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Bilaspur News: निजी जमीन के विवाद में एसडीएम का आदेश रद्द
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अदालत ने कहा- सार्वजनिक उपद्रव साबित नहीं, मामला दो निजी भूमि मालिकों के बीच विवाद का
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने गंदे पानी की निकासी और रास्ते को लेकर निजी भूमि मालिकों के बीच चल रहे विवाद में एसडीएम सदर का 18 अप्रैल 2026 का आदेश रद्द कर दिया है। अदालत ने शिकायत और उससे जुड़ी कार्रवाई भी खारिज कर दी। एसडीएम ने एक पक्ष को अपनी जमीन में चार बाई चार फीट या तकनीकी रूप से संभव आकार का सोक पिट बनाने तथा दूसरे पक्ष को निर्माण सामग्री ले जाने के लिए रास्ता उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे। ग्राम पंचायत बामटा और बीडीओ सदर को तकनीकी सहायता व अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी कार्रवाई में पहले स्पष्ट सशर्त आदेश जारी होना चाहिए। आपत्ति होने पर साक्ष्य लेकर मामले की जांच की जानी चाहिए। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसे सशर्त आदेश का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। बीडीओ की मौके की रिपोर्ट को साक्ष्य के रूप में लिया गया, लेकिन रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारी के बयान और जिरह का अवसर नहीं मिला। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक उपद्रव के लिए जनता या समुदाय के किसी वर्ग का प्रभावित होना जरूरी है। यहां किसी सार्वजनिक रास्ते, नाली या स्थान के प्रभावित होने का प्रमाण नहीं मिला। मामला निजी भूमि, सीमा, रास्ते और पानी की निकासी से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि स्वामित्व और रास्ते के अधिकार जैसे विवाद राजस्व प्राधिकारी या सिविल अदालत में उठाए जा सकते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने गंदे पानी की निकासी और रास्ते को लेकर निजी भूमि मालिकों के बीच चल रहे विवाद में एसडीएम सदर का 18 अप्रैल 2026 का आदेश रद्द कर दिया है। अदालत ने शिकायत और उससे जुड़ी कार्रवाई भी खारिज कर दी। एसडीएम ने एक पक्ष को अपनी जमीन में चार बाई चार फीट या तकनीकी रूप से संभव आकार का सोक पिट बनाने तथा दूसरे पक्ष को निर्माण सामग्री ले जाने के लिए रास्ता उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे। ग्राम पंचायत बामटा और बीडीओ सदर को तकनीकी सहायता व अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी कार्रवाई में पहले स्पष्ट सशर्त आदेश जारी होना चाहिए। आपत्ति होने पर साक्ष्य लेकर मामले की जांच की जानी चाहिए। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसे सशर्त आदेश का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। बीडीओ की मौके की रिपोर्ट को साक्ष्य के रूप में लिया गया, लेकिन रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारी के बयान और जिरह का अवसर नहीं मिला। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक उपद्रव के लिए जनता या समुदाय के किसी वर्ग का प्रभावित होना जरूरी है। यहां किसी सार्वजनिक रास्ते, नाली या स्थान के प्रभावित होने का प्रमाण नहीं मिला। मामला निजी भूमि, सीमा, रास्ते और पानी की निकासी से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि स्वामित्व और रास्ते के अधिकार जैसे विवाद राजस्व प्राधिकारी या सिविल अदालत में उठाए जा सकते हैं।