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लज्जा, शांति और धैर्य का होना चाहिए घूंघट : सोनू

Mon, 10 Feb 2025 11:27 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 10 Feb 2025 11:27 PM IST
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There should be a veil of shame, peace and patience: Sonu
-श्रीमद् शिवमहापुराण में सुनाई कृष्ण जन्म कथा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। बड़गांव के टिहरा में चल रही श्रीमद् शिवमहापुराण कथा के पांचवें दिन पंडित सोनू शर्मा ने कृष्ण की जन्म कथा और नंद-यशोदा द्वारा उनके पालन पोषण की कथा सुनाई। इस दौरान पूतना के वध प्रसंग सुनाया। उन्होंने महिलाओं को बताया कि घूंघट कपड़े का नहीं बल्कि लज्जा, शांति और धैर्य का होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि महाशिवपुराण में कहा गया है कि देवकी के पुत्र भगवान श्री कृष्ण का जन्म देवकी के गर्भ से मथुरा के राजा कंस के कारागार में हुआ। उन्होंने कहा कि प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में बाल कृष्ण की लीलाओं के अनेक वर्णन मिलते हैं। इनमें यशोदा को ब्रह्मांड के दर्शन, माखन चोरी और उसके आरोप में ओखल से बांधने की घटनाओं का सूरदास ने सजीव वर्णन किया है। यशोदा ने बलराम के पालन पोषण की भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो रोहिणी के पुत्र और सुभद्रा के भाई थे। उनकी एक पुत्री का भी वर्णन मिलता है जिसका नाम एकांगा था। पंडित शर्मा ने उपस्थित श्रोताओं को बताया कि वसु श्रेष्ठ द्रोण और उनकी पत्नी धरा ने ब्रह्माजी से यह प्रार्थना की कि जब हम पृथ्वी पर जन्म लें तो भगवान श्री कृष्ण में हमारी अविचल भक्ति हो। ब्रह्माजी ने तथास्तु कहकर उन्हें वर दिया। इसी वर के प्रभाव से ब्रजमंडल में सुमुख नामक गोप की पत्नी पाटला के गर्भ से धरा का जन्म यशोदा के रूप में हुआ और उनका विवाह नंद से हुआ। उन्होंने बताया कि नंद पूर्व जन्म के द्रोण नामक वसु थे। भगवान कृष्ण इन्हीं नंद-यशोदा के पुत्र बने। उन्होंने पूतना का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि पूतना एक राक्षसी थी जो अपने आप को सुंदर और भली स्त्री दिखाने का ढोंग करती हुई नन्हे श्री कृष्ण तक पहुंचने में सफल हुई थी और भगवान कृष्ण को मारने की कोशिश कर रही थी। वह जानती थी कि कृष्ण का जन्म बहुत खास है। इसलिए कंस के आदेश पर उन्हें मार देना चाहती थी। कथा के आयोजक जगजीवन गौतम, राजेश गौतम और विष्णु गौतम ने बताया कि 12 फरवरी को कथा के समापन पर हवन यज्ञ और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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