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Bilaspur News: श्रद्धालुओं को सुनाई भगवान वामन की कथा
Sat, 16 May 2026 11:41 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 16 May 2026 11:41 PM IST
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संतोषी माता मंदिर में चल रही भागवत कथा का श्रवण करते हुए श्रद्धालु। स्रोत: जागरूक पाठक।
संतोषी माता मंदिर में भागवत कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। पंचायत सुन्हाणी के लेहड़ में संतोषी माता मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पंडित दिनेश शास्त्री ने भगवान वामन की कथा सुनाई।
उन्होंने बताया कि जब दैत्यराज महाबली के प्रताप से तीनों लोक प्रभावित हो गए और देवता चिंतित हो उठे तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया। उन्होंने कहा कि राजा बली अत्यंत दानी और प्रजा हितैषी राजा थे। उनके यज्ञ में आने वाला कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता था। भगवान विष्णु ने छोटे ब्राह्मण बालक के रूप में राजा बली के यज्ञ में पहुंचकर केवल तीन पग भूमि दान में मांगी। राजा बली ने सहर्ष यह दान स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद भगवान वामन ने विराट रूप धारण कर लिया। एक पग में पृथ्वी और दूसरे पग में स्वर्ग लोक को नाप लिया। तीसरे पग के लिए स्थान न बचने पर राजा बली ने अपना सिर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। भगवान विष्णु राजा बली की दानशीलता और वचन पालन से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें पाताल लोक का राजा बनने का वरदान दिया। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान वामन और राजा बली की इस प्रेरणादायक कथा को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा वाचक ने कहा कि यह कथा हमें दान विनम्रता और वचन पालन की प्रेरणा देती है। मंदिर के पुजारी सुरेश कुमार ने बताया कि रविवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। पंचायत सुन्हाणी के लेहड़ में संतोषी माता मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पंडित दिनेश शास्त्री ने भगवान वामन की कथा सुनाई।
उन्होंने बताया कि जब दैत्यराज महाबली के प्रताप से तीनों लोक प्रभावित हो गए और देवता चिंतित हो उठे तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया। उन्होंने कहा कि राजा बली अत्यंत दानी और प्रजा हितैषी राजा थे। उनके यज्ञ में आने वाला कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता था। भगवान विष्णु ने छोटे ब्राह्मण बालक के रूप में राजा बली के यज्ञ में पहुंचकर केवल तीन पग भूमि दान में मांगी। राजा बली ने सहर्ष यह दान स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद भगवान वामन ने विराट रूप धारण कर लिया। एक पग में पृथ्वी और दूसरे पग में स्वर्ग लोक को नाप लिया। तीसरे पग के लिए स्थान न बचने पर राजा बली ने अपना सिर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। भगवान विष्णु राजा बली की दानशीलता और वचन पालन से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें पाताल लोक का राजा बनने का वरदान दिया। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान वामन और राजा बली की इस प्रेरणादायक कथा को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा वाचक ने कहा कि यह कथा हमें दान विनम्रता और वचन पालन की प्रेरणा देती है। मंदिर के पुजारी सुरेश कुमार ने बताया कि रविवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है।