{"_id":"6a4125c31fcd88f95901d6fb","slug":"the-end-of-sin-is-certain-one-inevitably-reaps-the-fruits-of-ones-actions-bilaspur-news-c-92-1-bls1002-162676-2026-06-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: पाप का अंत निश्चित, कर्मों का अवश्य मिलता है फल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: पाप का अंत निश्चित, कर्मों का अवश्य मिलता है फल
Sun, 28 Jun 2026 11:15 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 28 Jun 2026 11:15 PM IST
विज्ञापन
सनौर गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करते हुए श्रद्धालु। स्रोत: जागरूक पाठक।
सनौर गांव में पंडित उपेंद्र ने सुनाया श्रीमद् भागवत कथा में प्रसंग
बिलासपुर। उपमंडल घुमारवीं के सनौर गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे।
कथा व्यास पंडित उपेंद्र शर्मा ने बताया कि पाप कुछ समय के लिए फलता-फूलता अवश्य है, लेकिन उसका अंत निश्चित होता है। मनुष्य को उसके कर्मों का फल अवश्य मिलता है। पंडित जी ने कंस वध की कथा का अत्यंत मार्मिक और सजीव वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मथुरा में कंस का अत्याचार इतना बढ़ गया था कि वह स्वयं को ही भगवान मानने लगा था। जब भगवान श्री कृष्ण की आयु मात्र 11 वर्ष 6 महीने थी, तब उन्होंने मथुरा के कुश्ती अखाड़े में एक नाटकीय मुकाबले में अत्याचारी राजा कंस को हराकर दिव्य आकाशवाणी को पूरा किया। कंस वध से पूर्व भगवान श्री कृष्ण और कंस में काफी नोक-झोंक हुई। कंस ने श्री कृष्ण को मारने के लिए अपने व अन्य राज्यों से चार चोटी के पहलवान बुलाए थे। इस दौरान अखाड़े में हजारों की संख्या में दर्शक मौजूद थे। श्री कृष्ण ने कहा मल्ल युद्ध के नियमों के अनुसार बराबरी के साथ होता है, लेकिन कंस श्री कृष्ण को मारने के लिए यह चाल चल रहा था। भगवान श्री कृष्ण ने पहले मल्लों को मौका दिया, फिर एक-एक करके चारों पहलवानों को पराजित कर दिया। तब कंस ने अपने सैनिकों को बलराम और कृष्ण के टुकड़े-टुकड़े करने का आदेश दे दिया। भगवान कृष्ण ने एक बार फिर कंस को शरण में आने और क्षमा मांगने को कहा, लेकिन जब वह नहीं माना तो कृष्ण ने अपने हाथों से कंस का वध कर पापी का अंत कर दिया। आयोजकों ने बताया कि भागवत कथा का समापन मंगलवार को होगा। इस अवसर पर वेद व्यास पंडित उपेंद्र शर्मा के साथ उनकी टीम के पंडित आचार्य पवन शर्मा, हरीश शर्मा, मुकुल शर्मा, हैप्पी शर्मा भी शामिल रहे।
विज्ञापन
बिलासपुर। उपमंडल घुमारवीं के सनौर गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे।
कथा व्यास पंडित उपेंद्र शर्मा ने बताया कि पाप कुछ समय के लिए फलता-फूलता अवश्य है, लेकिन उसका अंत निश्चित होता है। मनुष्य को उसके कर्मों का फल अवश्य मिलता है। पंडित जी ने कंस वध की कथा का अत्यंत मार्मिक और सजीव वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मथुरा में कंस का अत्याचार इतना बढ़ गया था कि वह स्वयं को ही भगवान मानने लगा था। जब भगवान श्री कृष्ण की आयु मात्र 11 वर्ष 6 महीने थी, तब उन्होंने मथुरा के कुश्ती अखाड़े में एक नाटकीय मुकाबले में अत्याचारी राजा कंस को हराकर दिव्य आकाशवाणी को पूरा किया। कंस वध से पूर्व भगवान श्री कृष्ण और कंस में काफी नोक-झोंक हुई। कंस ने श्री कृष्ण को मारने के लिए अपने व अन्य राज्यों से चार चोटी के पहलवान बुलाए थे। इस दौरान अखाड़े में हजारों की संख्या में दर्शक मौजूद थे। श्री कृष्ण ने कहा मल्ल युद्ध के नियमों के अनुसार बराबरी के साथ होता है, लेकिन कंस श्री कृष्ण को मारने के लिए यह चाल चल रहा था। भगवान श्री कृष्ण ने पहले मल्लों को मौका दिया, फिर एक-एक करके चारों पहलवानों को पराजित कर दिया। तब कंस ने अपने सैनिकों को बलराम और कृष्ण के टुकड़े-टुकड़े करने का आदेश दे दिया। भगवान कृष्ण ने एक बार फिर कंस को शरण में आने और क्षमा मांगने को कहा, लेकिन जब वह नहीं माना तो कृष्ण ने अपने हाथों से कंस का वध कर पापी का अंत कर दिया। आयोजकों ने बताया कि भागवत कथा का समापन मंगलवार को होगा। इस अवसर पर वेद व्यास पंडित उपेंद्र शर्मा के साथ उनकी टीम के पंडित आचार्य पवन शर्मा, हरीश शर्मा, मुकुल शर्मा, हैप्पी शर्मा भी शामिल रहे।