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Bilaspur News: कोर्ट ने देरी माफी याचिका स्वीकार की, अपील दाखिल करने की अनुमति दी

Wed, 22 Apr 2026 11:30 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Wed, 22 Apr 2026 11:30 PM IST
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The court accepted the plea for condonation of delay and allowed the filing of an appeal.
अदालत से
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10 बीघा 13 बिस्वा भूमि की कुर्की के विवाद से जुड़ा मामला

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने आदेश किया पारित

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने एक अहम आदेश पारित करते हुए विलंब क्षमा याचिका को स्वीकार कर लिया है और संबंधित पक्ष को अपील दाखिल करने की अनुमति प्रदान की है। यह मामला गांव मकरी स्थित लगभग 10 बीघा 13 बिस्वा भूमि की कुर्की और उसकी बिक्री के वारंट से जुड़ा है, जो निष्पादन कार्यवाही के तहत पारित आदेशों के आधार पर आगे बढ़ाया गया था। याचिकाकर्ता ने इन आदेशों को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि विवादित भूमि उसकी स्व-अर्जित संपत्ति है, जो नौतोड़ योजना या नजराना के तहत नियमित की गई थी। उनका कहना है कि उन्हें मामले में सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया और आदेश एकतरफा तरीके से पारित किए गए। याचिकाकर्ता ने देरी का कारण यह बताया कि उन्हें आदेशों की जानकारी तब मिली जब राजस्व विभाग द्वारा उनके घर पर बिक्री नोटिस चस्पा किया गया।
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प्रतिवादी पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह संपत्ति पैतृक (कोपार्सनरी) संपत्ति है और इसे हिंदू अविभाजित परिवार कानून के तहत माना जाना चाहिए। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि याचिका केवल बकाया भरण-पोषण राशि से बचने के लिए दायर की गई है। प्रतिवादी ने कहा कि देरी का कोई ठोस दिन-प्रतिदिन स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। अदालत ने कहा कि न्यायहित में सफिशिएंट कॉज की अवधारणा को उदार दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए, विशेषकर तब जब मामला संपत्ति अधिकारों से जुड़ा हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संपत्ति की प्रकृति (स्व-अर्जित या पैतृक) का निर्धारण विस्तृत सुनवाई के बाद ही किया जा सकता है, इसलिए इस स्तर पर कोई अंतिम राय देना उचित नहीं है। सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने विलंब माफी याचिका स्वीकार करते हुए अपील दाखिल करने की अनुमति प्रदान कर दी। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिका को मुख्य केस फाइल के साथ जोड़ा जाए और मामले में आगे की सुनवाई मेरिट के आधार पर की जाएगी।
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