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प्रतिभा परिचय की मोहताज नहीं, खुद बनाती है पहचान : कटवाल
Wed, 30 Apr 2025 07:24 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 30 Apr 2025 07:24 PM IST
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-बोले, हरिमन शर्मा को पद्मश्री मिलना बिलासपुर के लिए गौरव की बात
-40 से 50 डिग्री में किसी ने भी नहीं की थी कभी सेब उगाने की कल्पना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने कहा कि प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती, वो अपनी पहचान खुद बना लेती है। बिलासपुर जिले के बागवान हरिमन शर्मा इसका जीता-जागता और ताजा उदाहरण हैं। घुमारवीं के छोटे से गांव पन्याला के रहने वाले हरिमन शर्मा ने गर्म आबोहवा वाले इलाकों में सेब की फसल की पैदावार से देश-विदेश में सेब सम्राट के रूप में अलग पहचान बनाई है। उनकी इस असाधारण उपलब्धि के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद्मश्री अवार्ड से नवाजा है।
उन्होंने कहा कि हरिमन शर्मा को मिला यह सम्मान बिलासपुर समेत पूरे हिमाचल के लिए गौरव की बात है। इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं। कहा कि कुछ वर्ष पहले तक यह धारणा थी कि सेब की पैदावार ठंडे इलाकों में ही होती है। बिलासपुर जिला समेत कई अन्य मैदानी इलाके, जहां तापमान 40 से 50 डिग्री तक पहुंच जाता है, वहां सेब उगाने की कल्पना तक नहीं की जाती थी। पन्याला के रहने वाले हरिमन शर्मा ने अपने स्तर पर इस पर शोध किया। अपने बगीचे में प्रयोग भी शुरू किए। 1999 में उन्होंने सेब की एचआरएमएन-99 किस्म विकसित की। अहम बात यह है कि यह सेब की स्कैब रोग प्रतिरोधी किस्म है। शुरुआत में उन्होंने बेर के पेड़ पर सेब के पौधे की ग्राफ्टिंग की थी। उनकी मेहनत रंग लाई। आज एचआरएमएन-99 किस्म के 14 लाख से अधिक पौधे भारत के साथ विदेशों में भी लहलहा रहे हैं। राष्ट्रपति की बगिया में भी ऐसे कई पौधे पेड़ के रूप में विकसित हो चुके हैं।
जीतराम कटवाल ने कहा कि हरिमन शर्मा को आज तक 18 राष्ट्रीय और 10 राज्य स्तरीय पुरस्कारों के साथ ही जिला व उपमंडल स्तर पर भी सम्मान पा चुके हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान एवं परिषद की ओर से उन्हें ‘आईएआरआई फेलो अवार्ड’ भी मिला है। वर्ष 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें सम्मानित किया था। इसी कड़ी में अब राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने उन्हें ‘पदमश्री’ अवार्ड से विभूषित किया है। सम्मान समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी मुक्त कंठ से सराहना की। उन्हें मिला यह सम्मान जहां बिलासपुर समेत पूरे हिमाचल के लिए गौरव की बात है, वहीं इससे कृषि व बागवानी समेत किसी भी क्षेत्र में कुछ नया कर गुजरने के सपने देखने वालों को भी उन्हें साकार करने की प्रेरणा मिलेगी।
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-40 से 50 डिग्री में किसी ने भी नहीं की थी कभी सेब उगाने की कल्पना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने कहा कि प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती, वो अपनी पहचान खुद बना लेती है। बिलासपुर जिले के बागवान हरिमन शर्मा इसका जीता-जागता और ताजा उदाहरण हैं। घुमारवीं के छोटे से गांव पन्याला के रहने वाले हरिमन शर्मा ने गर्म आबोहवा वाले इलाकों में सेब की फसल की पैदावार से देश-विदेश में सेब सम्राट के रूप में अलग पहचान बनाई है। उनकी इस असाधारण उपलब्धि के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद्मश्री अवार्ड से नवाजा है।
उन्होंने कहा कि हरिमन शर्मा को मिला यह सम्मान बिलासपुर समेत पूरे हिमाचल के लिए गौरव की बात है। इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं। कहा कि कुछ वर्ष पहले तक यह धारणा थी कि सेब की पैदावार ठंडे इलाकों में ही होती है। बिलासपुर जिला समेत कई अन्य मैदानी इलाके, जहां तापमान 40 से 50 डिग्री तक पहुंच जाता है, वहां सेब उगाने की कल्पना तक नहीं की जाती थी। पन्याला के रहने वाले हरिमन शर्मा ने अपने स्तर पर इस पर शोध किया। अपने बगीचे में प्रयोग भी शुरू किए। 1999 में उन्होंने सेब की एचआरएमएन-99 किस्म विकसित की। अहम बात यह है कि यह सेब की स्कैब रोग प्रतिरोधी किस्म है। शुरुआत में उन्होंने बेर के पेड़ पर सेब के पौधे की ग्राफ्टिंग की थी। उनकी मेहनत रंग लाई। आज एचआरएमएन-99 किस्म के 14 लाख से अधिक पौधे भारत के साथ विदेशों में भी लहलहा रहे हैं। राष्ट्रपति की बगिया में भी ऐसे कई पौधे पेड़ के रूप में विकसित हो चुके हैं।
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जीतराम कटवाल ने कहा कि हरिमन शर्मा को आज तक 18 राष्ट्रीय और 10 राज्य स्तरीय पुरस्कारों के साथ ही जिला व उपमंडल स्तर पर भी सम्मान पा चुके हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान एवं परिषद की ओर से उन्हें ‘आईएआरआई फेलो अवार्ड’ भी मिला है। वर्ष 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें सम्मानित किया था। इसी कड़ी में अब राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने उन्हें ‘पदमश्री’ अवार्ड से विभूषित किया है। सम्मान समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी मुक्त कंठ से सराहना की। उन्हें मिला यह सम्मान जहां बिलासपुर समेत पूरे हिमाचल के लिए गौरव की बात है, वहीं इससे कृषि व बागवानी समेत किसी भी क्षेत्र में कुछ नया कर गुजरने के सपने देखने वालों को भी उन्हें साकार करने की प्रेरणा मिलेगी।
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