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Bilaspur News: फार्मासिस्ट के भरोसे पिछड़ा क्षेत्र का गाह घोड़ी का स्वास्थ्य केंद्र
Sun, 09 Nov 2025 11:17 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 09 Nov 2025 11:17 PM IST
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गाह घोड़ी
पीएचसी में चिकित्सकों की कमी, मरीज हो रहे परेशान
स्थायी नियुक्ति के बावजूद महीने में सिर्फ एक हफ्ता आती हैं डॉक्टर
लोगों की सुविधा के लिए बनाई गई 68 लाख की इमारत हो रही खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता (बिलासपुर)। झंडूता विधानसभा क्षेत्र के कोटधार इलाके में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गाह घोड़ी में लंबे समय से चिकित्सक की कमी लोगों पर भारी पड़ रही है। स्थायी नियुक्ति होने के बावजूद यहां डॉक्टर महीने में केवल एक सप्ताह ही सेवाएं दे रही हैं, जबकि शेष समय वह बरठीं अस्पताल में तैनात रहती हैं। ऐसे में मरीजों की जांच और उपचार का सारा जिम्मा फार्मासिस्ट के कंधों पर है।
इस दुर्गम क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने इस केंद्र का शिलान्यास किया था। बाद में 2014 में वीरभद्र सिंह की सरकार के कार्यकाल में इसका लोकार्पण किया गया था। शुरुआती वर्षों में यहां लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला, लेकिन अब हालात फिर पुराने दौर में लौट आए हैं। गाह घोड़ी, जोहड़ सुंदरी, सड़क जोहड़, गडयाना, मलराओं के अलावा श्री नैना देवी क्षेत्र के नकारना, चलैला, कलरी, रियाला और खिंडल जैसे गांवों के लोग गोविंद सागर झील पार करके इस स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए पहुंचते हैं। मगर डॉक्टर की अनुपलब्धता के कारण अब इन्हें निजी क्लीनिक या बरठीं अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने से अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। करीब 68 लाख रुपये की लागत से बना यह दो मंजिला भवन अब जर्जर हालत में पहुंच चुका है। दीमक लगने से खिड़कियां- दरवाजे टूट चुके हैं और दीवारों की पलस्तर झड़ने लगा है। लोगों का कहना है कि सरकार के लाखों रुपये पानी में जा रहे हैं, जबकि चिकित्सा सेवाओं की दशा जस की तस बनी हुई है।
कोट
बीएमओ बोले, मरम्मत प्रक्रिया शुरू, डॉक्टर की अस्थायी तैनाती बरठीं में
कार्यकारी खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश गौतम ने बताया कि पीएचसी गाह घोड़ी में चिकित्सक, फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सहित तीन पद स्वीकृत हैं। चिकित्सक की स्थायी नियुक्ति यहां की गई है, लेकिन अस्थायी तौर पर उनकी सेवाएं फिलहाल बरठीं अस्पताल में ली जा रही हैं। उन्होंने बताया कि भवन की मरम्मत प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि जल्द ही केंद्र को बेहतर स्थिति में लाया जा सके।
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स्थायी नियुक्ति के बावजूद महीने में सिर्फ एक हफ्ता आती हैं डॉक्टर
लोगों की सुविधा के लिए बनाई गई 68 लाख की इमारत हो रही खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता (बिलासपुर)। झंडूता विधानसभा क्षेत्र के कोटधार इलाके में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गाह घोड़ी में लंबे समय से चिकित्सक की कमी लोगों पर भारी पड़ रही है। स्थायी नियुक्ति होने के बावजूद यहां डॉक्टर महीने में केवल एक सप्ताह ही सेवाएं दे रही हैं, जबकि शेष समय वह बरठीं अस्पताल में तैनात रहती हैं। ऐसे में मरीजों की जांच और उपचार का सारा जिम्मा फार्मासिस्ट के कंधों पर है।
इस दुर्गम क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने इस केंद्र का शिलान्यास किया था। बाद में 2014 में वीरभद्र सिंह की सरकार के कार्यकाल में इसका लोकार्पण किया गया था। शुरुआती वर्षों में यहां लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला, लेकिन अब हालात फिर पुराने दौर में लौट आए हैं। गाह घोड़ी, जोहड़ सुंदरी, सड़क जोहड़, गडयाना, मलराओं के अलावा श्री नैना देवी क्षेत्र के नकारना, चलैला, कलरी, रियाला और खिंडल जैसे गांवों के लोग गोविंद सागर झील पार करके इस स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए पहुंचते हैं। मगर डॉक्टर की अनुपलब्धता के कारण अब इन्हें निजी क्लीनिक या बरठीं अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने से अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। करीब 68 लाख रुपये की लागत से बना यह दो मंजिला भवन अब जर्जर हालत में पहुंच चुका है। दीमक लगने से खिड़कियां- दरवाजे टूट चुके हैं और दीवारों की पलस्तर झड़ने लगा है। लोगों का कहना है कि सरकार के लाखों रुपये पानी में जा रहे हैं, जबकि चिकित्सा सेवाओं की दशा जस की तस बनी हुई है।
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बीएमओ बोले, मरम्मत प्रक्रिया शुरू, डॉक्टर की अस्थायी तैनाती बरठीं में
कार्यकारी खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश गौतम ने बताया कि पीएचसी गाह घोड़ी में चिकित्सक, फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सहित तीन पद स्वीकृत हैं। चिकित्सक की स्थायी नियुक्ति यहां की गई है, लेकिन अस्थायी तौर पर उनकी सेवाएं फिलहाल बरठीं अस्पताल में ली जा रही हैं। उन्होंने बताया कि भवन की मरम्मत प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि जल्द ही केंद्र को बेहतर स्थिति में लाया जा सके।
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