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Bilaspur News: रावण ने किया माता सीता का हरण
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- रौड़ा सेक्टर में चल रही हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल बनी बाल रामलीला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के रौड़ा सेक्टर में चल रही हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल बाल रामलीला के पांचवें दिन सीता हरण, जटायु वध, भगवान राम की शबरी से भेंट, भगवान राम की हनुमान जी से भेंट और सुग्रीव से मैत्री और बाली वध दृश्य प्रमुखता से दिखाए गए।
इस संध्या में प्रो. अरुण शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने भगवान राम के दिखाए गए सदमार्ग पर चलने का आह्वान किया। बाल राम नाटक समिति के प्रधान सुमित शर्मा और संयोजक ताहिर मोहम्मद ने बताया कि यहां पर हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग मिलजुल कर रामलीला का आयोजन हर साल करते हैं। इस मंचन को सफल बनाने के लिए सभी लोग दान देते हैं। पर्दे के आगे और पर्दे के पीछे अहम भूमिका भी निभाते हैं। संध्या के प्रथम दृश्य में शूर्पणखा रावण को पंचवटी में अयोध्या से आए राज कुमारों और सीता के बारे में बताती है। साथ उनकी ओर से किए गए व्यवहार से अवगत करवाती है तो प्रतिशोध की ज्वाला में रावण सीता के हरण की योजना बनाता है। दूसरे दृश्य में रावण छद्म वेश धारण कर मारीच को अपने साथ लेकर जाता है, ताकि वह दोनों भाइयों को पंचवटी से दूर कर सके। रावण अपनी योजना में कामयाब हो जाता है और माता सीता का हरण कर लेता है। तीसरे दृश्य में हवाई मार्ग में वृद्ध जटायु रावण को रोकने का प्रयास करता है, लेकिन रावण उसके प्राण हर लेता है। चौथे दृश्य में सीता की खोज में राम और लक्ष्मण की भेंट शबरी से होती है, जहां पर शबरी उन्हें किष्किंधा पर्वत की ओर सुग्रीव आदि से सहायता लेने के लिए भेजती है। इस दौरान मार्ग में उनकी भेंट हनुमान से होती है। हनुमान जी दोनों भाइयों को सुग्रीव के पास ले जाते हैं और सारे विवरण से अवगत करवाते हैं। सुग्रीव भी अपने भाई बाली के इस प्रकार के अपराध से दुखी था। पांचवें दृश्य में भगवान राम बाली वध कर सुग्रीव को पंपापुर नरेश घोषित करते हैं और आगामी रणनीति तैयार करते हैं। निर्देशक अजय कुमार ने बताया कि इस संध्या में राम का किरदार देवांश, लक्ष्मण माधव, सीता सौम्या, रावण शिवांश हांडा, हनुमान की भूमिका इतिन हांडा ने निभाई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के रौड़ा सेक्टर में चल रही हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल बाल रामलीला के पांचवें दिन सीता हरण, जटायु वध, भगवान राम की शबरी से भेंट, भगवान राम की हनुमान जी से भेंट और सुग्रीव से मैत्री और बाली वध दृश्य प्रमुखता से दिखाए गए।
इस संध्या में प्रो. अरुण शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने भगवान राम के दिखाए गए सदमार्ग पर चलने का आह्वान किया। बाल राम नाटक समिति के प्रधान सुमित शर्मा और संयोजक ताहिर मोहम्मद ने बताया कि यहां पर हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग मिलजुल कर रामलीला का आयोजन हर साल करते हैं। इस मंचन को सफल बनाने के लिए सभी लोग दान देते हैं। पर्दे के आगे और पर्दे के पीछे अहम भूमिका भी निभाते हैं। संध्या के प्रथम दृश्य में शूर्पणखा रावण को पंचवटी में अयोध्या से आए राज कुमारों और सीता के बारे में बताती है। साथ उनकी ओर से किए गए व्यवहार से अवगत करवाती है तो प्रतिशोध की ज्वाला में रावण सीता के हरण की योजना बनाता है। दूसरे दृश्य में रावण छद्म वेश धारण कर मारीच को अपने साथ लेकर जाता है, ताकि वह दोनों भाइयों को पंचवटी से दूर कर सके। रावण अपनी योजना में कामयाब हो जाता है और माता सीता का हरण कर लेता है। तीसरे दृश्य में हवाई मार्ग में वृद्ध जटायु रावण को रोकने का प्रयास करता है, लेकिन रावण उसके प्राण हर लेता है। चौथे दृश्य में सीता की खोज में राम और लक्ष्मण की भेंट शबरी से होती है, जहां पर शबरी उन्हें किष्किंधा पर्वत की ओर सुग्रीव आदि से सहायता लेने के लिए भेजती है। इस दौरान मार्ग में उनकी भेंट हनुमान से होती है। हनुमान जी दोनों भाइयों को सुग्रीव के पास ले जाते हैं और सारे विवरण से अवगत करवाते हैं। सुग्रीव भी अपने भाई बाली के इस प्रकार के अपराध से दुखी था। पांचवें दृश्य में भगवान राम बाली वध कर सुग्रीव को पंपापुर नरेश घोषित करते हैं और आगामी रणनीति तैयार करते हैं। निर्देशक अजय कुमार ने बताया कि इस संध्या में राम का किरदार देवांश, लक्ष्मण माधव, सीता सौम्या, रावण शिवांश हांडा, हनुमान की भूमिका इतिन हांडा ने निभाई।
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