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Bilaspur News: अदालत ने हत्या के प्रयास के चर्चित मामले में दोनों आरोपी किए बरी

Thu, 02 Jul 2026 11:25 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2026 11:25 PM IST
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The court acquitted both the accused in the famous case of attempt to murder.
मेडिकल, फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की कसौटी पर फेल हुई पुलिस की थ्योरी
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कोर्ट ने कहा, संदेह से परे आरोप साबित करने में नाकाम रहा अभियोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर ने थाना भराड़ी में वर्ष 2020 में दर्ज हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं के एक चर्चित मामले में दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। मेडिकल, फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन की कहानी की पुष्टि विश्वसनीय और ठोस साक्ष्यों से नहीं हो सकी।
अभियोजन के अनुसार 17 अगस्त 2020 की शाम गांव दमेहड़ा में पुरानी रंजिश के चलते विवाद हुआ था। आरोप था कि शिकायतकर्ता और उनकी पत्नी को कार से टक्कर मारने के बाद डंडों से हमला किया गया और जान से मारने की धमकियां दी गईं। पुलिस ने जांच के बाद भारतीय दंड संहिता की सात धाराओं के तहत चालान अदालत में पेश किया था। मुकदमे के दौरान अभियोजन ने 17 गवाह पेश किए, लेकिन अदालत ने पाया कि मुख्य प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों में घटना के क्रम, वाहन की स्थिति, चोट लगने के तरीके और मारपीट को लेकर महत्वपूर्ण विरोधाभास हैं। न्यायालय ने कहा कि केवल ऐसे बयानों के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।
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अदालत ने चिकित्सा साक्ष्यों का भी विस्तार से परीक्षण किया। रिकॉर्ड के अनुसार महिला घायल की सभी चोटें साधारण थीं, जबकि पुरुष घायल के अंगूठे की केवल एक चोट गंभीर श्रेणी की पाई गई। डॉक्टर ने जिरह में स्वीकार किया कि कोई भी चोट जानलेवा नहीं थी तथा ऐसी चोटें हाथापाई या किसी कुंद वस्तु पर गिरने से भी संभव हैं। वारदात में इस्तेमाल बताए गए डंडों की फोरेंसिक जांच में भी मानव रक्त के निशान नहीं मिले। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि घटना की मोबाइल वीडियो रिकॉर्डिंग होने के बावजूद उसे अदालत में पेश नहीं किया गया। न्यायालय ने इसे अभियोजन की गंभीर कमी माना।
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अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इसी घटना से संबंधित दूसरे पक्ष की ओर से भी एफआईआर दर्ज थी, जिससे मामला दो पक्षों के विवाद का प्रतीत होता है। सभी साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद अदालत ने कहा कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी करते हुए उनके जमानती और मुचलका बंधपत्र भी समाप्त करने के आदेश दिए।
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