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Bilaspur News: टनल प्रभावितों का 200वें दिन भी जारी रहा धरना
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बध्यात में धरने पर बैठे प्रभावित परिवारों के सदस्य। स्रोत: जागरूक पाठक
शासन और प्रशासन पर अनदेखी का जड़ा आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भानुपल्ली–बिलासपुर रेल लाइन की टनल नंबर 17, नोग बध्यात में ग्रामीणों का धरना सोमवार को 200वें दिन में पहुंच गया। वहीं क्रमिक भूख हड़ताल 177वें दिन भी जारी रही। प्रभावित परिवारों ने कहा कि दो सौ दिन का यह संघर्ष प्रशासनिक उदासीनता की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है, क्योंकि अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
सोमवार को धरने पर कौशल्या देवी, रेखा देवी, केसरी देवी, बंटी देवी और मीना देवी बैठीं। महिलाओं ने कहा कि वे कई महीनों से समस्याएं प्रशासन के समक्ष रख रही हैं, पर कोई अधिकारी न सुनवाई कर रहा है। न ही मौके पर आकर परिस्थितियों का जायजा लिया जा रहा है। धरने के 200 दिन पूरे होने पर ग्रामीणों ने बैठक भी की और आगे की रणनीति तैयार की। बैठक में निर्णय लिया कि यदि प्रशासन इसी तरह चुप बैठा रहा तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। आंदोलनकारियों ने कहा कि 177 दिन की भूख हड़ताल इस बात का संकेत है कि उनकी पीड़ा कितनी गहरी है। इसके बावजूद उनकी समस्याएं अनसुनी ही हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक समाधान नहीं मिलता, धरना और भूख हड़ताल दोनों जारी रहेंगे। शासन और प्रशासन की अनदेखी उनके दर्द को और बढ़ा रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भानुपल्ली–बिलासपुर रेल लाइन की टनल नंबर 17, नोग बध्यात में ग्रामीणों का धरना सोमवार को 200वें दिन में पहुंच गया। वहीं क्रमिक भूख हड़ताल 177वें दिन भी जारी रही। प्रभावित परिवारों ने कहा कि दो सौ दिन का यह संघर्ष प्रशासनिक उदासीनता की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है, क्योंकि अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
सोमवार को धरने पर कौशल्या देवी, रेखा देवी, केसरी देवी, बंटी देवी और मीना देवी बैठीं। महिलाओं ने कहा कि वे कई महीनों से समस्याएं प्रशासन के समक्ष रख रही हैं, पर कोई अधिकारी न सुनवाई कर रहा है। न ही मौके पर आकर परिस्थितियों का जायजा लिया जा रहा है। धरने के 200 दिन पूरे होने पर ग्रामीणों ने बैठक भी की और आगे की रणनीति तैयार की। बैठक में निर्णय लिया कि यदि प्रशासन इसी तरह चुप बैठा रहा तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। आंदोलनकारियों ने कहा कि 177 दिन की भूख हड़ताल इस बात का संकेत है कि उनकी पीड़ा कितनी गहरी है। इसके बावजूद उनकी समस्याएं अनसुनी ही हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक समाधान नहीं मिलता, धरना और भूख हड़ताल दोनों जारी रहेंगे। शासन और प्रशासन की अनदेखी उनके दर्द को और बढ़ा रही है।
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