{"_id":"67bdc93d814bb78d1d08a8b6","slug":"twelve-jyotirling-shiv-dham-panyala-becomes-the-center-of-peoples-faith-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-132753-2025-02-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव धाम पन्याला बना लोगों की आस्था का केंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव धाम पन्याला बना लोगों की आस्था का केंद्र
Tue, 25 Feb 2025 11:12 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Tue, 25 Feb 2025 11:12 PM IST
विज्ञापन
घुमारवीं के पन्याला शिव धाम में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग । संवाद
-विशेष कारीगर बुलाकर मुख्य शिवलिंग पर चढ़ाई गई है 7 किलो चांदी की परत
महाशिवरात्रि विशेष
-2003 में घटी अनोखी घटना के बाद मंदिर बना शिव धाम
-सड़क बंद होने के कारण मंदिर में रुके थे 11 शिवलिंग लेकर जा रहे श्रद्धालु
- शिवलिंग यहीं छोड़कर चले गए थे वापस, तब मंदिर में हुई थी स्थापना
संजय शर्मा
भगेड़ (बिलासपुर)। घुमारवीं-सरकाघाट सुपर हाईवे पर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव धाम पन्याला अब शिव भक्तों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन गया है। मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और भव्य आयोजन किए जा रहे हैं। इस बार भक्तों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को ज्योतिर्लिंगों के दर्शन सुगमता से हो सकें।
मंदिर के पुजारी बाबा धर्मवीर के अनुसार, पहले यहां कामदानाथेश्वर मंदिर नाम का एक प्राचीन मंदिर था, जो सड़क के दूसरी ओर स्थित था। जब घुमारवीं-सरकाघाट हाईवे का निर्माण हुआ, तो ठेकेदारों को सड़क निर्माण के दौरान एक छोटा शिवलिंग प्राप्त हुआ। उन्होंने इसे सड़क के दूसरी ओर स्थापित कर दिया। धीरे-धीरे लोगों ने यहां एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर के विकास में स्थानीय भक्तों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। सन 1995 में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, जिसके बाद यह क्षेत्र में धार्मिक आस्था का केंद्र बनता गया। सन 2003 में एक अनोखी घटना घटी। कुछ श्रद्धालु वाहन में 11 शिवलिंग लेकर जा रहे थे, लेकिन भारी बारिश के कारण सड़क अवरुद्ध हो गई और उन्हें वहीं रुकना पड़ा। जब सड़क खुलने में देरी हुई तो वे शिवलिंगों को यहीं छोड़कर वापस चले गए। इसके बाद इन्हें भी मंदिर में स्थापित कर दिया गया और इस स्थान को द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव धाम का नाम दिया गया। मंदिर में काशी विश्वनाथ, बैद्यनाथ, नागेश्वर, भीमाशंकर, रामेश्वर, ममलेश्वर, त्र्यंबकेश्वर, घृष्णेश्वर, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, केदारनाथ, सोमनाथ के अलावा, मंदिर में भगवान गणेश, हनुमान और साक्षी गोपाल की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं।
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं, जो देर शाम तक बनी रहती हैं। हर साल यहां हजारों किलो गाजर का हलवा, दूध और सूखे मेवे का घोटा प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। मंदिर कमेटी के संस्थापक सदस्य और कानूनी सलाहकार प्रेम सिंह ठाकुर ने बताया कि इस बार मुख्य शिवलिंग पर 7 किलो चांदी की परत चढ़ाई गई है। इसके लिए पर्वतीय क्षेत्रों से विशेष कारीगर बुलाए गए थे। मंदिर के स्तंभों को लकड़ी की नक्काशी से सजाने का कार्य पिछले डेढ़ वर्ष से जारी है। इस कार्य को पूरा करने के लिए विशेष कारीगरों की सेवाएं ली गई हैं।
विज्ञापन
इनसेट
मंदिर की अनूठी विशेषताएं
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पहले इस स्थान पर घना जंगल था, जिसे फेटी धार के नाम से जाना जाता था। मंदिर के समीप पन्याला नाला बहता है, जिसमें सोने के कण भी पाए जाते हैं। मंदिर के साथ एक छोटे से टीले पर भगवान शिव और पार्वती की मूर्तियां स्थापित की गई हैं, जिसे कैलाश पर्वत नाम दिया गया है। भक्तों के लिए यहां कैलाश परिक्रमा मार्ग भी बनाया गया है। हाल ही में मंदिर में साक्षी गोपाल मंदिर का निर्माण भी किया गया है।
