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Bilaspur News: सर, हमारे स्कूल में अंग्रेजी अध्यापक कब आएंगे, मंत्री बोले- जल्द भरा जाएगा पद
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डंगार स्कूल में बच्चों से संवाद करते हुए मंत्री राजेश धर्माणी। संवाद
मंत्री ने डंगार स्कूल में विद्यार्थियों के साथ किया सीधा संवाद
शिक्षा, कॅरिअर, प्रतिस्पर्धा और जीवन मूल्यों पर हुई खुली चर्चा
छात्रा मोनिका ने उठाया अंग्रेजी अध्यापक का मुद्दा
बच्चों के बीच बैठकर मंत्री ने सुनी उनकी समस्याएं
कहा,लक्ष्य,अनुशासन,आत्मविश्वास से बनती है सफलता की राह
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डंगार में वीरवार को उस समय अलग माहौल देखने को मिला जब तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी मंच से भाषण देने के बजाय सीधे विद्यार्थियों के बीच जाकर बैठ गए। बच्चों ने भी खुलकर अपने सवाल रखे और मंत्री ने एक-एक प्रश्न का जवाब दिया। सबसे अहम सवाल तब सामने आया जब 12वीं कक्षा की छात्रा मोनिका ने स्कूल में लंबे समय से अंग्रेजी अध्यापक न होने का मुद्दा उठाया।
मोनिका ने पूछा कि अध्यापक न होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है, ऐसे में स्कूल में अंग्रेजी शिक्षक कब तक मिलेंगे। इस पर मंत्री धर्माणी ने कहा कि सरकार स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता को संतुलित करने के लिए काम कर रही है और डंगार स्कूल में जल्द ही अंग्रेजी अध्यापक का पद भर दिया जाएगा। संवाद कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने केवल शिक्षा से जुड़े ही नहीं बल्कि जीवन, कॅरिअर, प्रतिस्पर्धा और सफलता के मंत्र को लेकर भी सवाल किए। छात्रा कनिष्का ने प्रतिस्पर्धा के दौर में आगे बढ़ने का मूल मंत्र पूछा, जबकि रितिका ने मंत्री से उनके जीवन के ऐसे अनुभव के बारे में जानना चाहा जिसने उन्हें सकारात्मक सीख दी हो। मंत्री धर्माणी ने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए बड़ा लक्ष्य तय करना जरूरी है। लक्ष्य के साथ आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर मेहनत जुड़ जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ें। कहा कि आज का युवा केवल नौकरी पाने वाला नहीं बल्कि समाज और प्रदेश का भविष्य गढ़ने वाला वर्ग है। इसलिए विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए। नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता जैसे अभियानों में भागीदारी निभानी चाहिए। धर्माणी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार हासिल करना नहीं बल्कि एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक तैयार करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करने तथा नई तकनीकों, एआई और डिजिटल दुनिया की संभावनाओं को समझने की सलाह दी। विद्यालय पहुंचने पर प्रधानाचार्य परमजीत, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने मंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षक मौजूद रहे। पूरे संवाद के दौरान बच्चों ने बेझिझक सवाल पूछे और मंत्री ने भी बिना औपचारिकता के उनके बीच बैठकर चर्चा की, जिससे कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए यादगार बन गया।
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शिक्षा, कॅरिअर, प्रतिस्पर्धा और जीवन मूल्यों पर हुई खुली चर्चा
छात्रा मोनिका ने उठाया अंग्रेजी अध्यापक का मुद्दा
बच्चों के बीच बैठकर मंत्री ने सुनी उनकी समस्याएं
कहा,लक्ष्य,अनुशासन,आत्मविश्वास से बनती है सफलता की राह
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डंगार में वीरवार को उस समय अलग माहौल देखने को मिला जब तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी मंच से भाषण देने के बजाय सीधे विद्यार्थियों के बीच जाकर बैठ गए। बच्चों ने भी खुलकर अपने सवाल रखे और मंत्री ने एक-एक प्रश्न का जवाब दिया। सबसे अहम सवाल तब सामने आया जब 12वीं कक्षा की छात्रा मोनिका ने स्कूल में लंबे समय से अंग्रेजी अध्यापक न होने का मुद्दा उठाया।
मोनिका ने पूछा कि अध्यापक न होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है, ऐसे में स्कूल में अंग्रेजी शिक्षक कब तक मिलेंगे। इस पर मंत्री धर्माणी ने कहा कि सरकार स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता को संतुलित करने के लिए काम कर रही है और डंगार स्कूल में जल्द ही अंग्रेजी अध्यापक का पद भर दिया जाएगा। संवाद कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने केवल शिक्षा से जुड़े ही नहीं बल्कि जीवन, कॅरिअर, प्रतिस्पर्धा और सफलता के मंत्र को लेकर भी सवाल किए। छात्रा कनिष्का ने प्रतिस्पर्धा के दौर में आगे बढ़ने का मूल मंत्र पूछा, जबकि रितिका ने मंत्री से उनके जीवन के ऐसे अनुभव के बारे में जानना चाहा जिसने उन्हें सकारात्मक सीख दी हो। मंत्री धर्माणी ने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए बड़ा लक्ष्य तय करना जरूरी है। लक्ष्य के साथ आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर मेहनत जुड़ जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ें। कहा कि आज का युवा केवल नौकरी पाने वाला नहीं बल्कि समाज और प्रदेश का भविष्य गढ़ने वाला वर्ग है। इसलिए विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए। नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता जैसे अभियानों में भागीदारी निभानी चाहिए। धर्माणी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार हासिल करना नहीं बल्कि एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक तैयार करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करने तथा नई तकनीकों, एआई और डिजिटल दुनिया की संभावनाओं को समझने की सलाह दी। विद्यालय पहुंचने पर प्रधानाचार्य परमजीत, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने मंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षक मौजूद रहे। पूरे संवाद के दौरान बच्चों ने बेझिझक सवाल पूछे और मंत्री ने भी बिना औपचारिकता के उनके बीच बैठकर चर्चा की, जिससे कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए यादगार बन गया।
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