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Bilaspur News: सिलाई अध्यापिकाओं ने उठाई नियमितीकरण की मांग

Fri, 10 Jul 2026 12:26 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2026 12:26 AM IST
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Sewing instructors raise demand for regularization.
सीएम को भेजा ज्ञापन-कहा, 30 वर्ष की सेवाओं के बाद भी नहीं किया गया नियमित
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संवाद न्यूज एजेंसी

घुमारवीं (बिलासपुर)। सिलाई अध्यापिका संघ घुमारवीं ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजकर वर्ष 1997 से अनुबंध आधार पर कार्यरत सिलाई अध्यापकों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग उठाई है। ज्ञापन में कहा गया है कि लगभग 30 वर्षों से लगातार सेवाएं देने के बावजूद आज तक उन्हें नियमित नहीं किया गया, जिससे उनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं।

ज्ञापन में बताया गया है कि वर्ष 1997 में विधिवत साक्षात्कार एवं चयन प्रक्रिया के माध्यम से सिलाई अध्यापिकाओं की नियुक्ति की गई थी। नियुक्ति के बाद उन्हें ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से विभिन्न पंचायतों में सिलाई प्रशिक्षण केंद्रों में सेवाएं देने के लिए तैनात किया गया। कई वर्षों तक उनका मानदेय विकास खंड कार्यालयों के माध्यम से दिया जाता रहा। बाद में उन्हें पंचायती राज विभाग के अधीन कर दिया गया, लेकिन इस संबंध में उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी या आदेश नहीं दिए गए। सिलाई अध्यापिकाओं ने ज्ञापन में कहा है कि अब उन्हें यह कहकर नियमित करने से इन्कार किया जा रहा है कि वे जिला परिषद के अधीन आते हैं, इसलिए उनका नियमितीकरण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि विभागीय स्तर पर उनका स्थानांतरण या प्रशासनिक नियंत्रण बदला गया था तो इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। विभागीय निर्णयों का खामियाजा कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए।
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ज्ञापन में कहा गया है कि तीन दशक तक ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं एवं युवतियों को सिलाई प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सिलाई अध्यापक आज भी अस्थायी व्यवस्था में कार्य करने को मजबूर हैं। सरकार ने वर्षों तक उनकी सेवाएं लीं, लेकिन उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई। सिलाई अध्यापिकाओं ने यह भी कहा कि सबसे दुखद स्थिति यह है कि लगभग 30 वर्षों तक सेवाएं देने के बाद जब कोई सिलाई अध्यापक सेवानिवृत्त होता है तो उसे खाली हाथ घर लौटना पड़ता है। उसे न तो पेंशन का लाभ मिलता है और न ही ऐसा कोई आर्थिक सुरक्षा प्रावधान है, जिससे वह अपने परिवार का सहारा बन सके। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि कम से कम ऐसी नीति बनाई जाए, जिससे सेवानिवृत्ति के समय उन्हें कोई न्यूनतम आर्थिक सहायता या न्यूनतम पेंशन योजना का लाभ मिल सके, ताकि जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्हें आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
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