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प्रशिक्षुओं को मिट्टी की जांच करना सीखाया
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बड़गांव में 15 दिवसीय मिट्टी के बर्तन, कलाकृतियां बनाने हेतु कार्यशाला में प्रशिक्षक व अधिकारी।
- फोटो : BILASPUR
बिलासपुर। पूर्ण राज्यत्व की 50वीं वर्षगांठ समारोह के उपलक्ष्य पर भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर द्वारा विलुप्त हो रही सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए झंडूता के बड़गांव में 15 दिवसीय मिट्टी के बर्तन/कलाकृतियां बनाने की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में क्षेत्र के 22 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया।
कार्यशाला में भूपेंद्र सिंह गुलेरिया व अरुण गुलेरिया ने प्रशिक्षक के रूप में प्रशिक्षुओं को टैराकोटा मिट्टी की जांच करना सीखाया। इसके लिए जो चिकनी मिट्टी चाहिए होती है, वह आसानी से स्थानीय स्तर पर मिल सकती है। किस तरह से मिट्टी का चयन करना है और तैयार करना है, बताया गया। बिजली के व्हील पर काम करना और ग्लेज करना इत्यादि का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षुओं को यह भी बताया गया कि मिट्टी में 16 तत्व होते हैं जो इंसान के लिए अति आवश्यक है। प्रशिक्षुओं द्वारा इस कार्यशाला में दीपक, कटोरी, गिलास व अन्य कई प्रकार की चीजें बनाना सीखा।
जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने बताया कि मिट्टी के बर्तनों के उपयोग से हमें कई प्रकार के पौष्टिक तत्व मिलते हैं। जिससे हम बीमारियों से भी बच सकते हैं। विभाग प्राचीन संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए ऐसे आयोजन समय-समय पर करवाता रहता है। इस तरह की कार्यशालाओं से युवा पीढ़ी को विलुप्त हो रही कलाओं के बारे में जानकारी देकर संस्कृति का संरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने उपस्थित प्रशिक्षुओं व लोगों को विभागीय योजनाओं की जानकारी भी दी।
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कार्यशाला में भूपेंद्र सिंह गुलेरिया व अरुण गुलेरिया ने प्रशिक्षक के रूप में प्रशिक्षुओं को टैराकोटा मिट्टी की जांच करना सीखाया। इसके लिए जो चिकनी मिट्टी चाहिए होती है, वह आसानी से स्थानीय स्तर पर मिल सकती है। किस तरह से मिट्टी का चयन करना है और तैयार करना है, बताया गया। बिजली के व्हील पर काम करना और ग्लेज करना इत्यादि का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षुओं को यह भी बताया गया कि मिट्टी में 16 तत्व होते हैं जो इंसान के लिए अति आवश्यक है। प्रशिक्षुओं द्वारा इस कार्यशाला में दीपक, कटोरी, गिलास व अन्य कई प्रकार की चीजें बनाना सीखा।
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जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने बताया कि मिट्टी के बर्तनों के उपयोग से हमें कई प्रकार के पौष्टिक तत्व मिलते हैं। जिससे हम बीमारियों से भी बच सकते हैं। विभाग प्राचीन संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए ऐसे आयोजन समय-समय पर करवाता रहता है। इस तरह की कार्यशालाओं से युवा पीढ़ी को विलुप्त हो रही कलाओं के बारे में जानकारी देकर संस्कृति का संरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने उपस्थित प्रशिक्षुओं व लोगों को विभागीय योजनाओं की जानकारी भी दी।
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