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अध्यापकों ने पुरानी पेंशन नीति के बहाली की उठाई मांग

Sun, 23 Aug 2020 11:39 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 23 Aug 2020 11:39 PM IST
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Teachers raised demand for restoration of old pension policy
बिलासपुर मे जिला प्राथमिक शिक्षक संघ की बैठक मे मौजूद पधादिकारी व सदस्य। - फोटो : BILASPUR
बिलासपुर। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ बिलासपुर की जिला इकाई ने राज्य सरकारों से सभी कर्मचारियों के हितों को सर्वोपरि मानते हुए पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की पूरजोर मांग उठाई है।
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संघ का कहना है कि वर्ष 2003-2004 के बाद सरकारी सेवा में नियुक्त हुए कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने पूरे देश में पुरानी पेंशन योजना को बंद किया है और उसके स्थान पर नई पेंशन योजना (राष्ट्रीय पेंशन योजना) को करीब 17 वर्ष का एक लंबा समय बीत चुका है और इस दौरान यह भी सिद्ध हो चुका है कि जिस कल्याणकारी उद्देश्य को लेकर सरकार ने नई पेंशन योजना को लागू किया गया था, वह पूरी तरह से असफल सिद्ध हुआ है। संघ का कहना है कि इसका प्रमाण आज राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पुरानी पेंशन योजना को पुन: लागू करने को लेकर जारी आंदोलन है।
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जारी संयुक्त बयान जिलाध्यक्ष यशवीर रणौत, महासचिव सुनील ठाकुर, वित्त सचिव मनोज कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरजीत चांदला, उपाध्यक्ष नरेंद्र शर्मा, सुभाष कुमार, मुख्य प्रेस सचिव बाबू राम धीमान, मुख्य सलाहकार सतीश शर्मा, जिला प्रवक्ता कृष्ण ठाकुर, संगठन सचिव रविंद्र कुमार, सहसचिव राजेश राव, घुमारवीं-2 शिक्षा खंड के अध्यक्ष पवन शर्मा, वित्त सचिव सुभाष कुमार, घुमारवीं-1 शिक्षा खंड के अध्यक्ष सुनील शर्मा, महासचिव प्रदीप कुमार, वित्त सचिव विशाल रणौत, सदर खंड के अध्यक्ष डॉ.संजीव चंदेल, महासचिव योगेश मिन्हास, वित्त सचिव राजेश कुमार, झंडूता खंड के अध्यक्ष गणेश दत्त शर्मा, महासचिव नरेश धीमान, स्वारघाट शिक्षा खंड के अध्यक्ष चिरंजी लाल, महासचिव अजय नाईक, वित्त सचिव वीरेंद्र ठाकुर आदि ने राज्य सरकारों से पुरानी पैंशन योजना बहाल करने की पूरजोर मांग उठाई है।
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जिलाअध्यक्ष यशवीर रणौत ने बताया कि 2003 के उपरांत सरकारी सेवा में नियुक्त कुछ कर्मचारियों की सेवानिवृति हो चुकी है और उन्हें नई पेंशन योजना के तहत केवल मात्र हजार-बारह सौ रुपये प्रतिमाह मिल रहे है। जो किसी भी तरह से उनका व उनके परिवारजनों के गुजर बसर के लिए किसी भी रूप में पर्याप्त नहीं है।
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