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Bilaspur News: भगेड़ फ्लाईओवर के पास मलबा फेंकने का मामला शिमला मुख्यालय भेजा

Wed, 03 Sep 2025 11:10 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Wed, 03 Sep 2025 11:10 PM IST
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The matter of dumping of debris near Bhagad flyover has been sent to Shimla headquarters
एक्सक्लूसिव
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने की पेट्रोल पंप मालिक पर एक लाख रुपये जुर्माने की सिफारिश
नोटिस के बावजूद भी नहीं हटाया मलबा, एनजीटी के आदेशों का भी किया उल्लंघन

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भगेड़ फ्लाईओवर के पास नाले में अवैध मलबा फेंकने का मामला अब शिमला मुख्यालय पहुंच गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर ने पेट्रोल पंप के मालिक पर एक लाख रुपये पर्यावरण मुआवजा लगाने की सिफारिश करते हुए पूरा प्रकरण मुख्यालय को भेज दिया है। अब आगे की कार्रवाई वहीं से होगी।
मामला ग्राम पंचायत बकरोआ के गांव बागठेहड़ू गांव का है। शिकायत थी कि मौजा बागठेहड़ू में निर्माणाधीन पेट्रोल पंप से निकला मलबा भगेड़ फ्लाईओवर के नाले और सरकारी भूमि में फेंका जा रहा है। मौके का निरीक्षण करने के बाद बोर्ड अधिकारियों ने पाया कि शिकायत सही है और अवैध मलबा डंपिंग किया गया है। ग्राम पंचायत बकरोआ के सचिव ने 14 जुलाई को बोर्ड को भेजे पत्र में इसकी पुष्टि की कि पेट्रोल पंप निर्माण से निकला मलबा पास के नाले और भूमि में डंप किया गया है। इस आधार पर बोर्ड ने मालिक को 1 अगस्त 2025 को नोटिस जारी कर मलबा हटाने के निर्देश दिए। क्षेत्रीय अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, मालिक ने न तो मलबा हटाया और न ही कोई जवाब दिया। यहां तक कि पहले दिए गए हलफनामे में जिन शर्तों का पालन करना था, उन्हें भी पूरा नहीं किया गया। इससे यह साबित हुआ कि जानबूझकर आदेशों की अवहेलना की गई। बोर्ड ने कहा कि नाले में अवैध डंपिंग से जल प्रदूषण का खतरा है। बोर्ड अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर शिकायत सही पाई। जांच में पंचायत सचिव ने भी स्पष्ट किया कि यह मलबा पेट्रोल पंप मालिक द्वारा डंप किया गया है। वहीं, पटवारी की रिपोर्ट में भूमि को सरकारी दर्ज किया गया। हालांकि, तहसीलदार कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं आया।
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बोर्ड ने इस संबंध में पेट्रोल पंप मालिक को नोटिस जारी कर मलबा हटाने और जवाब देने को कहा था, लेकिन न तो मलबा हटाया गया और न ही कोई जवाब दिया गया। बोर्ड के अनुसार यह कार्रवाई पानी रोकथाम एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 और एनजीटी के आदेशों का स्पष्ट उल्लंघन है। गौरतलब है कि एनजीटी ने 2013 में पारित आदेश में कहा था कि अवैज्ञानिक तरीके से मलबा फेंकने पर पॉल्यूटर पे प्रिंसिपल के तहत एक लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया जाएगा। इसी आदेश को आधार बनाकर बोर्ड ने यह सिफारिश की है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुख्यालय शिमला अब इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई करेगा और पेट्रोल पंप मालिक से पर्यावरण मुआवजा वसूलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
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