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मरीजों को दो किलोमीटर उठाना पड़ रहा चारपाई पर
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उपमंडल स्वारघाट की ग्राम पंचायत टरवाड में बुजुर्ग महिला को चारपाई पर ले जाते परिजन
- फोटो : BILASPUR
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स्वारघाट (बिलासपुर)। जिले के स्वारघाट उपमंडल की टरवाड़ पंचायत का एक गांव ऐसा भी है जहां अगर कोई बीमार हो जाता है तो उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के लिए चारपाई पर उठाकर करीब डेढ़ से दो किलोमीटर ले जाना पड़ता है।
टरवाड़ पंचायत के वार्ड 7 के लोअर टिक्कर गांव में बरसात में अगर कोई बीमार होता है तो उसे चारपाई पर उठाकर ले जाना पड़ता है। इन गांवों के लिए सड़क तो बन रही है लेकिन अभी तक गांव तक नहीं पहुंची है। गांव के लिए 25 से 30 साल पहले बनाया रास्ता भी बरसात में घास से ढक जाता है। इससे रास्ता ढूंढने से भी नहीं मिलता।
इसका जीता-जागता प्रमाण शुक्रवार को देखने को मिला जब गांव की बीमार 90 वर्षीय बुजुर्ग प्रीतो देवी चारपाई से गिर गई। उसे अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों को डेढ़ से दो किलोमीटर पैदल चारपाई पर सुल्लियां कोठी हरियाला पक्की सड़क तक ले जाना पड़ा। इसके बाद परिजन बुजुर्ग महिला को निजी वाहन से पंजाब के आनंदपुर ले गए। इस वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
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ग्रामीण श्रवण कुमार, रामदास, हरिपाल, धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि आजादी के सात दशक बाद भी लोअर टिक्कर गांव के लोग पक्की सड़क सुविधा के लिए तरस रहे हैं। हालांकि गांव के लिए जनाली से कच्ची सड़क बनाई जा रही है। पैसे की कमी के चलते गांव तक नहीं पहुंच पाई है। जो सड़क बनी है बरसात में उसकी हालत बद से बदतर हो जाती है। बरसात में तो इस गांव के लोगों का जीवन बदतर हो जाता है।
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टरवाड़ पंचायत के वार्ड 7 के लोअर टिक्कर गांव में बरसात में अगर कोई बीमार होता है तो उसे चारपाई पर उठाकर ले जाना पड़ता है। इन गांवों के लिए सड़क तो बन रही है लेकिन अभी तक गांव तक नहीं पहुंची है। गांव के लिए 25 से 30 साल पहले बनाया रास्ता भी बरसात में घास से ढक जाता है। इससे रास्ता ढूंढने से भी नहीं मिलता।
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इसका जीता-जागता प्रमाण शुक्रवार को देखने को मिला जब गांव की बीमार 90 वर्षीय बुजुर्ग प्रीतो देवी चारपाई से गिर गई। उसे अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों को डेढ़ से दो किलोमीटर पैदल चारपाई पर सुल्लियां कोठी हरियाला पक्की सड़क तक ले जाना पड़ा। इसके बाद परिजन बुजुर्ग महिला को निजी वाहन से पंजाब के आनंदपुर ले गए। इस वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
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ग्रामीण श्रवण कुमार, रामदास, हरिपाल, धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि आजादी के सात दशक बाद भी लोअर टिक्कर गांव के लोग पक्की सड़क सुविधा के लिए तरस रहे हैं। हालांकि गांव के लिए जनाली से कच्ची सड़क बनाई जा रही है। पैसे की कमी के चलते गांव तक नहीं पहुंच पाई है। जो सड़क बनी है बरसात में उसकी हालत बद से बदतर हो जाती है। बरसात में तो इस गांव के लोगों का जीवन बदतर हो जाता है।