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शिव महिमा का गुणगान करने पर मिलता है मोक्ष : ज्ञान चंद
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। शिवमहिमा का गुणगान करने पर ही व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है। उक्त बात कथा व्यास ज्ञानचंद शास्त्री ने ग्राम पंचायत बड़गांव के री गांव में चल रही कथा में कही।
उन्होंने सोमवार को शिव विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा कि पर्वतराज हिमालय की घोर तपस्या के बाद माता जगदंबा प्रकट हुईं और उन्हें बेटी के रूप में उनके घर में अवतरित होने का वरदान दिया। इसके बाद माता पार्वती हिमालय के घर अवतरित हुईं। बेटी के बड़ी होने पर पर्वतराज को उसकी शादी की चिंता सताने लगी। कहा कि माता पार्वती बचपन से ही बाबा भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं। एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पधारे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया। माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए हजारों वर्ष तपस्या की थी। तब जाकर पार्वती ने भोलेनाथ को पाया था। उन्होंने कहा कि इस नश्वर संसार में ब्रह्मा द्वारा उत्पत्ति विष्णु भगवान द्वारा पालन पोषण और भोलेनाथ द्वारा इंसान को मरने के बाद मोक्ष प्राप्त होता है। भगवान भोलेनाथ की महिमा खासकर शिव विवाह की गाथा गाना बहुत मुश्किल है। शिव भोलेनाथ की गाथा और विवाह का प्रसंग सुनना चाहिए। देवी-देवताओं ने भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के पवित्र बंधन विवाह में अपनी सहभागिता दी थी। कथा के आयोजक शमशेर सिंह ने बताया कि 24 मार्च को हवन यज्ञ व भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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बरठीं (बिलासपुर)। शिवमहिमा का गुणगान करने पर ही व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है। उक्त बात कथा व्यास ज्ञानचंद शास्त्री ने ग्राम पंचायत बड़गांव के री गांव में चल रही कथा में कही।
उन्होंने सोमवार को शिव विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा कि पर्वतराज हिमालय की घोर तपस्या के बाद माता जगदंबा प्रकट हुईं और उन्हें बेटी के रूप में उनके घर में अवतरित होने का वरदान दिया। इसके बाद माता पार्वती हिमालय के घर अवतरित हुईं। बेटी के बड़ी होने पर पर्वतराज को उसकी शादी की चिंता सताने लगी। कहा कि माता पार्वती बचपन से ही बाबा भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं। एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पधारे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया। माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए हजारों वर्ष तपस्या की थी। तब जाकर पार्वती ने भोलेनाथ को पाया था। उन्होंने कहा कि इस नश्वर संसार में ब्रह्मा द्वारा उत्पत्ति विष्णु भगवान द्वारा पालन पोषण और भोलेनाथ द्वारा इंसान को मरने के बाद मोक्ष प्राप्त होता है। भगवान भोलेनाथ की महिमा खासकर शिव विवाह की गाथा गाना बहुत मुश्किल है। शिव भोलेनाथ की गाथा और विवाह का प्रसंग सुनना चाहिए। देवी-देवताओं ने भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के पवित्र बंधन विवाह में अपनी सहभागिता दी थी। कथा के आयोजक शमशेर सिंह ने बताया कि 24 मार्च को हवन यज्ञ व भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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