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लगातार छात्र विरोधी निर्णय ले रही प्रदेश सरकार : एबीवीपी
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बिलासपुर में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते एबीवीपी कार्यकर्ता। संवाद
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-महाविद्यालयों को बनाया जा रहा राजनीति का अखाड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। वर्तमान प्रदेश सरकार जब से सत्ता में आई है तब से छात्र विरोधी निर्णय लिए जा रहे हैं। महाविद्यालयों को राजनीति का अखाड़ा बनाया जा रहा है। यह बात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) बिलासपुर कॉलेज के इकाई अध्यक्ष आयुष भारद्वाज ने कही।
परिधि गृह बिलासपुर में पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि एबीवीपी की राज्य स्तरीय बैठक 12 और 13 जुलाई को पालमपुर में हुई थी। इस बैठक में परिषद ने हिमाचल प्रदेश का वर्तमान परिदृश्य और हिमाचल प्रदेश का वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य दो प्रस्ताव पारित किए। आयुष ने कहा कि सत्ता में आने से पहले प्रदेश सरकार ने हर साल एक लाख नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन यह वादा पूरा नहीं हुआ है। हजारों विद्यार्थियों के साथ यह बहुत बड़ा धोखा है। संस्थानों को बंद किया जा रहा है। पिछले ढाई साल में न के बराबर शिक्षकों की भर्ती हुई है, जो चिंता का विषय है। कहा कि सरदार पटेल विश्वविद्यालय का दायरा सीमित किया जा रहा है। यह सरकार केवल छात्रों की अनदेखी कर रही है। आयुष ने कॉलेज की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन की कॉलेज में कोई पकड़ नहीं है। संस्थानों में नशे का प्रचलन बढ़ रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। आयुष ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि कॉलेज में राजनीतिक हस्तक्षेप लगातार हो रहा है। यह शिक्षण संस्थानों के लिए सही नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश में क्राइम रेट बढ़ रहा है, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग उठाई की शिक्षण संस्थानों को बंद करने की जगह अध्यापकों की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इस मौके पर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शिवांश शर्मा, कशिश चंदेल और आदित्य ठाकुर मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। वर्तमान प्रदेश सरकार जब से सत्ता में आई है तब से छात्र विरोधी निर्णय लिए जा रहे हैं। महाविद्यालयों को राजनीति का अखाड़ा बनाया जा रहा है। यह बात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) बिलासपुर कॉलेज के इकाई अध्यक्ष आयुष भारद्वाज ने कही।
परिधि गृह बिलासपुर में पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि एबीवीपी की राज्य स्तरीय बैठक 12 और 13 जुलाई को पालमपुर में हुई थी। इस बैठक में परिषद ने हिमाचल प्रदेश का वर्तमान परिदृश्य और हिमाचल प्रदेश का वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य दो प्रस्ताव पारित किए। आयुष ने कहा कि सत्ता में आने से पहले प्रदेश सरकार ने हर साल एक लाख नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन यह वादा पूरा नहीं हुआ है। हजारों विद्यार्थियों के साथ यह बहुत बड़ा धोखा है। संस्थानों को बंद किया जा रहा है। पिछले ढाई साल में न के बराबर शिक्षकों की भर्ती हुई है, जो चिंता का विषय है। कहा कि सरदार पटेल विश्वविद्यालय का दायरा सीमित किया जा रहा है। यह सरकार केवल छात्रों की अनदेखी कर रही है। आयुष ने कॉलेज की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन की कॉलेज में कोई पकड़ नहीं है। संस्थानों में नशे का प्रचलन बढ़ रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। आयुष ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि कॉलेज में राजनीतिक हस्तक्षेप लगातार हो रहा है। यह शिक्षण संस्थानों के लिए सही नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश में क्राइम रेट बढ़ रहा है, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग उठाई की शिक्षण संस्थानों को बंद करने की जगह अध्यापकों की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इस मौके पर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शिवांश शर्मा, कशिश चंदेल और आदित्य ठाकुर मौजूद रहे।
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