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Bilaspur News: एम्स में शोध को मिलेगी नई रफ्तार, एक ही छत के नीचे होगा डेटा विश्लेषण

Mon, 28 Sep 2026 12:59 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 12:59 AM IST
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Research at AIIMS to gain new momentum; data analysis to take place under one roof.
बायोस्टैटिस्टिक्स यूनिट शुरू, एसपीएसएस और एनवीवो सॉफ्टवेयर से थीसिस व शोध प्रोजेक्ट होंगे मजबूत
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थीसिस प्रोटोकॉल लेखन कार्यशाला में 40 पीजी और पीएचडी विद्यार्थियों ने लिया प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में शोध कार्यों के लिए नई तकनीकी सुविधा शुरू की गई है। संस्थान के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग में बायोस्टैटिस्टिक्स यूनिट स्थापित की गई है। इसमें लाइसेंस प्राप्त एसपीएसएस और एनवीवो सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाए गए हैं। अब पीजी विद्यार्थियों की थीसिस, फैकल्टी के शोध कार्यों और विभिन्न शोध प्रोजेक्ट के मात्रात्मक और गुणात्मक डेटा का विश्लेषण संस्थान में ही किया जा सकेगा। इससे शोधकर्ताओं को डेटा विश्लेषण के लिए जरूरी तकनीकी संसाधन एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगे। थीसिस प्रोटोकॉल लेखन कार्यशाला के दौरान एम्स के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने बायोस्टैटिस्टिक्स यूनिट का उद्घाटन किया। यूनिट को शोध गतिविधियों के लिए साझा संसाधन के रूप में विकसित किया गया है। इसका लाभ फैकल्टी, पीजी और यूजी विद्यार्थियों के अलावा शोध कार्य में जुटे अन्य लोगों को भी मिलेगा। कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञताओं के प्रथम वर्ष के 40 पीजी और पीएचडी विद्यार्थियों ने भाग लिया। पूरे दिन चले प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को थीसिस प्रोटोकॉल तैयार करने और शोध कार्य को वैज्ञानिक पद्धति के अनुरूप आगे बढ़ाने से जुड़ी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को शोध प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से समझाने पर भी जोर दिया गया। कार्यशाला में कार्यकारी निदेशक ने शोध में ईमानदारी और नैतिक मानकों का पालन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध में भरोसा बनाए रखने के लिए नैतिक तरीके से शोध करना जरूरी है। शोध के दौरान प्राप्त आंकड़ों और निष्कर्षों को वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप प्रस्तुत करना शोधकर्ता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग की ओर से नए बैच के पीजी विद्यार्थियों के लिए कार्यशाला श्रृंखला आयोजित की जाती है। विभाग के डॉ. अनुपम पराशर, डॉ. मीनल एम. ठाकरे, डॉ. नवप्रीत, डॉ. अनुपमा धीमान और डॉ. निकिता शर्मा विद्यार्थियों को शोध और थीसिस से संबंधित प्रशिक्षण दे रहे हैं। नई यूनिट से मात्रात्मक और गुणात्मक शोध के लिए सॉफ्टवेयर और तकनीकी सहायता संस्थान में ही उपलब्ध रहेगी।
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