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Bilaspur News: मिशन दृष्टि की होगी कड़ी निगरानी, स्क्रीनिंग से उपचार का रखा जाएगा पूरा रिकॉर्ड
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जिला स्तरीय समिति गठित, एक साल के अध्ययन से सामने आएगी जिले में बच्चों की दृष्टि संबंधी समस्याओं की तस्वीर
प्राथमिक स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में होगी 3 से 8 साल के बच्चों की स्क्रीनिंग
समस्या मिलने पर चश्मे से लेकर चिकित्सकीय उपचार तक की होगी व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की आंखों की सेहत को लेकर शुरू किए गए मिशन दृष्टि बिलासपुर को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने जिला स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति केवल बच्चों की स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्क्रीनिंग, रेफरल, उपचार और फॉलो-अप की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि मिशन का उद्देश्य किसी बच्चे में दृष्टि संबंधी समस्या की पहचान कर उसे उपचार तक पहुंचाना है, ताकि कोई भी चिह्नित बच्चा इलाज से वंचित न रहे।
मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास तथा कल्याण विभाग के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और संबंधित विभागीय कर्मचारियों के सहयोग से 3 से 8 वर्ष तक के अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच बनाई जाएगी। जिले के प्राथमिक स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की दृष्टि की प्रारंभिक जांच की जाएगी। उपायुक्त ने बताया कि मिशन का विधिवत शुभारंभ 1 सितंबर से हो चुका है। स्क्रीनिंग के दौरान जिन बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या सामने आएगी, उन्हें आवश्यकता के अनुसार संबंधित स्वास्थ्य संस्थान में आगे की जांच के लिए रेफर किया जाएगा। बच्चों को जरूरत के मुताबिक चश्मा, चिकित्सकीय उपचार या अन्य नेत्र सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। मिशन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी स्क्रीनिंग के बाद शुरू होगी। किसी बच्चे में समस्या चिह्नित होने के बाद उसे केवल रेफर कर जिम्मेदारी समाप्त नहीं की जाएगी, बल्कि उपचार मिलने तक उसका फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि रेफर किए गए बच्चे ने विशेषज्ञ से जांच करवाई या नहीं और उसे आवश्यक उपचार मिला या नहीं। मिशन दृष्टि के तहत बच्चों की दृष्टि संबंधी समस्याओं पर एक वर्ष का अध्ययन भी किया जाएगा। स्क्रीनिंग के दौरान एकत्र आंकड़ों के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि जिले में बच्चों में किस प्रकार की दृष्टि संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं और उनकी स्थिति क्या है। अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में बच्चों के नेत्र स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए साक्ष्य आधारित कार्ययोजना तैयार की जाएगी। मिशन के तहत बच्चों के साथ अभिभावकों को भी आंखों की उचित देखभाल के प्रति जागरूक किया जाएगा। बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने, आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा देने और आंखों से जुड़ी समस्या के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेने के बारे में जानकारी दी जाएगी। जिला स्तरीय समिति की अध्यक्षता उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, रेडक्रॉस सोसायटी, जिला शाखा बिलासपुर करेंगे। अतिरिक्त उपायुक्त को उपाध्यक्ष और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति में जिला कल्याण अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास, उच्च एवं प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक, डाइट के प्रधानाचार्य-सह-परियोजना निदेशक, भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी के प्रतिनिधि और क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर और एम्स बिलासपुर के नेत्र विशेषज्ञों को सदस्य बनाया गया है। समिति मिशन की प्रगति की नियमित समीक्षा करेगी। स्क्रीनिंग से लेकर रेफरल, उपचार, फॉलो-अप और जागरूकता गतिविधियों का आकलन कर कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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प्राथमिक स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में होगी 3 से 8 साल के बच्चों की स्क्रीनिंग
समस्या मिलने पर चश्मे से लेकर चिकित्सकीय उपचार तक की होगी व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की आंखों की सेहत को लेकर शुरू किए गए मिशन दृष्टि बिलासपुर को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने जिला स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति केवल बच्चों की स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्क्रीनिंग, रेफरल, उपचार और फॉलो-अप की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि मिशन का उद्देश्य किसी बच्चे में दृष्टि संबंधी समस्या की पहचान कर उसे उपचार तक पहुंचाना है, ताकि कोई भी चिह्नित बच्चा इलाज से वंचित न रहे।
मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास तथा कल्याण विभाग के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और संबंधित विभागीय कर्मचारियों के सहयोग से 3 से 8 वर्ष तक के अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच बनाई जाएगी। जिले के प्राथमिक स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की दृष्टि की प्रारंभिक जांच की जाएगी। उपायुक्त ने बताया कि मिशन का विधिवत शुभारंभ 1 सितंबर से हो चुका है। स्क्रीनिंग के दौरान जिन बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या सामने आएगी, उन्हें आवश्यकता के अनुसार संबंधित स्वास्थ्य संस्थान में आगे की जांच के लिए रेफर किया जाएगा। बच्चों को जरूरत के मुताबिक चश्मा, चिकित्सकीय उपचार या अन्य नेत्र सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। मिशन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी स्क्रीनिंग के बाद शुरू होगी। किसी बच्चे में समस्या चिह्नित होने के बाद उसे केवल रेफर कर जिम्मेदारी समाप्त नहीं की जाएगी, बल्कि उपचार मिलने तक उसका फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि रेफर किए गए बच्चे ने विशेषज्ञ से जांच करवाई या नहीं और उसे आवश्यक उपचार मिला या नहीं। मिशन दृष्टि के तहत बच्चों की दृष्टि संबंधी समस्याओं पर एक वर्ष का अध्ययन भी किया जाएगा। स्क्रीनिंग के दौरान एकत्र आंकड़ों के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि जिले में बच्चों में किस प्रकार की दृष्टि संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं और उनकी स्थिति क्या है। अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में बच्चों के नेत्र स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए साक्ष्य आधारित कार्ययोजना तैयार की जाएगी। मिशन के तहत बच्चों के साथ अभिभावकों को भी आंखों की उचित देखभाल के प्रति जागरूक किया जाएगा। बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने, आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा देने और आंखों से जुड़ी समस्या के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेने के बारे में जानकारी दी जाएगी। जिला स्तरीय समिति की अध्यक्षता उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, रेडक्रॉस सोसायटी, जिला शाखा बिलासपुर करेंगे। अतिरिक्त उपायुक्त को उपाध्यक्ष और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति में जिला कल्याण अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास, उच्च एवं प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक, डाइट के प्रधानाचार्य-सह-परियोजना निदेशक, भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी के प्रतिनिधि और क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर और एम्स बिलासपुर के नेत्र विशेषज्ञों को सदस्य बनाया गया है। समिति मिशन की प्रगति की नियमित समीक्षा करेगी। स्क्रीनिंग से लेकर रेफरल, उपचार, फॉलो-अप और जागरूकता गतिविधियों का आकलन कर कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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