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भानुपल्ली-बैरी रेल लाइन की बकाया राशि का भुगतान करे राज्य सरकार : धर्माणी
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पर्यटन और व्यापार की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है रेल लाइन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भानुपल्ली-बैरी रेल लाइन परियोजना में राज्य सरकार पर जो 1800 करोड़ रुपये बकाया राशि है उसे शीघ्र जारी करे। केंद्र की भाजपा सरकार की ओर से इस काम के लिए राज्य सरकार को याद भी दिलाया गया है, लेकिन राज्य सरकार इस पर कोई उचित कदम नहीं उठा रही है। यह बात प्रदेश भाजपा प्रवक्ता महेंद्र धर्माणी ने कही।
धर्माणी ने कहा कि बिलासपुर से बैरी तक की प्रस्तावित रेलवे लाइन के भू-अधिग्रहण के लिए केंद्र ने सौ फीसदी राशि हिमाचल प्रदेश को खर्च करने के लिए कहा है। इसके लिए अनुमानित राशि देने पर राज्य सरकार ने साफ मना कर दिया है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद इस परियोजना में लगातार देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण के लिए जो केंद्र से पैसा आया था वह राज्य सरकार को ही खर्च करना था। इस कार्य में कोई बाधा न आए, इसलिए केंद्र की एजेंसी ने वह पैसा भी खर्च किया। बावजूद इसके राज्य सरकार पर इसका पैसा बकाया है। राज्य सरकार ने ही भूमि अधिग्रहण का खर्च अपने स्तर पर उठाने के लिए समझौता किया था और अब इस पर ढीला रवैया अपनाया जा रहा है। कहा कि यह रेल लाइन पर्यटन व्यापार और सामरिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रदेश सरकार को चाहिए कि तीव्र गति से इस कार्य को करवाया जाए। साथ ही जो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शेष रह गई है, उसे भी पूरा करे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भानुपल्ली-बैरी रेल लाइन परियोजना में राज्य सरकार पर जो 1800 करोड़ रुपये बकाया राशि है उसे शीघ्र जारी करे। केंद्र की भाजपा सरकार की ओर से इस काम के लिए राज्य सरकार को याद भी दिलाया गया है, लेकिन राज्य सरकार इस पर कोई उचित कदम नहीं उठा रही है। यह बात प्रदेश भाजपा प्रवक्ता महेंद्र धर्माणी ने कही।
धर्माणी ने कहा कि बिलासपुर से बैरी तक की प्रस्तावित रेलवे लाइन के भू-अधिग्रहण के लिए केंद्र ने सौ फीसदी राशि हिमाचल प्रदेश को खर्च करने के लिए कहा है। इसके लिए अनुमानित राशि देने पर राज्य सरकार ने साफ मना कर दिया है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद इस परियोजना में लगातार देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण के लिए जो केंद्र से पैसा आया था वह राज्य सरकार को ही खर्च करना था। इस कार्य में कोई बाधा न आए, इसलिए केंद्र की एजेंसी ने वह पैसा भी खर्च किया। बावजूद इसके राज्य सरकार पर इसका पैसा बकाया है। राज्य सरकार ने ही भूमि अधिग्रहण का खर्च अपने स्तर पर उठाने के लिए समझौता किया था और अब इस पर ढीला रवैया अपनाया जा रहा है। कहा कि यह रेल लाइन पर्यटन व्यापार और सामरिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रदेश सरकार को चाहिए कि तीव्र गति से इस कार्य को करवाया जाए। साथ ही जो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शेष रह गई है, उसे भी पूरा करे।
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