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रेशम कीट, मछली पालन को भी मिलेगा न्यूनतम समर्थन मूल्य : धर्माणी
Thu, 30 Oct 2025 11:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 30 Oct 2025 11:51 PM IST
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तकनीकी शिक्षा मंत्री बोले, प्रदेश सरकार अगले बजट में कर सकती है प्रावधान
किसानों की आमदनी बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में बड़ा कदम
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। प्रदेश सरकार आगामी वित्त वर्ष के बजट में रेशम कीट पालन और मछली पालन के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का प्रावधान कर सकती है। यह जानकारी तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने मंगलवार को हम्बोट पंचायत में किसान जागरूकता शिविर में दी।
धर्माणी ने कहा कि हिमाचल सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए लगातार प्रयासरत है। वर्तमान में सरकार प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है। मक्का 40 रुपये प्रति किलो, गेहूं 60 रुपये प्रति किलो, कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलो और पांगी क्षेत्र की जौ के लिए 60 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि इसी तर्ज पर अब रेशम कीट पालन और मत्स्य पालन को भी समर्थन मूल्य के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है।
प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी गांवों में निवास करती है और कृषि ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। इसलिए राज्य सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं इस तरह तैयार की जा रही हैं, जिनसे गांवों में आर्थिक प्रवाह बढ़े और किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले। किसान जागरूकता शिविरों का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीकों, जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और कीट नियंत्रण के बारे में प्रशिक्षित करना है। इन शिविरों में कृषि विशेषज्ञ किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, बीज चयन और उन्नत कृषि पद्धतियों के बारे में मार्गदर्शन देते हैं। शिविर में 200 से अधिक किसानों को उन्नत किस्म के बीज भी दिए गए। इस अवसर पर उपनिदेशक कृषि प्रेम ठाकुर, जिला कृषि अधिकारी नरेश कुमार, ग्राम पंचायत प्रधान नंदलाल सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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इनसेट
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सुधार
मंत्री ने कहा कि सरकार पशुपालन क्षेत्र को भी मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। बिलासपुर में अब तक 15 नई डेयरी कोऑपरेटिव समितियां गठित की जा चुकी हैं। पशुपालक अब किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत दो लाख रुपये तक का ऋण बिना किसी गारंटी के प्राप्त कर सकते हैं। इससे डेयरी क्षेत्र में निवेश और विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।
इनसेट
किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार
कार्यक्रम में एपीएमसी अध्यक्ष सतपाल वर्धन ने कहा कि एपीएमसी किसानों को उचित बाजार उपलब्ध करवाने के लिए काम कर रही है। किसानों को अन्य राज्यों के सफल कृषि मॉडल दिखाने के लिए एक्सपोजर विजिट कराए जाएंगे, जिनका पूरा खर्च एपीएमसी उठाएगी।
इनसेट
योजनाओं की दी जानकारी
कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन, उद्यान और बैंकिंग संस्थानों के अधिकारियों ने किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं एचपी शिवा परियोजना, बकरी पालन योजना, प्राकृतिक खेती योजना, मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना, मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर और मजदूर जीवन सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री कृषि उत्पादन संरक्षण योजना, मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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किसानों की आमदनी बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में बड़ा कदम
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। प्रदेश सरकार आगामी वित्त वर्ष के बजट में रेशम कीट पालन और मछली पालन के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का प्रावधान कर सकती है। यह जानकारी तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने मंगलवार को हम्बोट पंचायत में किसान जागरूकता शिविर में दी।
धर्माणी ने कहा कि हिमाचल सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए लगातार प्रयासरत है। वर्तमान में सरकार प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है। मक्का 40 रुपये प्रति किलो, गेहूं 60 रुपये प्रति किलो, कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलो और पांगी क्षेत्र की जौ के लिए 60 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि इसी तर्ज पर अब रेशम कीट पालन और मत्स्य पालन को भी समर्थन मूल्य के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है।
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प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी गांवों में निवास करती है और कृषि ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। इसलिए राज्य सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं इस तरह तैयार की जा रही हैं, जिनसे गांवों में आर्थिक प्रवाह बढ़े और किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले। किसान जागरूकता शिविरों का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीकों, जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और कीट नियंत्रण के बारे में प्रशिक्षित करना है। इन शिविरों में कृषि विशेषज्ञ किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, बीज चयन और उन्नत कृषि पद्धतियों के बारे में मार्गदर्शन देते हैं। शिविर में 200 से अधिक किसानों को उन्नत किस्म के बीज भी दिए गए। इस अवसर पर उपनिदेशक कृषि प्रेम ठाकुर, जिला कृषि अधिकारी नरेश कुमार, ग्राम पंचायत प्रधान नंदलाल सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सुधार
मंत्री ने कहा कि सरकार पशुपालन क्षेत्र को भी मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। बिलासपुर में अब तक 15 नई डेयरी कोऑपरेटिव समितियां गठित की जा चुकी हैं। पशुपालक अब किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत दो लाख रुपये तक का ऋण बिना किसी गारंटी के प्राप्त कर सकते हैं। इससे डेयरी क्षेत्र में निवेश और विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।
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किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार
कार्यक्रम में एपीएमसी अध्यक्ष सतपाल वर्धन ने कहा कि एपीएमसी किसानों को उचित बाजार उपलब्ध करवाने के लिए काम कर रही है। किसानों को अन्य राज्यों के सफल कृषि मॉडल दिखाने के लिए एक्सपोजर विजिट कराए जाएंगे, जिनका पूरा खर्च एपीएमसी उठाएगी।
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योजनाओं की दी जानकारी
कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन, उद्यान और बैंकिंग संस्थानों के अधिकारियों ने किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं एचपी शिवा परियोजना, बकरी पालन योजना, प्राकृतिक खेती योजना, मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना, मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर और मजदूर जीवन सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री कृषि उत्पादन संरक्षण योजना, मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी।