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Bilaspur News: क्षेत्रीय अस्पताल में क्यूआर स्कैनर की सुविधा अधर में, मरीज अब भी कतार में

Tue, 08 Sep 2026 12:23 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2026 12:23 AM IST
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QR scanner facility at regional hospital in limbo; patients still in queues.
क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में पर्ची बनाने के लिए खड़े मरीज व तीमारदार। संवाद
अस्पताल में हर रोज पहुंच रहे 800 मरीज, पंचायतों के व्हाट्सएप ग्रुप में स्कैनर साझा करने की योजना नहीं चढ़ी सिरे
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घर से पर्ची बनाने की सुविधा का मरीजों को अब भी इंतजार

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में रोजाना 800 तक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच पर्ची बनवाने की व्यवस्था अब भी पुराने ढर्रे पर चल रही है। मरीजों को घर बैठे पर्ची उपलब्ध करवाने के लिए क्यूआर स्कैनर की सुविधा शुरू करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आदेश के बावजूद यह व्यवस्था अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। योजना के तहत अस्पताल का क्यूआर स्कैनर पंचायतों के व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा किया जाना था। इससे ग्रामीण अस्पताल आने से पहले ही मोबाइल से पंजीकरण कर सकते थे। पर्ची बनने के बाद अस्पताल पहुंचकर मरीज सीधे संबंधित ओपीडी में जा सकते थे। इससे पर्ची काउंटर पर लगने वाली कतार और मरीजों के इंतजार का समय कम होना था। क्यूआर सुविधा शुरू नहीं होने के कारण मरीजों को अब भी अस्पताल पहुंचकर पर्ची काउंटर पर लाइन में लगना पड़ रहा है। सुबह ओपीडी शुरू होते ही अस्पताल में मरीजों की आवाजाही बढ़ जाती है। दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को पहले पर्ची बनवाने के लिए इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद डॉक्टर को दिखाने के लिए ओपीडी में भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। मरीजों का कहना है कि यदि घर से ही पर्ची बन जाए तो अस्पताल पहुंचने के बाद सीधे संबंधित ओपीडी में जाने की सुविधा मिल सकती है। इससे समय और परेशानी दोनों कम होंगे।
आरकेएस बैठक में क्यूआर स्कैनर सेवा शुरू होने का किया था दावा
आरकेएस की बैठक में अस्पताल प्रबंधन की ओर से क्यूआर स्कैनर से पर्ची बनाने की सुविधा उपलब्ध होने का दावा किया गया था। वहीं, पंचायत स्तर पर इसे पहुंचाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप को माध्यम बनाने की योजना थी। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने भी निर्देश दिए थे कि अस्पताल का क्यूआर स्कैनर पंचायतों के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया जाए। इसके बावजूद अभी तक यह प्रक्रिया प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो पाई है। ऐसे में डिजिटल सुविधा का लाभ ग्रामीणों और अन्य मरीजों को नहीं मिल रहा है।
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बारिश में बढ़े त्वचा रोगी
बरसात के मौसम में जिला अस्पताल की स्किन ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। रोजाना 50 से अधिक मरीज त्वचा संबंधी समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं। बारिश के बाद नमी और मौसम में बदलाव के कारण स्किन एलर्जी के मामले बढ़ने की बात सामने आ रही है। इससे स्किन ओपीडी पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है।
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मेडिसिन विशेषज्ञ नहीं, जनरल ओपीडी में बढ़ा दबाव
जिला अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञ नहीं होने का असर भी ओपीडी व्यवस्था पर पड़ रहा है। जनरल मेडिसिन ओपीडी में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण सुबह से ही मरीजों की कतार लग रही है। एक ओर रोजाना सैकड़ों मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, वहीं विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी से भी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही : मंत्री
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं, अगर उनका पालन नहीं हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। अस्पताल में मरीजों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसी उद्देश्य से क्यूआर स्कैनर की सुविधा शुरू करने के निर्देश दिए गए थे।
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