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Bilaspur News: एसीसी खदान क्षेत्र मामले में हाईकोर्ट में याचिका मंजूर, नोटिस जारी

Fri, 12 Dec 2025 11:24 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 12 Dec 2025 11:24 PM IST
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Petition in ACC mining area case accepted in High Court, notice issued
एसीसी के खदान क्षेत्र में बनी झील। फाइल फोटो
अदालत से--
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एक्सक्लूसिव

कंट्रोलर जनरल ऑफ माइंस सहित सभी प्रतिवादियों से जवाब तलब
एसीसी खदान क्षेत्र में प्राकृतिक झील बनने, मलबा डंपिंग का है मामला
पीएमओ ने मामले की शिकायत पर दिए थे कार्रवाई के आदेश
जांच न होने पर ग्रामीण ने हाईकोर्ट में दायर की है सिविल रिट

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा स्थित एसीसी सीमेंट प्लांट के खदान क्षेत्र में बनी प्राकृतिक झील और लाखों टन मलबा गांवों की ओर डंप किए जाने के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कंट्रोलर जनरल, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स (नागपुर) सहित सभी प्रमुख प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। धौन कोठी गांव के संजीव कुमार की ओर से दायर सिविल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने सभी प्रतिवादियों से याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
याचिका में याची संजीव कुमार ने कहा है कि एसीसी की खदान में नियमों के विपरीत वाटर लेवल के नीचे यानि अत्यधिक गहराई तक खनन किया गया, जिसके कारण खदान के भीतर एक बड़ी प्राकृतिक झील बन गई है। साथ ही खदान से निकला लाखों टन मलबा गांवों की ओर डंप किया जा रहा है, जिससे ढलानों की स्थिरता खतरे में पड़ गई है और नीचे बसे गांवों में भूस्खलन का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। याची के अनुसार कंपनी ने वाटर लेवल के नीचे खनन किया है, झील बनना पर्यावरणीय खतरे का संकेत है। गांवों की ओर डंपिंग करना लोगों की जान जोखिम में डालना है। किसी भी समय बड़ी त्रासदी हो सकती है। बताते चलें कि याची ने पहले इसकी शिकायत पीएमओ, केंद्रीय खनन मंत्रालय, सीएम, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को भेजी थी। पीएमओ ने शिकायत को गंभीर मानते हुए राज्य सचिवालय के लोक शिकायत निवारण सचिव को जांच कर कार्रवाई के लिए आग्रह किया था। याची ने कहा कि पीएमओ के निर्देशों के बावजूद न जांच हुई, न मौके पर निरीक्षण, न डंप की गई मिट्टी का कोई समाधान किया गया। इसी लापरवाही के बाद मामला हाईकोर्ट की शरण में लाया गया।
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अदालत ने याचिका में शामिल सभी प्रमुख पक्षों को नोटिस जारी किया है। इनमें कंट्रोलर जनरल, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स, नागपुर (मुख्य प्रतिवादी) बनाया गया है। भारत सरकार का खनन मंत्रालय, प्रदेश सरकार का उद्योग विभाग, जिला प्रशासन बिलासपुर, एसीसी सीमेंट प्लांट प्रबंधन,अन्य तकनीकी और पर्यावरण विभागों के अधिकारी भी प्रतिवादी हैं। प्रतिवादी संख्या 8 को कोर्ट ने अलग से नोटिस जारी किया है, जिसे 18 मार्च 2026 तक जवाब देना होगा। हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को निर्धारित समय तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामला 18 मार्च 2026 को फिर सुना जाएगा।
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