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देश को टीबी मुक्त बनाने में मेडिकल संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : प्रो. अशोक
Sun, 26 Apr 2026 11:39 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 26 Apr 2026 11:39 PM IST
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एम्स बिलासपुर में आयोजित बैठक में मौजूद अधिकारी। स्रोत: एम्स प्रबंधन
एम्स बिलासपुर में हुई एनटीईपी कोर कमेटी की पहली तिमाही बैठक
टीबी उन्मूलन अभियान को गति देने और स्क्रीनिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर के मेडिकल कॉलेज कोर कमेटी की ओर से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत वर्ष 2026 की पहली तिमाही बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त), कार्यकारी निदेशक, एम्स बिलासपुर ने की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करना और संस्थान स्तर पर स्क्रीनिंग एवं केस डिटेक्शन को और अधिक प्रभावी बनाना रहा। बैठक में राष्ट्रीय टास्क फोर्स ऑन एनटीईपी के चेयरमैन प्रो. (डॉ.) अशोक भारद्वाज ने कहा कि देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य में मेडिकल कॉलेजों और तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।।उन्होंने कहा कि टीबी जैसी बीमारी की समय रहते पहचान के लिए उच्च जोखिम वाले समूहों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। इनमें को-मॉर्बिडिटी से ग्रस्त मरीज, बाल रोगी और ऐसे मरीज शामिल हैं जिनमें टीबी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कहा कि नियमित और व्यापक स्क्रीनिंग से ही टीबी के मामलों को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है, जिससे उपचार की सफलता दर भी बढ़ती है और संक्रमण फैलने की संभावना कम होती है।
एम्स के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह ने कहा कि एम्स बिलासपुर भारत सरकार के टीबी उन्मूलन लक्ष्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संस्थान में चल रही एनटीईपी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी क्लिनिकल विभागों में स्क्रीनिंग और जागरूकता कार्यों को मजबूत किया जा रहा है। कहा कि टीबी नियंत्रण के लिए विभागों के बीच समन्वय और डेटा आधारित निगरानी प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि कार्यक्रम की प्रगति को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सके। बैठक में यह भी चर्चा की गई कि अस्पताल स्तर पर टीबी स्क्रीनिंग गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित और नियमित किया जाए। इसके लिए विभागीय स्तर पर समन्वय बढ़ाने, संदिग्ध मरीजों की पहचान प्रक्रिया को मजबूत करने पर बल दिया गया।
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बैठक में विश्व स्वास्थ्य संगठन के टीबी सलाहकार जिला बिलासपुर, जिला क्षय रोग अधिकारी, जिला एनटीईपी अधिकारी, एम्स के चिकित्सा अधीक्षक, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, डॉट्स सेंटर के चिकित्सा अधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में चल रही टीबी उन्मूलन गतिविधियों की जानकारी साझा की तथा अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा की।
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टीबी उन्मूलन अभियान को गति देने और स्क्रीनिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर के मेडिकल कॉलेज कोर कमेटी की ओर से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत वर्ष 2026 की पहली तिमाही बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त), कार्यकारी निदेशक, एम्स बिलासपुर ने की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करना और संस्थान स्तर पर स्क्रीनिंग एवं केस डिटेक्शन को और अधिक प्रभावी बनाना रहा। बैठक में राष्ट्रीय टास्क फोर्स ऑन एनटीईपी के चेयरमैन प्रो. (डॉ.) अशोक भारद्वाज ने कहा कि देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य में मेडिकल कॉलेजों और तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।।उन्होंने कहा कि टीबी जैसी बीमारी की समय रहते पहचान के लिए उच्च जोखिम वाले समूहों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। इनमें को-मॉर्बिडिटी से ग्रस्त मरीज, बाल रोगी और ऐसे मरीज शामिल हैं जिनमें टीबी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कहा कि नियमित और व्यापक स्क्रीनिंग से ही टीबी के मामलों को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है, जिससे उपचार की सफलता दर भी बढ़ती है और संक्रमण फैलने की संभावना कम होती है।
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एम्स के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह ने कहा कि एम्स बिलासपुर भारत सरकार के टीबी उन्मूलन लक्ष्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संस्थान में चल रही एनटीईपी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी क्लिनिकल विभागों में स्क्रीनिंग और जागरूकता कार्यों को मजबूत किया जा रहा है। कहा कि टीबी नियंत्रण के लिए विभागों के बीच समन्वय और डेटा आधारित निगरानी प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि कार्यक्रम की प्रगति को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सके। बैठक में यह भी चर्चा की गई कि अस्पताल स्तर पर टीबी स्क्रीनिंग गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित और नियमित किया जाए। इसके लिए विभागीय स्तर पर समन्वय बढ़ाने, संदिग्ध मरीजों की पहचान प्रक्रिया को मजबूत करने पर बल दिया गया।
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बैठक में विश्व स्वास्थ्य संगठन के टीबी सलाहकार जिला बिलासपुर, जिला क्षय रोग अधिकारी, जिला एनटीईपी अधिकारी, एम्स के चिकित्सा अधीक्षक, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, डॉट्स सेंटर के चिकित्सा अधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में चल रही टीबी उन्मूलन गतिविधियों की जानकारी साझा की तथा अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा की।