंच है और समाज से किसी प्रकार की वित्तीय मदद नहीं लेता। मोर्चा ने अब तक 36 नीतिगत मामले सरकार के समक्ष उठाए हैं, जिनमें से 8 को मंजूरी मिल चुकी है।
विज्ञापन