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Bilaspur News: पटवारी-कानूनगो की पेन डाउन हड़ताल जारी, राजस्व कार्य प्रभावित
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-जिले में हड़ताल के कारण 300 से अधिक मामलों का निपटारा रुका
-नहीं बन रहे लोगों के प्रमाण पत्र,जमाबंदी, निशानदेही, इंतकाल के काम रुके
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं/बिलासपुर। पटवारी और कानूनगो को जिला से स्टेट कैडर में शामिल करने के निर्णय के विरोध में संयुक्त पटवारी-कानूनगो महासंघ की अनिश्चितकालीन पेन डाउन हड़ताल जारी है। इस हड़ताल के चलते घुमारवीं उपमंडल समेत जिलेभर के तहसील कार्यालयों में राजस्व से जुड़ी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। तहसील परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है। वहीं लोगों के अन्य काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
पटवारियों और कानूनगो ने पहले चरण में 25 और 27 फरवरी को सामूहिक हड़ताल की थी, जिसके बाद 28 फरवरी से अनिश्चितकालीन पेन डाउन हड़ताल शुरू कर दी। इसका असर अब साफ दिखने लगा है। जिले में करीब 300 से अधिक निशानदेही, इंतकाल और जमाबंदी से जुड़े मामलों पर असर पड़ा है। तहसील कार्यालयों में जरूरी राजस्व कार्य न होने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में प्रदेश सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर पटवारी और कानूनगो को जिला कैडर से हटाकर स्टेट कैडर में शामिल कर दिया। इसका मतलब है कि अब पटवारी और कानूनगो को जिला स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में कहीं भी ट्रांसफर किया जा सकेगा। इस फैसले का पटवारी और कानूनगो ने विरोध किया है। उनका कहना है कि वे जिला कैडर के आधार पर भर्ती हुए थे और अब सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है।
संयुक्त पटवारी-कानूनगो महासंघ बिलासपुर के प्रधान सुनील दत्त जोशी ने बताया कि सरकार के इस फैसले से पटवारी और कानूनगो की पदोन्नति प्रभावित होगी और कई अधिकारी बिना प्रमोशन के ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने बिना पटवारियों और कानूनगो से राय लिए यह फैसला लिया है, जो उनके भविष्य के लिए नुकसानदायक साबित होगा। जब तक सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती और वार्ता के लिए नहीं बुलाती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द वार्ता नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। प्रदेश सरकार के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह निर्णय जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया है और इससे प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने पटवारी-कानूनगो संघ से हड़ताल समाप्त कर सहयोग करने की अपील की है।
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-नहीं बन रहे लोगों के प्रमाण पत्र,जमाबंदी, निशानदेही, इंतकाल के काम रुके
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं/बिलासपुर। पटवारी और कानूनगो को जिला से स्टेट कैडर में शामिल करने के निर्णय के विरोध में संयुक्त पटवारी-कानूनगो महासंघ की अनिश्चितकालीन पेन डाउन हड़ताल जारी है। इस हड़ताल के चलते घुमारवीं उपमंडल समेत जिलेभर के तहसील कार्यालयों में राजस्व से जुड़ी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। तहसील परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है। वहीं लोगों के अन्य काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
पटवारियों और कानूनगो ने पहले चरण में 25 और 27 फरवरी को सामूहिक हड़ताल की थी, जिसके बाद 28 फरवरी से अनिश्चितकालीन पेन डाउन हड़ताल शुरू कर दी। इसका असर अब साफ दिखने लगा है। जिले में करीब 300 से अधिक निशानदेही, इंतकाल और जमाबंदी से जुड़े मामलों पर असर पड़ा है। तहसील कार्यालयों में जरूरी राजस्व कार्य न होने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में प्रदेश सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर पटवारी और कानूनगो को जिला कैडर से हटाकर स्टेट कैडर में शामिल कर दिया। इसका मतलब है कि अब पटवारी और कानूनगो को जिला स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में कहीं भी ट्रांसफर किया जा सकेगा। इस फैसले का पटवारी और कानूनगो ने विरोध किया है। उनका कहना है कि वे जिला कैडर के आधार पर भर्ती हुए थे और अब सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है।
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संयुक्त पटवारी-कानूनगो महासंघ बिलासपुर के प्रधान सुनील दत्त जोशी ने बताया कि सरकार के इस फैसले से पटवारी और कानूनगो की पदोन्नति प्रभावित होगी और कई अधिकारी बिना प्रमोशन के ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने बिना पटवारियों और कानूनगो से राय लिए यह फैसला लिया है, जो उनके भविष्य के लिए नुकसानदायक साबित होगा। जब तक सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती और वार्ता के लिए नहीं बुलाती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द वार्ता नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। प्रदेश सरकार के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह निर्णय जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया है और इससे प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने पटवारी-कानूनगो संघ से हड़ताल समाप्त कर सहयोग करने की अपील की है।
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