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Bilaspur News: ऑफ सीजन में मछुआरों को सहारा दे रही सम्मान निधि
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बिलासपुर के 1500 मछुआरा परिवारों को मिले 52 लाख से अधिक, प्रतिबंधित अवधि में मिलती है 3500 रुपये की मदद
15 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर रहता है प्रतिबंध
रॉयल्टी दर 15 फीसदी से घटाकर एक फीसदी करने पर भी जताया आभार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंद सागर झील समेत जिले के जलाशयों में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान मछुआरा परिवारों को अब आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार की मछुआरा सम्मान निधि योजना के तहत प्रतिबंधित अवधि में पात्र परिवारों को 3500 रुपये की सहायता दी जा रही है। जिले में करीब 1500 मछुआरा परिवारों को 52 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक मदद मिली है। मछली के प्रजनन और संरक्षण के लिए हर साल 15 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहता है। इस दौरान मछुआरों की आय पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। सम्मान निधि मिलने से परिवारों को दो माह के इस ऑफ सीजन में रोजमर्रा के खर्च चलाने में मदद मिल रही है। मछुआरों ने सरकार के इस फैसले को राहत भरा बताया है। झंडूता विकास खंड की दाड़ी-भाड़ी मत्स्य सोसायटी से जुड़े गुरदास ने बताया कि वह करीब 40 से 45 वर्षों से मछली पकड़ने का काम कर रहे हैं। प्रतिबंधित अवधि में दो माह काम बंद रहने से परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती थी। उन्होंने कहा कि सम्मान निधि से इस अवधि में परिवार की चिंता कम हुई है। उन्होंने मछली की रॉयल्टी दर 15 फीसदी से घटाकर एक फीसदी किए जाने को भी मछुआरों के हित में बड़ा फैसला बताया। स्वारघाट विकास खंड की ज्योर मत्स्य सोसायटी के चेतराम ने बताया कि वह वर्ष 1978 से गोबिंद सागर झील में मछली पकड़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सम्मान निधि और रॉयल्टी में कटौती से मछुआरा परिवारों को बड़ी राहत मिली है। बलघाड़ मछुआरा सोसायटी के सदस्य देशराज और बाबूराम राणा ने कहा कि दो माह के प्रतिबंध के दौरान परिवारों की आय बंद हो जाती है। ऐसे में मिलने वाली 3500 रुपये की सहायता परिवार के भरण-पोषण में मददगार साबित हो रही है। सदर विकास खंड के क्यारियां गांव निवासी कृष्ण लाल ने भी योजना को मछुआरों के हित में सराहनीय कदम बताया।
संरक्षण के साथ आजीविका सुरक्षित करना भी जरूरी : धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि मछली पकड़ने पर प्रतिबंध मत्स्य संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए जरूरी है। साथ ही प्रतिबंधित अवधि में प्रभावित परिवारों की आजीविका सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। मछुआरा सम्मान निधि योजना से मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के साथ मछुआरा परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। उन्होंने कहा कि सम्मान निधि के साथ रॉयल्टी दर में कटौती से भी मछुआरा समुदाय को राहत मिली है।
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15 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर रहता है प्रतिबंध
रॉयल्टी दर 15 फीसदी से घटाकर एक फीसदी करने पर भी जताया आभार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंद सागर झील समेत जिले के जलाशयों में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान मछुआरा परिवारों को अब आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार की मछुआरा सम्मान निधि योजना के तहत प्रतिबंधित अवधि में पात्र परिवारों को 3500 रुपये की सहायता दी जा रही है। जिले में करीब 1500 मछुआरा परिवारों को 52 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक मदद मिली है। मछली के प्रजनन और संरक्षण के लिए हर साल 15 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहता है। इस दौरान मछुआरों की आय पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। सम्मान निधि मिलने से परिवारों को दो माह के इस ऑफ सीजन में रोजमर्रा के खर्च चलाने में मदद मिल रही है। मछुआरों ने सरकार के इस फैसले को राहत भरा बताया है। झंडूता विकास खंड की दाड़ी-भाड़ी मत्स्य सोसायटी से जुड़े गुरदास ने बताया कि वह करीब 40 से 45 वर्षों से मछली पकड़ने का काम कर रहे हैं। प्रतिबंधित अवधि में दो माह काम बंद रहने से परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती थी। उन्होंने कहा कि सम्मान निधि से इस अवधि में परिवार की चिंता कम हुई है। उन्होंने मछली की रॉयल्टी दर 15 फीसदी से घटाकर एक फीसदी किए जाने को भी मछुआरों के हित में बड़ा फैसला बताया। स्वारघाट विकास खंड की ज्योर मत्स्य सोसायटी के चेतराम ने बताया कि वह वर्ष 1978 से गोबिंद सागर झील में मछली पकड़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सम्मान निधि और रॉयल्टी में कटौती से मछुआरा परिवारों को बड़ी राहत मिली है। बलघाड़ मछुआरा सोसायटी के सदस्य देशराज और बाबूराम राणा ने कहा कि दो माह के प्रतिबंध के दौरान परिवारों की आय बंद हो जाती है। ऐसे में मिलने वाली 3500 रुपये की सहायता परिवार के भरण-पोषण में मददगार साबित हो रही है। सदर विकास खंड के क्यारियां गांव निवासी कृष्ण लाल ने भी योजना को मछुआरों के हित में सराहनीय कदम बताया।
संरक्षण के साथ आजीविका सुरक्षित करना भी जरूरी : धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि मछली पकड़ने पर प्रतिबंध मत्स्य संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए जरूरी है। साथ ही प्रतिबंधित अवधि में प्रभावित परिवारों की आजीविका सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। मछुआरा सम्मान निधि योजना से मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के साथ मछुआरा परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। उन्होंने कहा कि सम्मान निधि के साथ रॉयल्टी दर में कटौती से भी मछुआरा समुदाय को राहत मिली है।
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