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एसीसी सीमेंट फैक्ट्री में धूल फांक रहे मजदूर, वीडियो किया जारी
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एसीसी सीमेंट फैक्ट्री के पैकिंग हाउस में प्रदूषण।
- फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। सीमेंट उद्योग मजदूरों को कंपनी के भीतर काम करने के लिए भले ही अच्छा वातावरण देने का दावा करता हो, लेकिन हकीकत इससे विपरीत है। एसीसी सीमेंट फैक्टरी बरमाणा के पैकिंग हाउस के मजदूरों ने कंपनी के भीतर का वीडियो बनाकर जारी किया है। जिसमें मजदूर भारी धूल में काम करने को मजबूर हैं। मजदूरों का कहना है कि उन्होंने इसकी शिकायत हर स्तर के अधिकारी से की है, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
हालात यह है कि सीमेंट फैक्टरी के पैकिंग हाउस के करीब 205 मजदूर खुद धूल मिट्टी फांक कर अपने परिवार का पेट पालने के लिए मजबूर हैं। एसीसी में काम कर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। हालत यह है कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, लेबर कमिश्नर समेत कई विभागों को मजदूरों ने वीडियो बनाकर इसकी शिकायतें भेजी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मजदूरों का कहना है कि इस माहौल में काम करने से बीमारियां हो रही हैं। लेकिन कंपनी कोई उचित कदम नहीं उठा रही है। इस बारे में कंपनी के एचआर हेड राजेंद्र ठाकुर से फोन पर बात करने की कोशिश की , लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
इनसेट
सीमेंट में मिलाया जाता है केमिकल, कोयले की मात्रा भी बढ़ाई
कंपनी में सीमेंट बनाने में पहले से ज्यादा कोयले की मात्रा बढ़ाई गई है। केमिकल का भी बड़ी मात्रा में प्रयोग हो रहा है। बिजली बचाने के लिए प्रदूषण को कम करने वाले उपकरणों को भी नहीं चलाया जाता है। पैकिंग हाउस में काम करना मुश्किल होता जा रहा है। पैकिंग हाउस में काम कर रहे मजदूरों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है।
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शिवराम सांख्यान, अध्यक्ष एसीसी वर्कर्स यूनियन
इनसेट
अधिकारियों का चंडीगढ़ तो मजदूरों की कंपनी के अस्पताल में होती है स्वास्थ्य जांच
कंपनी के अधिकारियों के स्वास्थ्य की जांच चंडीगढ़ के बड़े अस्पतालों में होती है लेकिन मजदूरों की सालाना एक बार मेडिकल जांच होती है। वो भी मात्र औपचारिकता होती है। स्वास्थ्य जांच कंपनी के अस्पताल में ही की जाती है। जबकि धूल मिट्टी से मजदूरों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं।
इनसेट
पर्यावरण अधिकारी से मांगी है रिपोर्ट, इसके बाद होगी कार्रवाई
एसीसी के मजदूरों से संबंधित मामला ध्यान मेें है। मजदूरों ने प्लांट के अंदर का वीडियो भेजा है। पर्यावरण अधिकारी से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट आने के बाद इस पर आगे की कार्रवाई करेंगे।
पंकज राय, उपायुक्त बिलासपुर
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हालात यह है कि सीमेंट फैक्टरी के पैकिंग हाउस के करीब 205 मजदूर खुद धूल मिट्टी फांक कर अपने परिवार का पेट पालने के लिए मजबूर हैं। एसीसी में काम कर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। हालत यह है कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, लेबर कमिश्नर समेत कई विभागों को मजदूरों ने वीडियो बनाकर इसकी शिकायतें भेजी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मजदूरों का कहना है कि इस माहौल में काम करने से बीमारियां हो रही हैं। लेकिन कंपनी कोई उचित कदम नहीं उठा रही है। इस बारे में कंपनी के एचआर हेड राजेंद्र ठाकुर से फोन पर बात करने की कोशिश की , लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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सीमेंट में मिलाया जाता है केमिकल, कोयले की मात्रा भी बढ़ाई
कंपनी में सीमेंट बनाने में पहले से ज्यादा कोयले की मात्रा बढ़ाई गई है। केमिकल का भी बड़ी मात्रा में प्रयोग हो रहा है। बिजली बचाने के लिए प्रदूषण को कम करने वाले उपकरणों को भी नहीं चलाया जाता है। पैकिंग हाउस में काम करना मुश्किल होता जा रहा है। पैकिंग हाउस में काम कर रहे मजदूरों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है।
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शिवराम सांख्यान, अध्यक्ष एसीसी वर्कर्स यूनियन
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अधिकारियों का चंडीगढ़ तो मजदूरों की कंपनी के अस्पताल में होती है स्वास्थ्य जांच
कंपनी के अधिकारियों के स्वास्थ्य की जांच चंडीगढ़ के बड़े अस्पतालों में होती है लेकिन मजदूरों की सालाना एक बार मेडिकल जांच होती है। वो भी मात्र औपचारिकता होती है। स्वास्थ्य जांच कंपनी के अस्पताल में ही की जाती है। जबकि धूल मिट्टी से मजदूरों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं।
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पर्यावरण अधिकारी से मांगी है रिपोर्ट, इसके बाद होगी कार्रवाई
एसीसी के मजदूरों से संबंधित मामला ध्यान मेें है। मजदूरों ने प्लांट के अंदर का वीडियो भेजा है। पर्यावरण अधिकारी से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट आने के बाद इस पर आगे की कार्रवाई करेंगे।
पंकज राय, उपायुक्त बिलासपुर