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Bilaspur News: कथा में सुनाया कृष्ण जन्म प्रसंग, श्रद्धालु भाव विभोर
Fri, 26 Jun 2026 11:29 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 26 Jun 2026 11:29 PM IST
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घुमारवीं के सनौर में आयोजित कथा में झूमते श्रद्धालु। संवाद
भगवान के बताए मार्ग पर चलकर ही जीवन हो सकता है सफल : भुवनेंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। उपमंडल घुमारवीं के सनौर गांव में श्री कृष्ण भागवत कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा व्यास पंडित भुवनेंद्र शर्मा ने श्रद्धालुओं को कृष्ण के अवतार की कथा सुनाते हुए धर्म और सद्कर्म का संदेश दिया।
उन्होंने बताया कि कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में माता देवकी और पिता वासुदेव के यहां हुआ। देवकी के भाई कंस को आकाशवाणी हुई थी कि उसकी बहन का आठवां पुत्र उसका वध करेगा। इसके बाद कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया और उनके पहले सात संतानों का वध कर दिया। कथा के दौरान पंडित शर्मा ने बताया कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में विष्णु ने कृष्ण के रूप में अवतार लिया। भगवान के जन्म लेते ही कारागार के द्वार स्वयं खुल गए और पहरेदार गहरी नींद में सो गए। वासुदेव नवजात कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना नदी पार करते हुए गोकुल पहुंचे, जहां उन्होंने नंद बाबा और यशोदा के यहां जन्मी कन्या को लेकर कृष्ण को सुरक्षित छोड़ दिया।
उन्होंने बताया कि जब कंस नवजात कन्या को मारने लगा तो वह उसके हाथों से छूटकर आकाश में प्रकट हुई और कहा कि उसका वध करने वाला जन्म ले चुका है। इस प्रसंग का श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रवण किया। कथा के अंत में पंडित भुवनेंद्र शर्मा ने कहा कि भगवान समय-समय पर धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्री कृष्ण के आदर्शों को अपनाते हुए सदैव अच्छे कर्म करने का आह्वान किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। उपमंडल घुमारवीं के सनौर गांव में श्री कृष्ण भागवत कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा व्यास पंडित भुवनेंद्र शर्मा ने श्रद्धालुओं को कृष्ण के अवतार की कथा सुनाते हुए धर्म और सद्कर्म का संदेश दिया।
उन्होंने बताया कि कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में माता देवकी और पिता वासुदेव के यहां हुआ। देवकी के भाई कंस को आकाशवाणी हुई थी कि उसकी बहन का आठवां पुत्र उसका वध करेगा। इसके बाद कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया और उनके पहले सात संतानों का वध कर दिया। कथा के दौरान पंडित शर्मा ने बताया कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में विष्णु ने कृष्ण के रूप में अवतार लिया। भगवान के जन्म लेते ही कारागार के द्वार स्वयं खुल गए और पहरेदार गहरी नींद में सो गए। वासुदेव नवजात कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना नदी पार करते हुए गोकुल पहुंचे, जहां उन्होंने नंद बाबा और यशोदा के यहां जन्मी कन्या को लेकर कृष्ण को सुरक्षित छोड़ दिया।
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उन्होंने बताया कि जब कंस नवजात कन्या को मारने लगा तो वह उसके हाथों से छूटकर आकाश में प्रकट हुई और कहा कि उसका वध करने वाला जन्म ले चुका है। इस प्रसंग का श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रवण किया। कथा के अंत में पंडित भुवनेंद्र शर्मा ने कहा कि भगवान समय-समय पर धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्री कृष्ण के आदर्शों को अपनाते हुए सदैव अच्छे कर्म करने का आह्वान किया।
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