संवाद
विज्ञापन
महाशिवरात्रि विशेष
-2003 में घटी अनोखी घटना के बाद मंदिर बना शिव धाम
-सड़क बंद होने के कारण मंदिर में रुके थे 11 शिवलिंग लेकर जा रहे श्रद्धालु
- शिवलिंग यहीं छोड़कर चले गए थे वापस, तब मंदिर में हुई थी स्थापना
संजय शर्मा
भगेड़ (बिलासपुर)। घुमारवीं-सरकाघाट सुपर हाईवे पर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव धाम पन्याला अब शिव भक्तों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन गया है। मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और भव्य आयोजन किए जा रहे हैं। इस बार भक्तों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को ज्योतिर्लिंगों के दर्शन सुगमता से हो सकें।
मंदिर के पुजारी बाबा धर्मवीर के अनुसार, पहले यहां कामदानाथेश्वर मंदिर नाम का एक प्राचीन मंदिर था, जो सड़क के दूसरी ओर स्थित था। जब घुमारवीं-सरकाघाट हाईवे का निर्माण हुआ, तो ठेकेदारों को सड़क निर्माण के दौरान एक छोटा शिवलिंग प्राप्त हुआ। उन्होंने इसे सड़क के दूसरी ओर स्थापित कर दिया। धीरे-धीरे लोगों ने यहां एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर के विकास में स्थानीय भक्तों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। सन 1995 में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, जिसके बाद यह क्षेत्र में धार्मिक आस्था का केंद्र बनता गया। सन 2003 में एक अनोखी घटना घटी। कुछ श्रद्धालु वाहन में 11 शिवलिंग लेकर जा रहे थे, लेकिन भारी बारिश के कारण सड़क अवरुद्ध हो गई और उन्हें वहीं रुकना पड़ा। जब सड़क खुलने में देरी हुई तो वे शिवलिंगों को यहीं छोड़कर वापस चले गए। इसके बाद इन्हें भी मंदिर में स्थापित कर दिया गया और इस स्थान को द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव धाम का नाम दिया गया। मंदिर में काशी विश्वनाथ, बैद्यनाथ, नागेश्वर, भीमाशंकर, रामेश्वर, ममलेश्वर, त्र्यंबकेश्वर, घृष्णेश्वर, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, केदारनाथ, सोमनाथ के अलावा, मंदिर में भगवान गणेश, हनुमान और साक्षी गोपाल की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं।
विज्ञापन
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं, जो देर शाम तक बनी रहती हैं। हर साल यहां हजारों किलो गाजर का हलवा, दूध और सूखे मेवे का घोटा प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। मंदिर कमेटी के संस्थापक सदस्य और कानूनी सलाहकार प्रेम सिंह ठाकुर ने बताया कि इस बार मुख्य शिवलिंग पर 7 किलो चांदी की परत चढ़ाई गई है। इसके लिए पर्वतीय क्षेत्रों से विशेष कारीगर बुलाए गए थे। मंदिर के स्तंभों को लकड़ी की नक्काशी से सजाने का कार्य पिछले डेढ़ वर्ष से जारी है। इस कार्य को पूरा करने के लिए विशेष कारीगरों की सेवाएं ली गई हैं।
विज्ञापन
इनसेट
मंदिर की अनूठी विशेषताएं
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पहले इस स्थान पर घना जंगल था, जिसे फेटी धार के नाम से जाना जाता था। मंदिर के समीप पन्याला नाला बहता है, जिसमें सोने के कण भी पाए जाते हैं। मंदिर के साथ एक छोटे से टीले पर भगवान शिव और पार्वती की मूर्तियां स्थापित की गई हैं, जिसे कैलाश पर्वत नाम दिया गया है। भक्तों के लिए यहां कैलाश परिक्रमा मार्ग भी बनाया गया है। हाल ही में मंदिर में साक्षी गोपाल मंदिर का निर्माण भी किया गया है।
संवाद

घुमारवीं के पन्याला शिव धाम में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग । संवाद

घुमारवीं के पन्याला शिव धाम में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग । संवाद