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Bilaspur News: वैज्ञानिक तरीके से बताया रेशम कीट पालन
Mon, 28 Jul 2025 11:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 28 Jul 2025 11:58 PM IST
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घुमारवीं में आयोजित किसान क्षेत्र दिवस कार्यक्रम में मौजूद रेशम कीट पालक। संवाद
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घुमारवीं में आयोजित हुआ किसान क्षेत्र दिवस कार्यक्रम
रेशम कीट पालन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को किया प्रेरित
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। रेशम प्रसार अनुसंधान केंद्र व केंद्रीय रेशम बोर्ड घुमारवीं की ओर से वार्षिक कार्य योजना 2025-26 के तहत घुमारवीं में एक दिवसीय किसान क्षेत्र दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य रेशम कीट पालन को बढ़ावा देना और किसानों को आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ उप निदेशक रेशम शाखा हिमाचल प्रदेश बलदेव चौहान ने किया। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि शहतूत की खेती और सिल्कवर्म पालन ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का एक सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। उन्होंने रेशम उत्पादन में गुणवत्तापूर्ण कीटाणुनाशकों के प्रयोग और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने पर बल दिया। किसानों को शहतूत की खेती, कीट पालन और रोग नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों द्वारा शहतूत की बागवानी, पालन गृह की सफाई, उपकरणों की स्वच्छता, कीटाणु नाशकों जैसे विजेता, चूना आदि के प्रयोग की विधियों पर व्याख्यान दिए गए। इसके अतिरिक्त कीटाणु-नाशक तकनीकों के प्रभावी प्रदर्शन भी किसानों के समक्ष प्रस्तुत किए गए, जिससे वे व्यावहारिक रूप से इन विधियों को समझ सके। वैज्ञानिक आरईसी रीता सिंह, विजय चौधरी और प्रवीण ने रेशम किसानों के लिए वर्तमान में लागू विभिन्न योजनाओं, अनुदान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी साझा की। किसानों को बताया गया कि किस प्रकार वे विभागीय योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।
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रेशम कीट पालन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को किया प्रेरित
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। रेशम प्रसार अनुसंधान केंद्र व केंद्रीय रेशम बोर्ड घुमारवीं की ओर से वार्षिक कार्य योजना 2025-26 के तहत घुमारवीं में एक दिवसीय किसान क्षेत्र दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य रेशम कीट पालन को बढ़ावा देना और किसानों को आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ उप निदेशक रेशम शाखा हिमाचल प्रदेश बलदेव चौहान ने किया। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि शहतूत की खेती और सिल्कवर्म पालन ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का एक सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। उन्होंने रेशम उत्पादन में गुणवत्तापूर्ण कीटाणुनाशकों के प्रयोग और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने पर बल दिया। किसानों को शहतूत की खेती, कीट पालन और रोग नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों द्वारा शहतूत की बागवानी, पालन गृह की सफाई, उपकरणों की स्वच्छता, कीटाणु नाशकों जैसे विजेता, चूना आदि के प्रयोग की विधियों पर व्याख्यान दिए गए। इसके अतिरिक्त कीटाणु-नाशक तकनीकों के प्रभावी प्रदर्शन भी किसानों के समक्ष प्रस्तुत किए गए, जिससे वे व्यावहारिक रूप से इन विधियों को समझ सके। वैज्ञानिक आरईसी रीता सिंह, विजय चौधरी और प्रवीण ने रेशम किसानों के लिए वर्तमान में लागू विभिन्न योजनाओं, अनुदान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी साझा की। किसानों को बताया गया कि किस प्रकार वे विभागीय योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।
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